{"_id":"589e184b4f1c1b7b0d379107","slug":"pehle-charan-se-saaf-hogi","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले चरण से साफ होगी पूरे चुनाव की तस्वीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहले चरण से साफ होगी पूरे चुनाव की तस्वीर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Feb 2017 02:25 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पश्चिमी यूपी के जिलों में पहले चरण का मतदान पूरे उत्तर प्रदेश के लिहाज से अहम होगा। लोकसभा चुनाव में जिस तरह से पहले चरण से हवा चली थी, कुछ उसी तरह की उम्मीद भाजपा ने संजो रखी है। वहीं मुस्लिम मतों का झुकाव भी इसी चरण से पूरे प्रदेश को संदेश देगा। रालोद को अपने पक्ष में एक बार फिर जाट वोटरों के आने की उम्मीद है।
अति पिछड़ा वोटर भी अहम
लोकसभा चुनाव में भाजपा की ओर हिंदू मतों का ध्रुवीकरण हुआ था। हालांकि विधानसभा चुनाव में अधिकांश सीटों पर ऐसा होना आसान नहीं होगा। अति पिछड़ा वर्ग के वोटर भी इस चरण में अहम हैं। इनके वोटों का रुझान भी आगे के चरणों की राह तय करेगा। भाजपा नेताओं का मानना है कि लोकसभा चुनाव की तरह संदेश जाने पर फ्लोटिंग वोट उनके पाले में आने की संभावना बढ़ जाएगी।
मुस्लिम मतों पर गैर भाजपा दलों का दांव
बसपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ ही रालोद की भी मुस्लिम मतों पर निगाह है। बसपा ने इसी को देखते हुए अच्छी संख्या में मुस्लिम प्रत्याशी प्रथम चरण के चुनाव में उतारे हैं। वहीं सपा-कांग्रेस भी हर हाल में मुस्लिमों का साथ चाहती हैं। पहले चरण में साफ हो जाएगा कि मुस्लिम वोटरों का बंटवारा होता है, या फिर एकमुश्त वोट पड़ते हैं। ऐसी कई सीटें हैं, जहां बसपा से मुस्लिम, तो सपा-कांग्रेस गठबंधन से हिंदू उम्मीदवार मैदान में है। इन सीटों पर मुस्लिमों का रुख अहम होगा। सुरक्षित सीटों पर भी मुसलमान वोटर खास बन जाते हैं।
विज्ञापन
जाट वोटरों को लेकर रस्साकसी
वेस्ट यूपी के कुछ हिस्सों को जाट लैंड कहा जाता है। रालोद ने अपने परंपरागत जाट वोटरों को साथ लाने के लिए कमर कर रखी है, तो भाजपा उन्हें लोकसभा चुनाव की तरह ही अपने साथ रखना चाहती है। रालोद मुखिया अजित सिंह, उनके बेटे जयंत चौधरी और बहू चारू ने पूरा दम लगा रखा है। वहीं भाजपा ने भी स्थानीय नेताओं में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान समेत हरियाणा के बड़े नेता भी पश्चिम में लगाए। अब जाटों को आरक्षण दिलाने की बात कही जा रही है।
आसपास के जिलों में ही है दूसरा चरण
दूसरे चरण का चुनाव सहारनपुर, बिजनौर और मुरादाबाद आदि जिलों में होगा, जो पहले चरण वाले जिलों से सटे हुए हैं। इन जिलों के लोगों की आपस में रिश्तेदारियां हैं, व्यापारिक और सामाजिक जुड़ाव भी है। शामली और मुजफ्फरनगर का असर सहारनपुर और बिजनौर जैसे जिलों में सीधा पड़ेगा। ऐसे में सभी दलों की निगाह पहले चरण में ही अपनी कमजोरियों को दूर करके मतदाताओं को संदेश देने की है। शनिवार को वोटिंग के बाद सोशल मीडिया पर भी आकलन का दौर शुरू हो जाएगा, जो अगले चरण की पोलिंग पर निश्चित रूप से प्रभाव डालेगा।
दिग्गजों की सीटें और प्रतिष्ठा दांव पर
