ये रिटायर्ड कर्नल की कोठी है या अंतरराष्ट्रीय तस्करी का अड्डा, मिला जखीरा
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मेरठ में रिटायर्ड कर्नल देवेन्द्र कुमार के यहां मिले हथियार और कारतूसों के जखीरे का सीधा इंटरनेशनल कनेक्शन सामने आ रहा है। इस कोठी में हुई कई पार्टियों में भी विदेशी लोग शामिल रहे थे। खुफिया तंत्र के रडार पर अब कई ऐसे नामी लोग हैं। नेता से लेकर अभिनेता तक पर खुफिया विभाग की निगाह है।
सिविल लाइन की यह कोठी हालांकि कई बार पार्टियों के आयोजन को लेकर चर्चा में आई पर अब इस नए खुलासे के बाद सभी की निगाहें उन पार्टियों में शामिल हुए लोगों पर भी फोकस करने लगी हैं। दरअसल कर्नल की कोठी में मिले असलाह विदेशी थे। उधर आईजीआई एयरपोर्ट पर पकड़े गए विदेशी तस्करों से भी 25 विदेशी हथियार मिले थे। उनका सीधा संबंध कर्नल की कोठी से था। उन्हीं की निशानदेही पर मेरठ की इस कोठी से लेकर दिल्ली तक में छापेमारी हुई। डीआरआई ने जो लिंक निकाले हैं उसके मुताबिक इस पूरी टीम का इंटरनेशनल कनेक्शन सामने आ रहा है। इस्तांबुल से लेकर स्लोवेनिया तक इसके तार जुड़े हैं। स्लोवेनिया गणराज्य मध्य यूरोप में है जिसमें गत सालों में प्रवासियों के घुसने पर रोक लगा दी थी। आस्ट्रिया, क्रोएिशया जैसे देश भी प्रवासियों पर कई बार प्रतिबंध लगा चुके हैं। इसके बाद हथियारों के तस्करों ने नया नेटवर्क डेवलप किया और वाया इस्तांबुल इस पर काम शुरू किया।
इतने कारतूस की पूरी मेरठ पुलिस पर भारी पड़ते
भले ही मेरठ पुलिस इस मामले में ठंडी पड़ी हो पर खुफिया टीमों ने इस पर काम शुरू कर दिया है। आईबी की टीम इस पर अलग से काम में जुट गई है तो एसआईयू ने भी इस पर काम शुरू किया है। ऐसे कई शूटरों की कुंडली खंगाली जा रही है जो कर्नल के बेटे शूटर प्रशांत के साथ रहे। प्रशांत ने बिहार में नीलगायों को मारने का जो ऑपरेशन चलाया था उसमें हैदराबाद की टीम भी थी। हैदराबाद निवासी शफक अली खां इस टीम में प्रशांत के साथ थे। एजेंसियां वहां जाकर शफक से भी पूछताछ कर सकती हैं। इतनी संख्या में यहां कारतूस मिलना अहम सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि इंडियन राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के नियमानुसार जाने माने शूटर पचास हजार तक कारतूस रख सकते हैं पर इस मानक पर प्रशांत कितना खरा उतर रहा है इसकी जांच पर भी काम शुरू हो गया है।
रिटायर्ड कर्नल देवेंद्र कुमार के घर जिस तरह से विदेशी हथियारों के साथ साथ दो लाख कारतूस मिले हैं उससे तमाम अधिकारियों की सांसे थम गई। हथियारों और कारतूसों का इतना बड़ा जखीरा, जिसके आकलन करने में कई घंटे लग गये। पूरे जिले की पुलिस के पास इतने कारतूस नहीं है जितने अकेले रिटायर्ड कर्नल के यहां से मिले हैं।
सिफारिश की कॉल का सिलसिला
एक अधिकारी ने बताया कि थाने में रायफल और पिस्टल के करीब एक हजार से 1200 कारतूस तक का कोटा रहता है। थाने में जिस भी पुलिसकर्मी की ड्यूटी खत्म होती है उसके बाद कारतूस जमा करा लिए जाते हैं। जिले में महिला थाने को छोड़कर 30 थाने हैं। ऐसे में जिले के सभी थानों में 30 से 35 हजार कारतूस हैं। ऐसे में सवाल यह है इतने कारतूस या विदेशी हथियारों का जखीरा किसी संदिग्ध व्यक्ति के हाथ लग जाता तो पुलिस अफसरों के साथ खुफिया एजेंसी के सामने भी चुनौती होती। कार्टेज भरने की मशीन भी घर में टीम को मिली है। टीम को यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल हैं कारतूस कहां सप्लाई होते हैं। कई पिस्टल की बट पर हीरे जैसी धातू जड़ी हुई भी बताई गई है।
सूत्रों की मानें तो छोपमारी की करीब 16 घंटे कार्रवाई चली है। छापे का काम तो शाम के आठ बजे ही पूरा हो चुका था। लेकिन टीम के अधिकारियों पर लखनऊ और दिल्ली से सिफारिश में कॉल आनी शुरू हो गई। बताया गया है कि बाद में टीम के अधिकारियों ने मोबाईल फोन स्विच ऑफ कर लिए। मामला वन्य जीवों की तस्करी को लेकर छापेमारी के बाद ही लखनऊ और दिल्ली तक पहुंच चुका था।