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भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर उतरे 10 दावेदार
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 05 Jan 2016 02:35 AM IST
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भाजपा जिला अध्यक्ष और प्रदेश प्रतिनिधि के लिए बंपर नामांकन भरे गये। उम्मीद से ज्यादा नामांकन आने के बाद प्रदेश मुख्यालय भले ही कुछ सोच रहा हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस स्थिति को ठीक नहीं माना जा रहा है। कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि इससे संगठन में मजबूती के बजाय रार पैदा होगी।
सोमवार को सूरजकुंड स्थित भाजपा जिला कार्यालय पर नामांकन भरे गये। जितेंद्र वर्मा, हरवीर पाल, नरेश गुर्जर, विमल शर्मा, संजय त्यागी, शिवकुमार राणा, नरेश त्यागी, अनुज राठी, कपिल शर्मा, अजीत चौधरी ने जिलाध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किये। वहीं प्रदेश प्रतिनिधि के लिए 13 नामांकन लिये गये, लेकिन 11 ही चुनाव अधिकारी को दिए गए।
चुनाव अधिकारी सांसद शरद चंद त्रिपाठी और सह चुनाव अधिकारी सतेंद्र सिंह सिसौदिया ने बताया कि प्रदेश प्रतिनिधि के लिए ब्रजगोपाल गुप्ता, नरेंद्र सिंह, सुधा चौहान, नरेंद्र त्यागी, बचन सिंह, राकेश त्यागी, राजेश्वर छतरी, सुशील खटिक, बिजेंद्र लौहरे, टीकम गिर और प्रबोध त्यागी के नामांकन पत्र दाखिल हुए। अब इन सभी दावेदारों की सूची प्रदेश मुख्यालय को भेजी जायेगी, जहां से जिलाध्यक्ष और प्रदेश प्रतिनिधि के लिए नाम घोषित किया जायेगा।
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नामांकन के दौरान चर्चा रही जिलाध्यक्ष पद इस बार पिछड़ा वर्ग को जा सकता है। ऐसे में पिछड़ा वर्ग से जितेंद्र वर्मा, नरेश गुर्जर, अनुज राठी, अजीत चौधरी और हरवीर पाल के बीच मुकाबला होगा। यदि पद सामान्य रहता है, तो पूर्व जिलाध्यक्ष विमल शर्मा, शिवकुमार राणा, कपिल शर्मा, नरेश त्यागी और संजय त्यागी के बीच मुकाबला होगा। इनमें विमल शर्मा को विधायक संगीत सोम और संजय त्यागी को प्रदेश अध्यक्ष का करीबी माना जा रहा है। नरेश गुर्जर को भी पार्टी और संघ में कई धड़ों का समर्थन प्राप्त है।
चुनावी तरीके से बढ़ी रार
प्रदेश मुख्यालय ने चुनाव का जो तरीका अपनाया है, वह किसी के गले नहीं उतर रहा है। एक तरफ जहां सभी से नामांकन कराये हैं, लेकिन मतदान का कोई मौका नहीं दिया है। इतना जरूर रहा कि एक नामांकन के साथ एक मंडल अध्यक्ष और एक मंडल प्रतिनिधि को प्रस्तावक व अनुमोदक के रूप में जरूर समर्थन में शामिल होने की बाध्यता दी गयी। जिसने रार को और ज्यादा बढ़ा दिया।
रात में चला दावतों का दौर
