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Meerut News: शिव कथा में पार्वती का जन्मोत्सव मनाया
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से बुद्धा गार्डन में चल रही शिव कथा के चौथे दिन पार्वती का जन्मोत्सव मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और पार्वती के जयकारे लगाए। कथावाचक डॉ. सर्वेश्वर ने बताया कि महाराज हिमवान और महारानी मैना ने आदिशक्ति जगदंबिका की 27 वर्षों तक कठोर तपस्या कर उन्हें पुत्री रूप में प्राप्त किया। मां भवानी ने पार्वती के रूप में जन्म लिया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कन्या के जन्म को अत्यंत शुभ माना गया है। इसीलिए पुत्री प्राप्ति के लिए भी वर्षों तक तपस्या की जाती थी। वर्तमान में नारी के प्रति दृष्टिकोण अत्यंत चिंताजनक हो गया है। महिला शोषण, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न जैसी घटनाएं समाज की गिरती मानसिकता को दर्शाती हैं। नारी को भी आंतरिक शक्ति को पहचानना होगा।
डॉ. सर्वेश्वर ने कहा कि प्रदर्शन नहीं, आत्मदर्शन से ही सच्चा नारी सशक्तिकरण संभव है। नारी का वास्तविक सौंदर्य उसकी आत्मा में निहित है। ब्रह्मज्ञान से उत्पन्न दिव्य तेज उसके व्यक्तित्व को महान बना सकता है। संस्थान के प्रतिनिधि स्वामी नरेशानंद ने कहा कि भगवान का पूजन और ध्यान दोनों अलग पद्धतियां हैं। पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कथा का समापन दिव्य आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
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मेरठ। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से बुद्धा गार्डन में चल रही शिव कथा के चौथे दिन पार्वती का जन्मोत्सव मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और पार्वती के जयकारे लगाए। कथावाचक डॉ. सर्वेश्वर ने बताया कि महाराज हिमवान और महारानी मैना ने आदिशक्ति जगदंबिका की 27 वर्षों तक कठोर तपस्या कर उन्हें पुत्री रूप में प्राप्त किया। मां भवानी ने पार्वती के रूप में जन्म लिया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कन्या के जन्म को अत्यंत शुभ माना गया है। इसीलिए पुत्री प्राप्ति के लिए भी वर्षों तक तपस्या की जाती थी। वर्तमान में नारी के प्रति दृष्टिकोण अत्यंत चिंताजनक हो गया है। महिला शोषण, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न जैसी घटनाएं समाज की गिरती मानसिकता को दर्शाती हैं। नारी को भी आंतरिक शक्ति को पहचानना होगा।
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डॉ. सर्वेश्वर ने कहा कि प्रदर्शन नहीं, आत्मदर्शन से ही सच्चा नारी सशक्तिकरण संभव है। नारी का वास्तविक सौंदर्य उसकी आत्मा में निहित है। ब्रह्मज्ञान से उत्पन्न दिव्य तेज उसके व्यक्तित्व को महान बना सकता है। संस्थान के प्रतिनिधि स्वामी नरेशानंद ने कहा कि भगवान का पूजन और ध्यान दोनों अलग पद्धतियां हैं। पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कथा का समापन दिव्य आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
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