कोरोना काल में अभिभावक परेशान, फीस माफ कराने की मांग को लेकर पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर से मिले
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कोरोना काल में बच्चों की फीस को लेकर अभिभावक काफी परेशनान हैं। वहीं मेरठ में स्कूलों की ओर से बार-बार दबाव बनाने के चलते शुक्रवार को पब्लिक स्कूल अभिभावक संघ पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर से मिला और अपना मांग पत्र देकर छात्रों अभिभावकों को शुल्क में राहत दिलाने लिए समर्थन मांगा। इस दौरान पूर्व मंत्री ने लोगों की समस्या को सही माना। उन्होंने अभिभावकों को मुख्यमंत्री द्वारा मदद दिलाने का आश्वासन दिया।
अभिभावकों ने शुरू किया जनजागरण अभियान
कोरोना काल के चलते अभिभावक सरकार से फीस माफ किए जाने की मांग कर रहे हैं। इस बीच उन्होंने जनजागरण अभियान भी शुरू कर दिया है। जिसमें सत्ता पक्ष के साथ साथ विपक्षी दलों के नेताओं के पास जाकर अभियान के लिए समर्थन दिए जाने की मांग की जा रही है।
अभिभावकों का दर्द : 'बच्चों को मोबाइल दिलाएं या फीस भरें'
बच्चों को मोबाइल दिलाएं या फीस भरें... आप ही बताएं हम क्या करें। यह दर्द माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ा रहे अधिकांश अभिभावकों का है। दरअसल कोरोना के चलते विद्यालय बंद हैं, इसीलिए ऑनलाइन क्लास चलाई जा रही हैं जिसके लिए स्मार्ट फोन जरूरी है।
वहीं शासन के निर्देश हैं कि अभिभावक स्कूलों की फीस जमा कराएं। ऐसे में वित्तविहीन महासभा ने इस सम्बंध में जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखा है कि विद्यालय खोले जाएं ताकि फीस आ सके। वहीं चावली देवी आर्य कन्या इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. नीलम और केके इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. वीर बहादुर सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों ने हाईस्कूल और इंटर का परीक्षा शुल्क तक जमा नहीं कराया है। फीस को लेकर समस्या है। अभिभावकों से संपर्क करने पर कई बार टका सा जवाब मिलता है कि बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एंड्राइड फोन दें या फीस जमा करें।
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404 विद्यायल हैं मेरठ में
मेरठ में 404 विद्यालय हैं इनमें 228 वित्तविहीन विद्यालय हैं। वित्तविहीन स्कूलों में कक्षा छह से लेकर 12वीं तक की फीस 400 से लेकर 800 रुपये तक है। हाईस्कूल का परीक्षा शुल्क 501 रुपये और इंटरमीडिएट का परीक्षा शुल्क 601 रुपये है।
ऑनलाइन पढ़ाई पर भी संकट
जिले के 404 विद्यालयों के करीब 80 हजार छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जो स्मार्ट फोन का इस्तेमाल नहीं करते हैं। ऐसे में उन्हें ऑनलाइन पढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती है। दूसरी तरफ इससे निबटने की कोई तैयारी भी नहीं है। 15 जुलाई तक ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करनी थी, लेकिन विद्यार्थी ऑनलाइन कक्षाओं से नहीं जुड़ पा रहे हैं। इनमें देहात के ही नहीं शहर के स्कूल भी शामिल हैं।
फीस जमा करनी जरूरी
शासन के निर्देश है कि जो बच्चे फीस जमा नहीं कर पाएंगे उनका नाम नहीं काटा जाएगा, लेकिन हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में परीक्षा शुल्क न जमा करने वाले परीक्षा में नहीं बैठ सकेंगे। - गिरजेश चौधरी, जिला विद्यालय निरीक्षक
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