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तेल का खेल: अवैध केरोसिन की मॉनिटरिंग शुरू, नोटिस देने की तैयारी, ऑयल डिपो में आज खोदाई करेगी टीम 

Tue, 10 Sep 2019 12:42 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 10 Sep 2019 12:42 PM IST
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Oil game: big question raised on raid of administration at Oil depot in Meerut
पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में रतिराम खूबचंद ऑयल डिपो में भूमिगत टैंकों की खोदाई आईओसी की टीम आज करेगी। पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में टैंकों को जांच की जाएगी। एडीएम सिटी ने शनिवार को कुंडा स्थित ऑयल डिपो पर छापा मारकर आवंटित स्टॉक से करीब 71 हजार लीटर अधिक केरोसिन पकड़ा था। 
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पूरे मामले की तह तक जाने के लिए डिपो परिसर में मौजूद भूमिगत टैंकों की आईओसी अधिकारियों की मौजूदगी में जांच करने का आदेश डीएम अनिल ढींगरा ने दिया था। एडीएम सिटी अजय तिवारी के अनुसार सोमवार को आईओसी की तकनीकी टीम खोदाई करने के लिए नहीं आ पाई।  यह टीम मंगलवार दोपहर को मेरठ पहुंची है और खोदाई का काम करते हुए जमीन में दबे टैंकों और उसमें मौजूद तेल आदि की जांच करेगी। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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बढ़ सकती हैं धाराएं 
यदि जमीन में दबे टैंकों में नियमों के विपरीत कोई छेड़छाड़ पाई जाती है तो परतापुर थाने में दर्ज मुकदमे में धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं। प्रशासनिक सूत्राें के अनुसार अभी इस मामले में ऑयल डिपो के मालिक और मैनेजर पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। लेकिन यदि छेड़छाड़ के साक्ष्य मिलते हैं तो मुकदमे में 409 जैसी धाराएं भी बढ़ाई जा सकती हैं। 
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खोदाई को लेकर फंसा है पेच
जिला प्रशासन ने छापा मारकर सील करने की कार्रवाई तो कर दी। लेकिन इससे आगे की कार्रवाई ऑयल कंपनी को करनी है। क्योंकि जमीन में दबे टैंक आईओसी की संपत्ति है। इसे दबाने और बाहर निकालने में तकनीक का प्रयोग होता है। जिस कारण आईओसी कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञ ही इसकी खोदाई कर बाहर निकालेंगे। 

वक्फ बोर्ड की जमीन पर पेट्रोल पंप
सेव इंडिया जन फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। महानगर संयोजक नितिन बालियान और पंख हौसलों की उड़ान संस्था की अध्यक्ष भावना शर्मा ने कहा कि साकेत चौराहा स्थित रतिराम खूबचंद के नाम से पेट्रोल पंप है। वह जमीन वक्फ बोर्ड की है। वर्ष 1998 में जमीन की शिकायत हुई। लेकिन एक राजनैतिक नेता के दबाव में उस जांच को रोक दिया गया। पंप की इस जमीन की भी जांच और कार्रवाई की मांग की गई। पत्र भेजने वालों में रविंद्र मलिक, जयराज सिंह, यशोदा यादव आदि शामिल रहे। 

गिरफ्तारी पर स्थगन को लेकर रही चर्चा
ऑयल डिपो में अवैध केरोसिन बरामद होने में दर्ज मुकदमे के बाद गिरफ्तारी को लेकर सोमवार दिन भर चर्चा रही। सूत्रों के अनुसार एक तरफ जहां नौकरशाही में मामले को रफादफा कराने के लिए दबाव बनाने का जोर चलता रहा, तो दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे को लेकर भी कवायद रही। लेकिन स्टे मिला या नहीं, इसकी जानकारी कोई नहीं दे पाया।

रतिराम खूबचंद ऑयल डिपो के मालिक संजय गुप्ता और प्रबंधक विक्की के खिलाफ परतापुर थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। इस मामले पर पूरे शहर की नजरें टिकी हैं। 
वहीं, लखनऊ में भी इस मामले को लेकर भागदौड़ सोमवार को चलती रही। चर्चा रही कि आला अधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक इस मामले को रफादफा करने के लिए संपर्क होता रहा। चूंकि मामला सीएम के संज्ञान में आ चुका है, तो ऐसे में कोई भी ठोस आश्वासन किसी की भी तरफ से न मिलने की बात कही जा रही है। 

