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चुनाव के समीकरण को पलट देता है अति पिछड़ा वर्ग का वोटर, जानिए इनका प्रतिशत
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Wed, 25 Jan 2017 11:33 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
चुनाव में प्रत्येक विधानसभा का अलग जातीय गणित है। प्रत्याशी की नजर बहुसंख्यक जाति के वोटरों पर रहती है। जबकि एक वर्ग ऐसा भी है, जो जब एकजुट होकर मतदान करता है तो चुनाव के समीकरण को पलट कर रख देता है। यह वर्ग है अति पिछड़ा वर्ग, जो पश्चिम की लगभग सभी विधानसभाओं में समीकरण बनाने और बिगाड़ने की क्षमता रखता है।
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ये हैं अति पिछड़ा वर्ग के वोटर
अति पिछड़ा वर्ग में सैनी, प्रजापति, पाल, कश्यप, नाई, हिंदू बढ़ई आदि बिरादरी के लोग पश्चिम में अच्छी खासी संख्या में हैं। किसी भी विधानसभा में इनकी संयुक्त वोट पर अगर ध्यान दें तो यह 15 से 30 प्रतिशत तक बैठती है। यह वह वोट बैंक है, जो संयुक्त रूप से वोट करने पर पासा पलट सकता है।
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इन सीटों पर सबसे ज्यादा प्रभावी
पश्चिम की बात करें तो मेरठ की सरधना सीट पर अति पिछड़ा वर्ग का वोटर करीब 25 प्रतिशत है। जबकि किठौर में 20, हस्तिनापुर में 15, कैंट में 15, सिवालखास में 10, मेरठ शहर में 12 और दक्षिण सीट पर 18 प्रतिशत अति पिछड़ा वर्ग का वोटर है। वहीं मुजफ्फरनगर की खतौली सीट पर 25, चरथावल सीट पर 30, बुढ़ाना सीट पर 30, पुरकाजी सीट पर 18, मीरापुर सीट पर 25 प्रतिशत अति पिछड़ा वर्ग का मतदाता है। बागपत जनपद की बागपत सीट पर 15, छपरौली में 18 और बड़ौत सीट पर 20 प्रतिशत अति पिछड़ा वर्ग का वोटर है। शामली जनपद की शामली सीट पर 25, कैराना सीट 19, थाना भवन सीट पर 28 प्रतिशत अति पिछड़ा वर्ग के मतदाता हैं। स्थानीय स्तर पर अपनी बिरादरी का प्रत्याशी होने या किसी प्रत्याशी विशेष का प्रभाव होने पर अति पिछड़ा वर्ग वोट करता है। सभी दलों ने अपने-अपने अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को इन मतदाताओं को साधने की जिम्मेदारी सौंप रखी है।
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