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Meerut News: एक कंधे पर भोले की कांवड़, दूसरे में मां की ममता
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- दो साल की बेटी के लिए मां की अनोखी आस्था
रूहाब आलम
सरूरपुर (मेरठ)। एक कंधे पर भोलेनाथ की कांवड़ और दिल में बेटी के लिए मां की ममता। पैरों में थकान, चेहरे पर तपती धूप का असर लेकिन जुबां पर लगातार बोल बम का जयघोष। आस्था की ऐसी ही तस्वीर इन दिनों रजबहे की पटरी पर कांवड़ यात्रा के दौरान देखने को मिल रही है। बागपत निवासी पिंकी अपनी दो साल की बेटी अक्षु को साथ लेकर लगातार दूसरे साल हरिद्वार से कांवड़ लेकर पुरा महादेव शिवालय की ओर बढ़ रही हैं।
पिंकी ने बताया कि उन्होंने भोलेनाथ से बेटी की मन्नत मांगी थी। भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की तो उन्होंने बेटी के साथ कांवड़ लाने का संकल्प लिया। मन्नत पूरी होने के बाद पिंकी लगातार दूसरे वर्ष कांवड़ यात्रा पर निकली हैं। इस बार भी उनकी कांवड़ यात्रा में बेटी अक्षु उनके साथ है। यात्रा के दौरान कभी बेटी को गोद में लेकर चलती हैं तो कभी उसे अपने पास बैठाकर कुछ देर आराम करती हैं। लंबा रास्ता, गर्मी और थकान भी उनके कदमों को रोक नहीं पा रही। उनका कहना है कि यह यात्रा उनके लिए केवल कांवड़ यात्रा नहीं, बल्कि भोलेनाथ के प्रति आस्था और अपनी बेटी के लिए कृतज्ञता का प्रतीक है।
रजबहे की पटरी से गुजरते समय पिंकी और उनकी बेटी को देखकर आसपास मौजूद लोग भी भावुक हो उठते हैं। कांवड़ियों के बीच मां-बेटी की यह जोड़ी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यात्रा कितनी भी कठिन क्यों न हो, जब भोलेनाथ का नाम जुबां पर हो और बेटी साथ हो तो थकान का अहसास कम हो जाता है। अब उन्हें बस उस पल का इंतजार है, जब शिवालय पहुंचकर वह अपनी कांवड़ भोलेनाथ को अर्पित करेंगी और बेटी के साथ पूजा-अर्चना कर अपनी मन्नत के प्रति आभार जताएंगी।
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रूहाब आलम
सरूरपुर (मेरठ)। एक कंधे पर भोलेनाथ की कांवड़ और दिल में बेटी के लिए मां की ममता। पैरों में थकान, चेहरे पर तपती धूप का असर लेकिन जुबां पर लगातार बोल बम का जयघोष। आस्था की ऐसी ही तस्वीर इन दिनों रजबहे की पटरी पर कांवड़ यात्रा के दौरान देखने को मिल रही है। बागपत निवासी पिंकी अपनी दो साल की बेटी अक्षु को साथ लेकर लगातार दूसरे साल हरिद्वार से कांवड़ लेकर पुरा महादेव शिवालय की ओर बढ़ रही हैं।
पिंकी ने बताया कि उन्होंने भोलेनाथ से बेटी की मन्नत मांगी थी। भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की तो उन्होंने बेटी के साथ कांवड़ लाने का संकल्प लिया। मन्नत पूरी होने के बाद पिंकी लगातार दूसरे वर्ष कांवड़ यात्रा पर निकली हैं। इस बार भी उनकी कांवड़ यात्रा में बेटी अक्षु उनके साथ है। यात्रा के दौरान कभी बेटी को गोद में लेकर चलती हैं तो कभी उसे अपने पास बैठाकर कुछ देर आराम करती हैं। लंबा रास्ता, गर्मी और थकान भी उनके कदमों को रोक नहीं पा रही। उनका कहना है कि यह यात्रा उनके लिए केवल कांवड़ यात्रा नहीं, बल्कि भोलेनाथ के प्रति आस्था और अपनी बेटी के लिए कृतज्ञता का प्रतीक है।
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रजबहे की पटरी से गुजरते समय पिंकी और उनकी बेटी को देखकर आसपास मौजूद लोग भी भावुक हो उठते हैं। कांवड़ियों के बीच मां-बेटी की यह जोड़ी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यात्रा कितनी भी कठिन क्यों न हो, जब भोलेनाथ का नाम जुबां पर हो और बेटी साथ हो तो थकान का अहसास कम हो जाता है। अब उन्हें बस उस पल का इंतजार है, जब शिवालय पहुंचकर वह अपनी कांवड़ भोलेनाथ को अर्पित करेंगी और बेटी के साथ पूजा-अर्चना कर अपनी मन्नत के प्रति आभार जताएंगी।
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