बहिष्कार का शोर, बाजार में चीन के सामान का जोर, मोबाइल से इलेक्ट्रॉनिक तक का वर्चस्व कायम
- व्यापारी बोले, नीति के तहत आया माल तो अब कैसे जला दें
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विस्तार
जब भी चीन ने भारत के खिलाफ कोई हरकत की, तभी चीन के सामान के बहिष्कार का ऐलान हुआ। लेकिन यह ऐलान सिर्फ सांकेतिक ही रहा। चीन बाजार में न केवल अपनी पकड़ बनाता रहा बल्कि उसने ऐसा जाल बुन दिया कि लोग उससे दूर नही हो सके।
सरकार की नीति को भी इसका दोषी बताया गया। जानकारों के अनुसार देश के बाजार से चीन के सामान को हटाने के लिए सरकार को बड़े कदम उठाने होंगे। चीन की तरह ऐसा सामान तैयार कराना होगा, जो लोगों को प्रभावित करे और उनकी जेब पर भी बोझ न पड़े।
इन क्षेत्रों में चीन का दबदबा
इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, मशीनरी, ऑर्गेनिक केमिकल, प्लास्टिक निर्मित सामान, चश्मे और कॉन्टेक्ट लेंस, मेडिकल और सर्जिकल उपकरण, फर्नीचर, खेल का सामान और उपकरण, खिलौने, जूते और चप्पल
चीन निर्मित सामान बेचना मजबूरी
बाजार में चीन का सामान बहुतायत मात्रा में मौजूद है। इसे व्यापारी जला नही सकता, क्योंकि उसने काफी बड़ी रकम निवेश की है। सबसे बड़ी बात लोगों की जेब को चीन का सामान भा रहा है। विकल्प के बिना बहिष्कार संभव नही। -विनेश जैन, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के मेरठ प्रभारी
विकल्प ही नहीं
लोगों के सामने विकल्प नही हैं। सरकार को विकल्प बनाने होंगे। क्वालिटी इसमें सबसे महत्वपूर्ण होगी। जहां तक चीन के फोन की बाजार में मांग की बात है तो लॉकडाउन के बाद बड़ी संख्या में लोग फोन खरीद रहे हैं। चीन ने दूसरे मोबाइल फोनों को को पछाड़ दिया है। - विकास कंसल, ओप्पो डिस्ट्रीब्यूटर
विरोध और अमल में फर्क
विरोध जताने और अमल में लाने, दोनों बातों में फर्क है। सरकारी नीति के अनुरूप माल भारत में आकर तैयार होता है इसलिए व्यापारी की मजबूरी उसे खरीदना और बेचना है। सरकार अपने प्लांट बनाए तभी कुछ संभव हो सकता है। फिलहाल चीन के सामान की मांग जस की तस है। -संजीव मित्तल, हायर डिस्ट्रीब्यूटर