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मेरठ में कागजों में हो रहा कूड़ा निस्तारण, सामने आई निगम की कारगुजारी, चुप्पी साध रहे अधिकारी

Thu, 20 Jun 2024 12:29 PM IST
Dimple Sirohi गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 20 Jun 2024 12:29 PM IST
सार

डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में भ्रष्टाचार के मामले के बाद मेरठ नगर निगम की एक और कारगुजारी सामने आई है। नगर निगम मंगतरामपुर में कूड़ा निस्तारण कागजों में ही कर रहा है, जबकि यहां झुग्गियों में लोग रह रहे हैं।

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Performance of Meerut Municipal Corporation: Garbage disposal is happening on paper, people are living in huts
झुग्गियां, मेरठ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कूड़ा गाड़ी में भ्रष्टाचार का मामला ठंडा हुआ नहीं कि नगर निगम की एक और कारगुजारी उजागर हो गई। मंगतपुरम में कूड़ा निस्तारण के लिए निगम एक तरफ ऑनलाइन टेंडर की प्रक्रिया कर रहा है, दूसरी तरफ कागजों में 11 महीने से कूड़ा प्लांट चलना दर्शाया हुआ है। 

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इसकी रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ निगम ने एनजीटी में लगा दी है। अमर उजाला टीम ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की। मंगतपुरम में प्लांट नहीं मिला, बल्कि वहां कूड़े के पहाड़ पर झोपड़ी बनाकर लोग रहते मिले। इसको लेकर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।  

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मंगतपुरम में कूड़े का पहाड़ लगा है। सुपरटेक पामग्रीन, सूर्यापुरम, सूर्या पैलेस और पर्स रेजीडेंसी सहित कई कॉलोनी में रहने वाली 50 हजार की आबादी इससे परेशान है। स्वच्छ भारत मिशन ने मंगतपुरम से कूड़ा खत्म करने के लिए जून 2023 को निगम को 9.20 करोड़ रुपया दिया हुआ है। 

निगम ने कूड़ा निस्तारण के लिए ऑनलाइन टेंडर की प्रक्रिया चला रखी है। अब टेंडर खुल गया, जिसमें तीन कंपनी ने हिस्सा लिया। 20 जून यानि आज तीनों कंपनी के अधिकारियों के साथ निगम अधिकारी मंथन करेंगे कि कूड़े का निस्तारण किस पद्धति से होगा। 

बुधवार को निगम का नया कारनामा उजागर हो गया। इसमें निगम ने मंगतपुरम में अगस्त 2023 से कूड़ा प्लांट चालू होना बताया, उसकी  रिपोर्ट एनजीटी में प्रस्तुत की। इसकी जानकारी लगने पर अमर उजाला की टीम मंगतपुरम में पहुंची, जहां पर कूड़े के ऊपर झोपड़ी बनाकर लोग रहते मिले। 

निगम के अधिकारी आते हैं और बार-बार कूड़ा खत्म करने की चर्चा करके चले जाते हैं। कागजों में मंगतपुरम में कूड़े का प्लांट चलाने के पीछे निगम अधिकारियों का क्या मकसद है, इसका खुलासा तो विभागीय जांच के बाद होगा।

 
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आज निगम में कैसे करेंगे अधिकारी मंथन 
मंगतपुरम में कूड़ा कैसे खत्म करेंगे, इसको लेकर आज निगम में मंथन होगा। सवाल उठता है कि निगम ने लिखापढ़ी में मंगतपुरम में 11 महीने से कूड़े के निस्तारण के लिए प्लांट चला रखा है। ऐसी स्थिति में कंपनी के अधिकारी कूड़ा खत्म करने के लिए कैसे चर्चा करेंगे। करीब एक साल से टेंडर-टेंडर का खेल निगम में चल रहा है। फाइल गायब हो जाती तो कभी अधिकारियों की उदासीनता के चलते टेंडर नहीं हो पाया। 

अधिकारी साध गए हैं चुप्पी 
इस मामले में निगम के अधिकारी चुप्पी साध गए हैं। कूड़ा गाड़ी के मामले में जांच हुई, जिसमें कमेटी ने प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी, स्वच्छ भारत मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर मयंक मोहन और कर्मचारी नमन जैन को दोषी करार दिया है। जिन पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

 

निगम पर जुर्माना लगने की भी तैयारी
सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश खुराना की शिकायत पर एनजीटी ने कमेटी बनाकर मेरठ में तीन मई को जांच कराई थी। कमेटी ने लोहियानगर, गांवड़ी में कूड़ा प्लांट व नौचंदी में ट्रांसफर स्टेशन का मुआयना किया था। कमेटी की जांच रिपोर्ट पर 24 मई 2024 को एनजीटी कोर्ट में सुनवाई है। निगम पर जुर्माना लगाने की बात कहते प्रदूषण बोर्ड को आदेश दिया था। इसी दौरान निगम ने कोर्ट में कूड़ा गाड़ी और मंगतपुरम में  कूड़ा प्लांट चलने की रिपोर्ट प्रस्तुत  की थी। जिसमें इसका खुलासा हुआ है। 

मंगतपुरम में कूड़ा निस्तारण करने के लिए मेरे द्वारा बार-बार पत्राचार किया गया, तब जाकर टेंडर खुला। जल्द ही कूड़ा खत्म करने का काम किया जाएगा। कागजों में मंगतपुरम में 11 महीने से कूड़ा प्लांट चल रहा है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। -हरिकांत अहलूवालिया, महापौर

मंगतपुरम में कोई प्लांट नहीं चल रहा है, वहां का कूड़ा खत्म करने के लिए ऑनलाइन टेंडर की प्रक्रिया जारी है। कागजों में मंगतपुरम में कूड़ा प्लांट चलना दर्शाया गया, यह एक बड़ी साजिश है। नगर आयुक्त को जानकारी दे दी गई है। जांच की जाएगी।  -डॉ. हरपाल सिंह, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी  
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