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Meerut News: 13 दिन बाद पहुंचा किसानों के बैंक खातों में भुगतान
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खबर का असर...
संवाद न्यूज एजेंसी
बहसूमा। टिकौला चीनी मिल द्वारा भेजा गया बकाया गन्ना भुगतान बृहस्पतिवार शाम तीन समितियों से जुड़े करीब 16 हजार किसानों के बैंक खातों में पहुंच गया है। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में 12 दिन बाद भी किसानों काे नहीं मिला भुगतान की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। बृहस्पतिवार शाम को ही चीनी मिल ने किसानों के बैंक खातों में गन्ना भुगतान भेज दिया है। बैंक प्रबंधक ने इसकी पुष्टि की है।
सहकारी गन्ना समिति में हुए घोटाले के बाद प्रदेश सरकार ने इस बार समितियों की मध्यस्थता को समाप्त कर पारदर्शिता लाने के लिए किसानों का गन्ना भुगतान सीधा बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था लागू की है। लेकिन यह व्यवस्था बहसूमा क्षेत्र के किसानों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई थी। 14 नवंबर को टिकौला शुगर मिल द्वारा भेजा गया गन्ना भुगतान किसानों के बैंक खातों में नहीं पहुंचा। किसान लगातार बैंक के चक्कर काट रहे थे। मिल कर्मचारी किसानों को समितियों द्वारा जिला सहकारी बैंक का पुराना आईएफएससी कोड भेजने की बात कह कह रहे थे। वहीं मिल प्रबंधन सॉफ्टवेयर की खामियां गिनाकर किसानों को गुमराह कर रहा था।
टिकौला चीनी मिल की गन्ना समिति मवाना, रामराज व खतौली से जुड़े करीब 16 हजार किसानों के बैंक खाते जिला सहकारी बैंक में संचालित हैं। इन किसानों का करीब 4.30 करोड़ रुपये गन्ना भुगतान नहीं पहुंचा था। यह सभी किसान जिला सहकारी बैंक से जुड़े थे। किसानों का कहना था कि चीनी मिल व बैंक दोनों मिलकर किसानों के रुपये के ब्याज का लाभ उठा रहे हैं।
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बयान....
चीनी मिल द्वारा भेजा गया गन्ना भुगतान बृहस्पतिवार शाम 4:50 बजे किसानों के बैंक खातों में भेज दिया गया है। -हिमांशु कुमार मंगलम, यूनिट हेड, टिकोला शुगर मिल
किसानों के मोबाइल पर गन्ना भुगतान का मेसेज मिल गया है। किसानों के बैंक खातों में गन्ना भुगतान पहुंच गया है। -गुरदयाल, प्रबंधक, जिला सहकारी बैंक, बहसूमा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहसूमा। टिकौला चीनी मिल द्वारा भेजा गया बकाया गन्ना भुगतान बृहस्पतिवार शाम तीन समितियों से जुड़े करीब 16 हजार किसानों के बैंक खातों में पहुंच गया है। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में 12 दिन बाद भी किसानों काे नहीं मिला भुगतान की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। बृहस्पतिवार शाम को ही चीनी मिल ने किसानों के बैंक खातों में गन्ना भुगतान भेज दिया है। बैंक प्रबंधक ने इसकी पुष्टि की है।
सहकारी गन्ना समिति में हुए घोटाले के बाद प्रदेश सरकार ने इस बार समितियों की मध्यस्थता को समाप्त कर पारदर्शिता लाने के लिए किसानों का गन्ना भुगतान सीधा बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था लागू की है। लेकिन यह व्यवस्था बहसूमा क्षेत्र के किसानों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई थी। 14 नवंबर को टिकौला शुगर मिल द्वारा भेजा गया गन्ना भुगतान किसानों के बैंक खातों में नहीं पहुंचा। किसान लगातार बैंक के चक्कर काट रहे थे। मिल कर्मचारी किसानों को समितियों द्वारा जिला सहकारी बैंक का पुराना आईएफएससी कोड भेजने की बात कह कह रहे थे। वहीं मिल प्रबंधन सॉफ्टवेयर की खामियां गिनाकर किसानों को गुमराह कर रहा था।
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टिकौला चीनी मिल की गन्ना समिति मवाना, रामराज व खतौली से जुड़े करीब 16 हजार किसानों के बैंक खाते जिला सहकारी बैंक में संचालित हैं। इन किसानों का करीब 4.30 करोड़ रुपये गन्ना भुगतान नहीं पहुंचा था। यह सभी किसान जिला सहकारी बैंक से जुड़े थे। किसानों का कहना था कि चीनी मिल व बैंक दोनों मिलकर किसानों के रुपये के ब्याज का लाभ उठा रहे हैं।
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चीनी मिल द्वारा भेजा गया गन्ना भुगतान बृहस्पतिवार शाम 4:50 बजे किसानों के बैंक खातों में भेज दिया गया है। -हिमांशु कुमार मंगलम, यूनिट हेड, टिकोला शुगर मिल
किसानों के मोबाइल पर गन्ना भुगतान का मेसेज मिल गया है। किसानों के बैंक खातों में गन्ना भुगतान पहुंच गया है। -गुरदयाल, प्रबंधक, जिला सहकारी बैंक, बहसूमा