भाजपा के कई फायर ब्रांड नेताओं सहित दूसरे दलों के दिग्गज भी चुनाव में हैं। पहले चरण में भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी, संगीत सोम, सुरेश राणा सहित हुकुुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह का चुनाव भी है। सपा से शाहिद मंजूर, नाहिद हसन और अतुल प्रधान को पहले चरण में ही परीक्षा देनी है। रालोद के गढ़ माने जाने वाले बागपत जिले में शनिवार को ही वोट डाले जाएंगे। बसपा की ओर से नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने लगातार प्रचार किया है, ऐसे में उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी। इन जिलों के भाजपा सांसदों पर भी अपने क्षेत्रों में जीत दिलाने की जिम्मेदारी है।
विज्ञापन
अति पिछड़ा वोटर भी अहम
लोकसभा चुनाव में भाजपा की ओर हिंदू मतों का ध्रुवीकरण हुआ था। हालांकि विधानसभा चुनाव में अधिकांश सीटों पर ऐसा होना आसान नहीं होगा। अति पिछड़ा वर्ग के वोटर भी इस चरण में अहम हैं। इनके वोटों का रुझान भी आगे के चरणों की राह तय करेगा। भाजपा नेताओं का मानना है कि लोकसभा चुनाव की तरह संदेश जाने पर फ्लोटिंग वोट उनके पाले में आने की संभावना बढ़ जाएगी।
विज्ञापन
मुस्लिम मतों पर गैर भाजपा दलों का दांव
बसपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ ही रालोद की भी मुस्लिम मतों पर निगाह है। बसपा ने इसी को देखते हुए अच्छी संख्या में मुस्लिम प्रत्याशी प्रथम चरण के चुनाव में उतारे हैं। वहीं सपा-कांग्रेस भी हर हाल में मुस्लिमों का साथ चाहती हैं। पहले चरण में साफ हो जाएगा कि मुस्लिम वोटरों का बंटवारा होता है, या फिर एकमुश्त वोट पड़ते हैं। ऐसी कई सीटें हैं, जहां बसपा से मुस्लिम, तो सपा-कांग्रेस गठबंधन से हिंदू उम्मीदवार मैदान में है। इन सीटों पर मुस्लिमों का रुख अहम होगा। सुरक्षित सीटों पर भी मुसलमान वोटर खास बन जाते हैं।
विज्ञापन
जाट वोटरों को लेकर रस्साकसी
वेस्ट यूपी के कुछ हिस्सों को जाट लैंड कहा जाता है। रालोद ने अपने परंपरागत जाट वोटरों को साथ लाने के लिए कमर कर रखी है, तो भाजपा उन्हें लोकसभा चुनाव की तरह ही अपने साथ रखना चाहती है। रालोद मुखिया अजित सिंह, उनके बेटे जयंत चौधरी और बहू चारू ने पूरा दम लगा रखा है। वहीं भाजपा ने भी स्थानीय नेताओं में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान समेत हरियाणा के बड़े नेता भी पश्चिम में लगाए। अब जाटों को आरक्षण दिलाने की बात कही जा रही है।
आसपास के जिलों में ही है दूसरा चरण
दूसरे चरण का चुनाव सहारनपुर, बिजनौर और मुरादाबाद आदि जिलों में होगा, जो पहले चरण वाले जिलों से सटे हुए हैं। इन जिलों के लोगों की आपस में रिश्तेदारियां हैं, व्यापारिक और सामाजिक जुड़ाव भी है। शामली और मुजफ्फरनगर का असर सहारनपुर और बिजनौर जैसे जिलों में सीधा पड़ेगा। ऐसे में सभी दलों की निगाह पहले चरण में ही अपनी कमजोरियों को दूर करके मतदाताओं को संदेश देने की है। शनिवार को वोटिंग के बाद सोशल मीडिया पर भी आकलन का दौर शुरू हो जाएगा, जो अगले चरण की पोलिंग पर निश्चित रूप से प्रभाव डालेगा।
दिग्गजों की सीटें और प्रतिष्ठा दांव पर
भाजपा के कई फायर ब्रांड नेताओं सहित दूसरे दलों के दिग्गज भी चुनाव में हैं। पहले चरण में भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी, संगीत सोम, सुरेश राणा सहित हुकुुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह का चुनाव भी है। सपा से शाहिद मंजूर, नाहिद हसन और अतुल प्रधान को पहले चरण में ही परीक्षा देनी है। रालोद के गढ़ माने जाने वाले बागपत जिले में शनिवार को ही वोट डाले जाएंगे। बसपा की ओर से नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने लगातार प्रचार किया है, ऐसे में उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी। इन जिलों के भाजपा सांसदों पर भी अपने क्षेत्रों में जीत दिलाने की जिम्मेदारी है।