रतिराम खूबचंद ऑयल डिपो में अवैध केरोसिन की पुलिस ने मानीटरिंग शुरू कर दी। सोमवार को पुलिस और एफएसओ ने डिपो पर जाकर जांच की। फर्म मालिक व मैनेजर की घेराबंदी के लिये कलक्ट्रेट में पुलिस-प्रशासन अधिकारियों की मीटिंग हुई है। आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर कार्रवाई करने की तैयारी है। एसपी सिटी डॉ. एएन सिंह का कहना है कि डिपो की फोटोग्राफी कराई गई। वहां का नक्शा बनाकर इसकी मानीटरिंग की गई। सभी तथ्यों पर जांच कराने के लिए विवेचक सरोज सिंह लगे हैं। 

कहां से आया तेल, जुटाए जा रहे साक्ष्य 
इंडियन ऑयल कारपोरेशन से सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली के तहत सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं के माध्यम से आवंटित होने वाले केरोसिन के कई स्थानीय थोक विक्रेता हैं। जिनमें एक ऑयल डिपो रतिराम खूबचंद फर्म के नाम से भी है।

इस फर्म को 48 हजार लीटर केरोसिन का कोटा दिया गया है, जिसका वितरण वह सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं को उनके कोटे के अनुसार करते हैं। जिस समय जांच हुई, तब इस कोटे का पूरा वितरण अभिलेखों में दर्शाया हुआ था। लेकिन जांच में इसके अतिरिक्त मौके से टैंकों में 70 हजार लीटर से ज्यादा केरोसिन बरामद हुआ। पुलिस अब जिला आपूर्ति विभाग के  अधिकारियों से भी इस अवैध स्टॉक की बाबत पूछताछ कर रही है। 

फर्म मालिक को भेजेंगे नोटिस 
इंस्पेक्टर परतापुर ने बताया कि संबंधित विभाग से सारी जानकारी ली जा रही है। उसके बाद फर्म मालिक संजय कुमार और मैनेजर विक्की कुमार को नोटिस भेजा जाएगा। दोनों के बयान भी दर्ज कराकर आगे की कार्रवाई होगी। 

परिसर एक ही, फर्मों की दूरी 100 किलोमीटर 
 तेल के काले खेल में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) की टीम भी पड़ताल कर  रही है। पेट्रो उत्पाद जीएसटी के दायरे से  बाहर  होने के कारण सीजीएसटी का फोकस फर्म के बारे में गलत तथ्य देने पर है। अब जीएसटी विभाग ने भी पारस केमिकल और बेस्ट ऑयल फर्म की जांच शुरू कर दी है। इसमें भी घपला सामने आया है। 

दरअसल, पारस केमिकल और बेस्ट ऑयल दोनों फर्म एक ही पते पर चल रही हैं, जबकि बिलिंग में इनकी दूरी करीब 100 किलोमीटर से भी ज्यादा दर्शाई गई है। केंद्रीय जीएसटी अधीक्षक संजय मीणा ने बताया कि प्रशासन द्वारा गठित एसआईटी ने उन्हें इस मामले की जांच करने के लिए पत्र लिखा था, जांच की जा रही है। इस मामले के आरोपी जेल में उनके बयान दर्ज कर इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, इस मामले में जीएसटी अधिवक्ता सुनील गुप्ता का कहना है कि यदि एक ही परिसर में दो फर्म पंजीकृत कराई जाती हैं, तो नियम के तहत दोनों फर्म के आने जाने के गेट अलग-अलग होंगे और परिसर का बंटवारा होगा। लेकिन यदि दो अलग-अलग पताें पर फर्म पंजीकृत हैं और वह एक ही पते पर चलती मिलती है, तो यह पूरी तरह अवैध है। ऐसे मामले में सही पते पर चल रही फर्म और दूसरी फर्म ने जो व्यापार किया है, उसे जोड़कर उसका 10 गुना तक दंड मूल पते वाली फर्म से वसूले जाने का प्रावधान है। 
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