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इमरजेंसी के फर्श और स्ट्रेचर पर तड़प रहे मरीज

Sun, 02 May 2021 02:07 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 02 May 2021 02:07 AM IST
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Patients suffering on emergency floor and stretcher
इमरजेंसी के फर्श और स्ट्रेचर पर तड़प रहे मरीज
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मेरठ। कोरोना की मार झेल रहे मरीजों और उनके तीमारदारों को एक-एक बेड के लिए जंग लड़नी पड़ रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड पाने के लिए मारामारी है। इमरजेंसी के फर्श और स्ट्रेचर पर मरीज तड़प रहे हैं। शनिवार को भी हालात में कोई सुधार नजर नहीं हुआ।
मेडिकल कॉलेज में कोई इमरजेंसी के फ़र्श पर तो कोई स्ट्रेचर पर है। कोई मरीज कार में ही उपचार ले रहा है। मरीज के तीमारदार बाहर ऑक्सीजन के इंतजाम में भटक रहे हैं। तीमारदारों को अपनों का हाल तक पता नहीं चल रहा है। कोविड वार्ड में जो खाना भिजवा रहे हैं, वह खाना भी मरीज तक नहीं पहुंच रहा है। एक बुजुर्ग मरीज तो इमरजेंसी की पार्किंग में खाना खाते मिले। कोई चाहकर भी मदद नहीं कर पा रहा है।
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ऐसा रहा मरीजों और तीमारदारों का हाल
केस एक : शताब्दीनगर के महेश चंद को कहीं बेड नहीं मिला तो मेडिकल इमरजेंसी में एक कोना पकड़ लिया। घंटों इंतजार किया। कोई सुनवाई नहीं हुई। रात ढाई बजे मेडिकल से निकले और एक निजी अस्पताल में बेड की व्यवस्था हुई।
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केस दो : अमित कुमार मेडिकल के कोविड वार्ड में भर्ती हैं। शनिवार को उनकी ऑक्सीजन कम हो रही थी। तीमारदार हेल्पलाइन पर फोन करते रहे, मगर कोई सुनवाई नहीं हो पाई।
फेसबुक लाइव कर बताया अव्यवस्था का हाल
एक युवक ने मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी वार्ड का फेसबुक लाइव करके वहां फैली अव्यवस्था के बारे में बताया। किसी की सांस फूल रही है मगर ऑक्सीजन नहीं है, तो किसी के तीमारदार खुद ही ऑक्सीजन देने की कोशिश कर रहे हैं।
मरीज को बेड चाहिए, ऑक्सीजन कम है
दिल्ली निवासी राहुल के परिजनों ने मेरठ का कोई अस्पताल नहीं छोड़ा, मगर बेड नहीं मिला। ऐसी संख्या बहुत से मरीजों और तीमारदारों की है। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी जिंदगी की मुश्किल और बढ़ा रही है।

जूनियर डॉक्टर बोले, जितने बेड, उतने ही मरीज करेंगे भर्ती
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में बेड कम हैं और मरीज ज्यादा हैं। जूनियर डॉक्टरों ने प्राचार्य से साफ कह दिया है कि बे उतने ही मरीज भर्ती करेंगे, जितने बेड हैं। उससे ज्यादा मरीजों को वे ठीक से नहीं देख पाएंगे। शनिवार दोपहर प्राचार्य इमरजेंसी पहुंचे और व्यवस्था बनाने की कोशिश की। प्राचार्य का कहना है कि जूनियर डॉक्टरों से बात की जा रही है।
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