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पर्ची कार्ड नहीं आयुष्मान कार्ड लाओगे, तो ही इलाज पाओगे

Wed, 18 Sep 2019 01:48 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2019 01:48 AM IST
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people in trouble in ayushman bharat yojna
मेरठ। आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों को भी इलाज से महरूम होना पड़ रहा है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने न तो योजना का सही से प्रचार प्रसार किया और न ही योजना में आ रही परेशानियों को गंभीरता से दूर करने की कोशिश की है। नतीजतन, ऐसे लोग काफी संख्या में हैं, जिनके अभी तक गोल्डन कार्ड तक नहीं बने हैं। जो पर्चा कार्ड स्वास्थ्य विभाग ने बांटे थे, उनसे भी कई अस्पताल इलाज करने से मना कर चुके हैं। ऐसे में लाभार्थी योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
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केस स्टडी-1
गोल्डन कार्ड लाओगे तो ही मिलेगा आरोग्य योजना में इलाज
सरूरपुर थाना क्षेत्र के जसड़ गांव के रहने वाले दिलशाद जन आरोग्य योजना के पात्र हैं। उनकेपास स्वास्थ्य विभाग द्वारा बांटा गया पर्चा कार्ड भी है। जिसमें उनकी और उनके परिवार केसदस्यों की जानकारी है, लेकिन उन्हें एक निजी अस्पताल में इलाज करने से मना कर दिया गया है। उनके दिमाग की नस फट गई थी। प्राथमिक उपचार मिलने के बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने पर्चा कार्ड दिखाया, मगर अस्पताल ने उसे मानने से इंकार कर दिया। अस्पताल वालों का कहना है कि गोल्डन कार्ड लाओ, तो ही आयुष्मान के तहत इलाज करेंगे। दिलशाद की पत्नी शबनम ने मंगलवार को प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा से भी इसकी शिकायत की। उन्होंने सीएमओ को निस्तारण के लिए कहा। सीएमओ का कहना है कि जल्द ही मरीज का गोल्डन कार्ड बनवाया जाएगा।
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केस स्टडी-2
गोल्डन कार्ड नहीं था, 50 हजार रुपये देने पड़े
लिसाड़ी गेट के रहने वाले कलीम का कहना है कि वह जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों की सूची में हैं, मगर उनका और उनके परिवार का अभी तक गोल्डन कार्ड नहीं बना है। पिछले दिनों उनकी माता सुल्ताना की कूल्हे की हड्डी का ऑपरेशन निजी अस्पताल में कराया गया, लेकिन अस्पताल वालों ने बिना गोल्डन कार्ड के आयुष्मान में इलाज करने मना कर दिया। 50 हजार रुपये देने पड़े, तब जाकर इलाज हुआ। अब गोल्डन कार्ड के लिए आवेदन किया है। उसके लिए भी आधार कार्ड मांग रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग राशन कार्ड या वोटर आईडी कार्ड के जरिये भी गोल्डन कार्ड बनाने का दावा करता है।
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केस स्टडी-3
हर सदस्य का बनवाना पड़ेगा गोल्डन कार्ड
पांडवनगर के रहने वाले प्रशांत वर्मा का गोल्डन कार्ड नहीं बना है। उन्हें पता था कि परिवार के एक सदस्य का ही गोल्डन कार्ड बन जाए तो काफी है, मगर अब पता चला हैकि परिवार के सभी सदस्यों के गोल्डन कार्ड होने चाहिए, तभी आयुष्मान के तहत इलाज मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग ने उनकेयहां इसका प्रचार प्रसार ही नहीं किया।

आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड पर लिखे हैं गलत नाम
जिला अस्पताल में जन सुविधा केंद्र में गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए लोग आ रहे हैं। उनमें से अधिकांश के वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड में नाम गलत लिखे हुए हैं, जिस कारण उन्हें गोल्डन कार्ड बनाने में परेशानी हो रही है। उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों, घर केपते, राशन कार्ड आदि का मिलान कर कार्ड बनाना पड़ा रहा है।
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