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अहिंसा की बांसुरी सुनने वाला कोई नहीं : भाव भूषण
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अहिंसा की बांसुरी सुनने वाला कोई नहीं : भाव भूषण
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 33वें दिन शनिवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
गुरुवर 108 भावभूषण महाराज ने कहा कि अहिंसा परमो धर्म:। आज हिंसा के नगाड़े के बीच अहिंसा की बांसुरी सुनने वाला कोई नहीं है। हर क्षण हिंसा करने के कारण तुम्हारा स्वभाव भी हिंसात्मक हो गया है। फिर चाहे शरीर के रोगों को दूर करने के लिए दवाइयों का निर्माण ही क्यों न हो। तुम दूसरों के प्राणों की आहुति देने से भी नहीं हिचकते। जब तुम दूसरों की रक्षा नहीं करोगे तो तुम्हारी रक्षा कौन करेगा।
इससे पूर्व स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य मुनि सेवा समिति गुना व शांतिधारा करने का सौभाग्य रविंद्र जैन, अनमोल जैन, मुनि सेवा समिति गुना को प्राप्त हुआ। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले दीप प्रज्ज्वलन मुनि सेवा समिति गुना ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाए। 351 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
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विधान का विसर्जन चंचल जैन, पलंक जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन कुसुमलता जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन शोभा जैन, कैलाशचंद जैन ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन जितेंद्र कुमार जैन, महेशचंद जैन ने किया।
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 33वें दिन शनिवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
गुरुवर 108 भावभूषण महाराज ने कहा कि अहिंसा परमो धर्म:। आज हिंसा के नगाड़े के बीच अहिंसा की बांसुरी सुनने वाला कोई नहीं है। हर क्षण हिंसा करने के कारण तुम्हारा स्वभाव भी हिंसात्मक हो गया है। फिर चाहे शरीर के रोगों को दूर करने के लिए दवाइयों का निर्माण ही क्यों न हो। तुम दूसरों के प्राणों की आहुति देने से भी नहीं हिचकते। जब तुम दूसरों की रक्षा नहीं करोगे तो तुम्हारी रक्षा कौन करेगा।
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इससे पूर्व स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य मुनि सेवा समिति गुना व शांतिधारा करने का सौभाग्य रविंद्र जैन, अनमोल जैन, मुनि सेवा समिति गुना को प्राप्त हुआ। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले दीप प्रज्ज्वलन मुनि सेवा समिति गुना ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाए। 351 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
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विधान का विसर्जन चंचल जैन, पलंक जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन कुसुमलता जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन शोभा जैन, कैलाशचंद जैन ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन जितेंद्र कुमार जैन, महेशचंद जैन ने किया।