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फेल होने के कारणों की समीक्षा करें और आगे बढ़े

Sat, 17 Nov 2018 02:47 AM IST
amarujala
amarujala Updated Sat, 17 Nov 2018 02:47 AM IST
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phel hone ke karno ki sameeksha kre aur aage bdhe
meerut - फोटो : meerut
अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चित्र समिति की ओर से शुक्रवार को बाल फिल्म महोत्सव का आयोजन नगर के दो स्कूलों और झिटकरी गांव में किया गया। बच्चों ने जागरुकता पर आधारित फिल्म देखकर अमर उजाला की सराहना की।  
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मोहल्ला गंज बाजार स्थित केके पब्लिक स्कूल में सुबह नौ बजे अमर उजाला फाउंडेशन एवं बाल चित्र समिति की तरफ से फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया। बच्चों ने जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव आधारित फिल्म कभी पास कभी फेल देखी। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रंबधक सुशील कुमार, प्रधानाचार्य जीपी सिन्हा, सचिव संजीव कुमार ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। अमर उजाला की ओर से बुकें भेंट कर प्रबंधक व प्रधानाचार्य का स्वागत किया गया। फिल्म के माध्यम से दिखाया गया कि बच्चा एक कच्ची मिट्टी के सामान होता है, उसे जिस तरह से तैयार किया जाए वह उसी तरह से तैयार हो जाता हैं। साथ ही जीवन में पास फेल होने से हमें कुछ न कुछ सीखना चाहिए और फेल होने के कारणों की समीक्षा कर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। बच्चों ने अमर उजाला से फिल्म देखने के बाद अपने-अपने विचार साझा किए और फिल्म प्रदर्शन के लिए अमर उजाला की प्रशंसा की। प्रबंधक सुशील कुमार ने भी अमर उजाला की इस पहल की सराहना की।
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केके पब्लिक स्कूल के बाद कालंद चुंगी के निकट सेंट जेवियर्स वर्ल्ड स्कूल में भी फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया। शिक्षक-शिक्षिकाओं ने फीता काटकर फिल्म का शुभारंभ कराया। बच्चों ने यहां पर करामाती कोट फिल्म देखी। फिल्म में एक गरीब बच्चे की कहानी को दिखाया गया है। जिसमें बहन-बहनोई उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते और उसे घर से बाहर निकाल देते है। सड़क पर बच्चे को ठिठुरते देख एक वृद्ध बच्चे को कोट दे देता हैं। उस कोट से बच्चे को एक सिक्का मिलता है उसके बाद से उसके सभी शौक पूरे होने लगते हैं। इसकी भनक दूसरों को लगती है तो वह उसकी जान के दुश्मन बन जाते हैं।  
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बच्चों ने फिल्म को देखकर बताया कि इस तरह की फिल्म से बच्चों को कुछ न कुछ जीवन में अच्छा सीखने को मिलता हैं। शाम के समय झिटकरी गांव में छोटा सिपाही फिल्म का प्रदर्शन किया गया। जिसमें ग्राम प्रधान प्रमोद के द्वारा फीता काटकर शुभारंभ किया गया। फिल्म देश की आजादी पर आधारित रही। एक बच्चा समुद्र के किनारे रहता है और वह समुद्र से शंख निकालता है और उसे एक गुफा में छिपा देता है। वह उस गुफा का रहस्य किसी को नहीं बताता। एक दिन उसकी एक व्यक्ति से गुफा में मुलाकात हो जाती है, तो बच्चा कहता है कि तुम गुफा में कैसे पहुंचे यह राज किसी के पास नहीं था। तो युवक कहता है कि वह उस गुफा में बचपन से आता है, तुम दूसरे बच्चे हो जो इस गुफा तक आ पहुंचे। दोनों के बीच दोस्ती बढ़ जाती है। उसकी पढ़ाई लिखाई बीच में ही छूट जाती है। एक दिन फुटबाल खेलते समय बच्चे उसे चिढ़ा देते हैं, और उसकी हसीं उड़ाते हैं। उसके अगले दिन गेंद समुंद्र में गिर जाती है, उसे निकालने के दौरान एक स्कूली बच्चा समुद्र की लहरों में फंस जाता है, जिसे वह बच्चा निकालता है, जिसकी हंसी उड़ाई गई थी। तब एक शिक्षिका उससे नाम पता पूछती है उसके घर जाती है। तब दोबारा से उसकी शिक्षा शुरू होती हैं। यहां पर भी ग्रामीणों ने फिल्म महोत्सव की प्रशंसा की। इस मौके पर प्रधान प्रमोद कुमार, पूर्व प्रधान अशोक सिरोही, जयकरण, सुधीर कुमार, जसवीर सिंह, रमेश फौजी, सुदेशपाल फौजी, राजेंद्र सैनी, अमरजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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