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कीटनाशक खाने से दो बेटियों की मौत, पिता गंभीर
अमर उजाला/मेरठ
Updated Sun, 14 Aug 2016 01:59 AM IST
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बच्चियों की मौत के बाद विलाप करते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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जानी कस्बे के जमाईपुरा गांव में कीटनाशक खाने से दो मासूम बच्चियों की मौत हो गई, जबकि उनके पिता की हालत गंभीर है। परिजनों ने इसे हादसा बताते हुए कानूनी कार्रवाई से इंकार कर दिया। हालांकि चर्चा उड़ी थी कि पत्नी से हुए विवाद के कारण पति ने यह कदम उठाया है।
जानी कस्बे के जमाईपुरा निवासी आसिफ (30) पुत्र रफीक पेशे से ड्राइवर है। परिजनों का कहना है कि शनिवार सुबह आसिफ ने घर में शिकंजी बनाकर पी और अपनी बेटी सुहाना (6) और सोनम (5) को भी पिलाई। शिकंजी पीते ही पिता और दोनों बेटियों की हालत बिगड़ गई। उनके मुंह से झाग आने लगे। पड़ोस के लोगों ने तीनों को जानी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर परिजन तीनों को मेरठ के बागपत रोड स्थित साईं नर्सिंग होम ले गए, जहां दोनों बेटियों की मौत हो गई। जबकि आसिफ की हालत गंभीर बनी हुई है। उधर दोनों बेटियों के शव पहुंचते ही घर में कोहराम मच गया। मां गुलशाना का रो-रोकर बुरा हाल था।
सूचना पर थाना जानी पुलिस मृतक के घर पहुंची, लेकिन वहां मौजूद महिलाओं ने हादसा बताते हुए कार्रवाई से इंकार कर दिया। इसके बाद पुलिस लौट गई। ग्रामीणों ने बताया कि आसिफ की आर्थिक हालत बेहद खराब थी। कुछ दिनों से वह बेरोजगार भी था। हालांकि इस मामले में सुबह चर्चा उड़ी थी कि पत्नी से विवाद के बाद पति ने दोनों बेटियों को कीटनाशक खिलाया और खुद भी खा लिया।
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कोट
आसिफ के पिता रफीक ने गांव के गणमान्य लोगों के साथ थाने आकर लिखकर दिया है कि आसिफ और दोनों बच्चियों ने भूलवश घर में रखा कीटनाशक खा लिया था। यह अनजाने में हुआ हादसा है। इसलिए वह इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते। दोनों बच्चियों के शवों का पोस्टमार्टम कराने से भी उन्होंने मना कर दिया। परिवार और गांव वालों के अनुरोध पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
- जितेंद्र सिंह कार्यवाहक एसओ थाना जानी
सुहाना और सोनम की मौत पर हर आंख हुई नम
जिंदगी और मौत से जूझ रहे आसिफ और गुलशाना की चार बेटियां थीं। घर में माता-पिता के अलावा दो भाई, एक भाभी व उनके बच्चे रहते हैं। परिजनों के अनुसार, घटना के वक्त घर में केवल आसिफ, उसकी पत्नी और बच्चे थे। छोटे भाई की पत्नी भी थी। पड़ोसियों के अनुसार, सुबह करीब 10 बजे आसिफ के मकान से रोने-चिल्लाने की आवाज आई तो मोहल्ले वाले उनके यहां पहुंचे। सुहाना और सोनम बेहोश पड़ी थीं। घर में कोई मर्द नहीं था, इसलिए लोग ही तीनों को डॉक्टर के पास ले गए। बाद में परिजन और कुछ पड़ोसी दोनों शव लेकर जैसे ही घर पहुंचे, चीख-पुकार मच गई। मां गुलशाना शवों से लिपकर चीखने लगी। यह देख वहां जमा लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। दरअसल शव आने से पहले गुलशाना को नहीं पता था कि उसकी बेटियां इस दुनिया में नहीं रहीं। देर शाम परिजनों ने दोनों को सुपुर्दे खाक कर दिया।
सूचना मिलते ही दौड़े परिजन
आसिफ के पिता रफीक ने बताया कि वह और उसका छोटा बेटा भी ड्राइवरी और हेल्परी करते हैं। शनिवार सुबह वह गाड़ी से बागपत जिले के टटीरी कस्बे गए थे। वहीं उन्हें पड़ोसियों से सूचना मिली, तो वे तुरंत गाड़ी लेकर अस्पताल पहुंचे। वहीं आसिफ की मां इस्लामन ने बताया कि वह सुबह बीमे की किश्त जमा कराने गांव के एक व्यक्ति के पास गई थी। घर आने पर उसे घटना का पता चला।
घटना को संदिग्ध बना रहे हालात
इस केस में कई ऐसे तथ्य हैं, जो घटना के संदिग्ध होने की ओर इशारा कर रहे हैं। मेरठ के अस्पताल में डॉक्टरों ने परिजनों से कीटनाशक मांगा, तो उन्होंने सल्फास का पाउच लाकर दे दिया। परिजनों का कहना था कि इसी पाउच में मौजूद कीटनाशक को शिकंजी में डाला था। लेकिन सल्फास का पाउच एकदम नया लग रहा था। जैसे उसे अस्पताल के आसपास से ही खरीदा गया हो। उस पर साफ तौर पर जहरीला शब्द लिखा है, ऐसे में अनजाने में उसे खाए जाने की बात गले से नहीं उतरती। अस्पताल कर्मियों ने इस पाउच को सुरक्षित रख लिया है।
