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छह करोड़ की धोखाधड़ी में एक गिरफ्तार, उत्तराखंड और बिजनौर में फर्जी कॉलेज और छात्र दिखाकर हड़पी थी छात्रवृत्ति

Thu, 10 Sep 2020 10:43 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 10 Sep 2020 10:43 PM IST
सार

  • मामले में आरोपी के खिलाफ 2014 में बिजनौर कोतवाली में दर्ज हुआ था मुकदमा  
  • 8 अप्रैल 2015 को शासन से ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर को मिली थी जांच 

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One arrested for fraud of six crores, fake college in Uttarakhand and Bijnor and scholarship showing students
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तराखंड और बिजनौर में फर्जी कॉलेज और फर्जी छात्र दर्शाकर छह करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति हड़पने के मामले में यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध एवं अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को बिजनौर से आरोपी भीम सिंह पुत्र सीताराम निवासी सनपता, बिजनौर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, भीम सिंह इस घोटाले के मुख्य अभियुक्त ततारपुर निवासी अंकित कुमार राजपूत का सहयोगी है। अंकित को 20 फरवरी को जेल भेजा जा चुका है। 

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ईओडब्ल्यू के एएसपी रामसुरेश यादव के अनुसार, सीओ मदन सिंह मामले की जांच कर रहे हैं। घोटाले में बिजनौर के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी पजनेश कुमार, प्रधान लिपिक रामेश्वर दयाल, तत्कालीन सुपरवाइजर योगेश कुमार, सुपरवाइजर मलिक महमूद खां की भी भूमिका सामने आई है।
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उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए शासन से अनुमति मांगी जा रही है। इसके अलावा अंकित और भीम सिंह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई करने के लिए बिजनौर एसपी को लिखा गया है।

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पांच अक्तूबर 2014 को बिजनौर की शहर कोतवाली में तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी अजय कुमार गोस्वामी ने छह करोड़ रुपये के गबन का मुकदमा दर्ज कराया था। पहले जांच बिजनौर पुलिस ने की। 8 अप्रैल 2015 को शासन ने जांच ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर को सौंप दी। जांच में सामने आया कि एक गिरोह ने बिजनौर के गांव-गांव जाकर 1015 छात्रों से उनके शैक्षिक दस्तावेज एकत्र किए।

इन छात्रों को देहरादून, ऊधमसिंह नगर और काशीपुर के सात कॉलेजों में अध्ययनरत दर्शाकर बैंकों में खाते खुलवा दिए। देहरादून के मोहल्ला करनपुर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कम्प्यूटर साइंस का बोर्ड लगाकर 37 छात्रों के प्रवेश दिखा दिए।

इसके बाद शासन से प्राप्त छात्रवृत्ति के छह करोड़ रुपये हड़प लिए। यह छात्रवृति सत्र 2010 -11 की थी। तब यूपी सरकार ने स्कीम लांच की थी कि यहां के जो एससी-एसटी छात्र दूसरे राज्यों में पढ़ रहे हैं, उन्हें भी छात्रवृत्ति दी जाएगी।  

फर्जी खुलवाए थे खाते
एएसपी ने बताया कि उत्तराखंड में फर्जी तरीके से कूट रचित कागज तैयार कराकर बैंकों में खाते खुलवाए गए थे। जांच सामने आया कि यह घोटाला 5 करोड़, 92 लाख, 62 हजार 700 रुपये का है। आरोपियों ने जिला समाज कल्याण अधिकारी और अन्य प्रधान लिपिक व कर्मचारियों की मिलीभगत से छात्रवृत्ति हड़पी।

बिजनौर की कोतवाली पुलिस ने अंकित और भीम सिंह को पिस्टल, कूट रचित कागज और अन्य कागज बरामद कर गिरफ्तार किया था। बाद में तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी ने भी 15 अक्टूबर 2014 को एक केस दर्ज कराया था। 

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