जिलाध्यक्ष पद के चुनाव में इस बार नई परंपरा भाजपा में नजर आई। कई दावेदारों ने रविवार को मंडल अध्यक्षों और प्रतिनिधियों को अपने साथ ले लिया था। रविवार रात शहर के होटलों में कमरे बुक कराकर उन्हें रखा गया और दावतों का दौर चला। इसके बाद मंगलवार को अपने साथ उन्हें लेकर चुनाव कार्यालय पर पहुंचे। लेकिन वहां पर मात्र दो ही प्रतिनिधियों की आवश्यकता होने की जानकारी पर सभी के मंसूबे धरे रह गये। चुनाव अधिकारी ने बताया कि अंतिम निर्णय प्रदेश मुख्यालय से होगा।
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सोमवार को सूरजकुंड स्थित भाजपा जिला कार्यालय पर नामांकन भरे गये। जितेंद्र वर्मा, हरवीर पाल, नरेश गुर्जर, विमल शर्मा, संजय त्यागी, शिवकुमार राणा, नरेश त्यागी, अनुज राठी, कपिल शर्मा, अजीत चौधरी ने जिलाध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किये। वहीं प्रदेश प्रतिनिधि के लिए 13 नामांकन लिये गये, लेकिन 11 ही चुनाव अधिकारी को दिए गए।
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चुनाव अधिकारी सांसद शरद चंद त्रिपाठी और सह चुनाव अधिकारी सतेंद्र सिंह सिसौदिया ने बताया कि प्रदेश प्रतिनिधि के लिए ब्रजगोपाल गुप्ता, नरेंद्र सिंह, सुधा चौहान, नरेंद्र त्यागी, बचन सिंह, राकेश त्यागी, राजेश्वर छतरी, सुशील खटिक, बिजेंद्र लौहरे, टीकम गिर और प्रबोध त्यागी के नामांकन पत्र दाखिल हुए। अब इन सभी दावेदारों की सूची प्रदेश मुख्यालय को भेजी जायेगी, जहां से जिलाध्यक्ष और प्रदेश प्रतिनिधि के लिए नाम घोषित किया जायेगा।
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नामांकन के दौरान चर्चा रही जिलाध्यक्ष पद इस बार पिछड़ा वर्ग को जा सकता है। ऐसे में पिछड़ा वर्ग से जितेंद्र वर्मा, नरेश गुर्जर, अनुज राठी, अजीत चौधरी और हरवीर पाल के बीच मुकाबला होगा। यदि पद सामान्य रहता है, तो पूर्व जिलाध्यक्ष विमल शर्मा, शिवकुमार राणा, कपिल शर्मा, नरेश त्यागी और संजय त्यागी के बीच मुकाबला होगा। इनमें विमल शर्मा को विधायक संगीत सोम और संजय त्यागी को प्रदेश अध्यक्ष का करीबी माना जा रहा है। नरेश गुर्जर को भी पार्टी और संघ में कई धड़ों का समर्थन प्राप्त है।
चुनावी तरीके से बढ़ी रार
प्रदेश मुख्यालय ने चुनाव का जो तरीका अपनाया है, वह किसी के गले नहीं उतर रहा है। एक तरफ जहां सभी से नामांकन कराये हैं, लेकिन मतदान का कोई मौका नहीं दिया है। इतना जरूर रहा कि एक नामांकन के साथ एक मंडल अध्यक्ष और एक मंडल प्रतिनिधि को प्रस्तावक व अनुमोदक के रूप में जरूर समर्थन में शामिल होने की बाध्यता दी गयी। जिसने रार को और ज्यादा बढ़ा दिया।
रात में चला दावतों का दौर
जिलाध्यक्ष पद के चुनाव में इस बार नई परंपरा भाजपा में नजर आई। कई दावेदारों ने रविवार को मंडल अध्यक्षों और प्रतिनिधियों को अपने साथ ले लिया था। रविवार रात शहर के होटलों में कमरे बुक कराकर उन्हें रखा गया और दावतों का दौर चला। इसके बाद मंगलवार को अपने साथ उन्हें लेकर चुनाव कार्यालय पर पहुंचे। लेकिन वहां पर मात्र दो ही प्रतिनिधियों की आवश्यकता होने की जानकारी पर सभी के मंसूबे धरे रह गये। चुनाव अधिकारी ने बताया कि अंतिम निर्णय प्रदेश मुख्यालय से होगा।