रघुनाथपुर में रहता था परिवार
आसिफ मूल रूप से जानी के पास ही स्थित गांव रघुनाथपुर का रहने वाला है। करीब सात-आठ साल पहले वह परिवार समेत जमाईपुरा आकर रहने लगा था। शुरू में उसने कड़ी-सिल्ली का काम किया। घाटा होने पर उसने यह काम बंद कर दिया और ड्राइवरी करने लगा।
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जानी कस्बे के जमाईपुरा निवासी आसिफ (30) पुत्र रफीक पेशे से ड्राइवर है। परिजनों का कहना है कि शनिवार सुबह आसिफ ने घर में शिकंजी बनाकर पी और अपनी बेटी सुहाना (6) और सोनम (5) को भी पिलाई। शिकंजी पीते ही पिता और दोनों बेटियों की हालत बिगड़ गई। उनके मुंह से झाग आने लगे। पड़ोस के लोगों ने तीनों को जानी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर परिजन तीनों को मेरठ के बागपत रोड स्थित साईं नर्सिंग होम ले गए, जहां दोनों बेटियों की मौत हो गई। जबकि आसिफ की हालत गंभीर बनी हुई है। उधर दोनों बेटियों के शव पहुंचते ही घर में कोहराम मच गया। मां गुलशाना का रो-रोकर बुरा हाल था।
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सूचना पर थाना जानी पुलिस मृतक के घर पहुंची, लेकिन वहां मौजूद महिलाओं ने हादसा बताते हुए कार्रवाई से इंकार कर दिया। इसके बाद पुलिस लौट गई। ग्रामीणों ने बताया कि आसिफ की आर्थिक हालत बेहद खराब थी। कुछ दिनों से वह बेरोजगार भी था। हालांकि इस मामले में सुबह चर्चा उड़ी थी कि पत्नी से विवाद के बाद पति ने दोनों बेटियों को कीटनाशक खिलाया और खुद भी खा लिया।
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आसिफ के पिता रफीक ने गांव के गणमान्य लोगों के साथ थाने आकर लिखकर दिया है कि आसिफ और दोनों बच्चियों ने भूलवश घर में रखा कीटनाशक खा लिया था। यह अनजाने में हुआ हादसा है। इसलिए वह इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते। दोनों बच्चियों के शवों का पोस्टमार्टम कराने से भी उन्होंने मना कर दिया। परिवार और गांव वालों के अनुरोध पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
- जितेंद्र सिंह कार्यवाहक एसओ थाना जानी
सुहाना और सोनम की मौत पर हर आंख हुई नम
जिंदगी और मौत से जूझ रहे आसिफ और गुलशाना की चार बेटियां थीं। घर में माता-पिता के अलावा दो भाई, एक भाभी व उनके बच्चे रहते हैं। परिजनों के अनुसार, घटना के वक्त घर में केवल आसिफ, उसकी पत्नी और बच्चे थे। छोटे भाई की पत्नी भी थी। पड़ोसियों के अनुसार, सुबह करीब 10 बजे आसिफ के मकान से रोने-चिल्लाने की आवाज आई तो मोहल्ले वाले उनके यहां पहुंचे। सुहाना और सोनम बेहोश पड़ी थीं। घर में कोई मर्द नहीं था, इसलिए लोग ही तीनों को डॉक्टर के पास ले गए। बाद में परिजन और कुछ पड़ोसी दोनों शव लेकर जैसे ही घर पहुंचे, चीख-पुकार मच गई। मां गुलशाना शवों से लिपकर चीखने लगी। यह देख वहां जमा लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। दरअसल शव आने से पहले गुलशाना को नहीं पता था कि उसकी बेटियां इस दुनिया में नहीं रहीं। देर शाम परिजनों ने दोनों को सुपुर्दे खाक कर दिया।
सूचना मिलते ही दौड़े परिजन
आसिफ के पिता रफीक ने बताया कि वह और उसका छोटा बेटा भी ड्राइवरी और हेल्परी करते हैं। शनिवार सुबह वह गाड़ी से बागपत जिले के टटीरी कस्बे गए थे। वहीं उन्हें पड़ोसियों से सूचना मिली, तो वे तुरंत गाड़ी लेकर अस्पताल पहुंचे। वहीं आसिफ की मां इस्लामन ने बताया कि वह सुबह बीमे की किश्त जमा कराने गांव के एक व्यक्ति के पास गई थी। घर आने पर उसे घटना का पता चला।
घटना को संदिग्ध बना रहे हालात
इस केस में कई ऐसे तथ्य हैं, जो घटना के संदिग्ध होने की ओर इशारा कर रहे हैं। मेरठ के अस्पताल में डॉक्टरों ने परिजनों से कीटनाशक मांगा, तो उन्होंने सल्फास का पाउच लाकर दे दिया। परिजनों का कहना था कि इसी पाउच में मौजूद कीटनाशक को शिकंजी में डाला था। लेकिन सल्फास का पाउच एकदम नया लग रहा था। जैसे उसे अस्पताल के आसपास से ही खरीदा गया हो। उस पर साफ तौर पर जहरीला शब्द लिखा है, ऐसे में अनजाने में उसे खाए जाने की बात गले से नहीं उतरती। अस्पताल कर्मियों ने इस पाउच को सुरक्षित रख लिया है।
रघुनाथपुर में रहता था परिवार
आसिफ मूल रूप से जानी के पास ही स्थित गांव रघुनाथपुर का रहने वाला है। करीब सात-आठ साल पहले वह परिवार समेत जमाईपुरा आकर रहने लगा था। शुरू में उसने कड़ी-सिल्ली का काम किया। घाटा होने पर उसने यह काम बंद कर दिया और ड्राइवरी करने लगा।