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ओडीएफ घोषित करने के खेल का भंडाफोड़
Sat, 18 May 2019 04:41 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Sat, 18 May 2019 04:41 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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मेरठ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में बनवाए गए शौचालयों की गुणवत्ता और ओडीएफ घोषित करने के खेल का मंडलायुक्त की जांच टीम ने भंडाफोड़ किया है। मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम की ओर से कराई गई जांच में सामने आया कि शौचालय पूरे बने ही नहीं हैं। मामले में मंडलायुक्त ने नगरायुक्त मनोज चौहान के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति के साथ शासन को पत्र लिखा है। साथ ही ऑडिट कराने को भी कहा है।
केंद्र सरकार की योजना के तहत शहर और गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए शौचालय बनवाए गए थे। इसके तहत जिले के अफसरों ने जनपद को ओडीएफ घोषित किया था। तत्कालीन डीएम और अन्य अधिकारियों ने सीएम के यहां जाकर इसका प्रशस्ति पत्र भी ले लिया।
पहले चरण की जांच में खुला खेल
मेरठ नगर निगम को ओडीएफ के लिए महानगर में 20404 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य दिया गया था। निगम ने 15845 शौचालय बनाने के साथ महानगर को ओडीएफ घोषित कर मंडलायुक्त को रिपोर्ट दी थी। नगर निगम के इस दावे की सत्यता जांचने के लिए मंडलायुक्त ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी। अपर आयुक्त रजनीश राय की अध्यक्षता में गठित कमेटी में तत्कालीन एडीएम सिटी मुकेश चंद्र, उप निदेशक पंचायत अमरजीत सिंह, अधीक्षण अभियंता जल निगम केपी सिंह को सदस्य बनाया गया था। शुरुआती 10 वार्डों की रिपोर्ट में नगर निगम के दावों की पोल खुल गई थी। इस रिपोर्ट में 504 शौचालय गायब मिले।
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ओडीएफ घोषित करने पर हुई जांच
निगम अधिकारियों का दावा था कि चयनित सभी परिवारों के खाते में शौचालय निर्माण की धनराशि भेजी थी। उप्र सरकार ने महानगर को ओडीएफ घोषित करने की रिपोर्ट मांगी थी। जिस पर नगर निगम प्रशासन ने ओडीएफ की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। आयुक्त ने इस पर अपनी जांच शुरू करा दी थी। जांच रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि शौचालय निर्माण में अनियमितता हुई है।
नगरायुक्त ने जवाब तक नहीं दिया
पूरे प्रकरण पर नगरायुक्त को 21 जनवरी को एक पत्र भेजा गया। आयुक्त की तरफ से भेेजे गए इस पत्र में कहा गया कि वह एक सप्ताह के भीतर इस पर अपना जवाब दें। साथ ही प्रकरण में दोषी का उत्तरदायित्व भी तय करें। इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया। दो फरवरी को जांच रिपोर्ट की एक कॉपी मांगी गई। पांच फरवरी को जांच समिति की पूरी आख्या के साथ नगरायुक्त को एक प्रति प्रेषित कर दी गई। इसके बावजूद अभी तक उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, जबकि उन्हें रिमाइंडर भी भेजे गए।
यह है आयुक्त के पत्र का सार
आयुक्त ने शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इस पूरे प्रकरण में अनियमितताएं हुई हैं। साथ ही गलत तथ्य दिए गए। मानकों के विपरीत नगर को ओडीएफ घोषित किया गया। इस पर नगरायुक्त मनोज चौहान के विरुद्ध समुचित कार्रवाई की संस्तुति की जाती है। साथ ही मेरठ शहर में बनाए गए शौचालयों तथा ओडीएफ किए जाने के संबंध में विशेष ऑडिट भी कराया जाए।
ओडीएफ एवं शौचालय निर्माण में जांच में यह सामने आ रहा है कि गड़बड़ी की गई है। मानकों के विपरीत शहर को ओडीएफ घोषित किया गया है। इस पर नगरायुक्त के खिलाफ कार्रवाई एवं विशेष ऑडिट कराने की संस्तुति शासन को प्रेषित की गई है। -अनीता सी मेश्राम, आयुक्त
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केंद्र सरकार की योजना के तहत शहर और गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए शौचालय बनवाए गए थे। इसके तहत जिले के अफसरों ने जनपद को ओडीएफ घोषित किया था। तत्कालीन डीएम और अन्य अधिकारियों ने सीएम के यहां जाकर इसका प्रशस्ति पत्र भी ले लिया।
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पहले चरण की जांच में खुला खेल
मेरठ नगर निगम को ओडीएफ के लिए महानगर में 20404 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य दिया गया था। निगम ने 15845 शौचालय बनाने के साथ महानगर को ओडीएफ घोषित कर मंडलायुक्त को रिपोर्ट दी थी। नगर निगम के इस दावे की सत्यता जांचने के लिए मंडलायुक्त ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी। अपर आयुक्त रजनीश राय की अध्यक्षता में गठित कमेटी में तत्कालीन एडीएम सिटी मुकेश चंद्र, उप निदेशक पंचायत अमरजीत सिंह, अधीक्षण अभियंता जल निगम केपी सिंह को सदस्य बनाया गया था। शुरुआती 10 वार्डों की रिपोर्ट में नगर निगम के दावों की पोल खुल गई थी। इस रिपोर्ट में 504 शौचालय गायब मिले।
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ओडीएफ घोषित करने पर हुई जांच
निगम अधिकारियों का दावा था कि चयनित सभी परिवारों के खाते में शौचालय निर्माण की धनराशि भेजी थी। उप्र सरकार ने महानगर को ओडीएफ घोषित करने की रिपोर्ट मांगी थी। जिस पर नगर निगम प्रशासन ने ओडीएफ की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। आयुक्त ने इस पर अपनी जांच शुरू करा दी थी। जांच रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि शौचालय निर्माण में अनियमितता हुई है।
नगरायुक्त ने जवाब तक नहीं दिया
पूरे प्रकरण पर नगरायुक्त को 21 जनवरी को एक पत्र भेजा गया। आयुक्त की तरफ से भेेजे गए इस पत्र में कहा गया कि वह एक सप्ताह के भीतर इस पर अपना जवाब दें। साथ ही प्रकरण में दोषी का उत्तरदायित्व भी तय करें। इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया। दो फरवरी को जांच रिपोर्ट की एक कॉपी मांगी गई। पांच फरवरी को जांच समिति की पूरी आख्या के साथ नगरायुक्त को एक प्रति प्रेषित कर दी गई। इसके बावजूद अभी तक उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, जबकि उन्हें रिमाइंडर भी भेजे गए।
यह है आयुक्त के पत्र का सार
आयुक्त ने शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इस पूरे प्रकरण में अनियमितताएं हुई हैं। साथ ही गलत तथ्य दिए गए। मानकों के विपरीत नगर को ओडीएफ घोषित किया गया। इस पर नगरायुक्त मनोज चौहान के विरुद्ध समुचित कार्रवाई की संस्तुति की जाती है। साथ ही मेरठ शहर में बनाए गए शौचालयों तथा ओडीएफ किए जाने के संबंध में विशेष ऑडिट भी कराया जाए।
ओडीएफ एवं शौचालय निर्माण में जांच में यह सामने आ रहा है कि गड़बड़ी की गई है। मानकों के विपरीत शहर को ओडीएफ घोषित किया गया है। इस पर नगरायुक्त के खिलाफ कार्रवाई एवं विशेष ऑडिट कराने की संस्तुति शासन को प्रेषित की गई है। -अनीता सी मेश्राम, आयुक्त