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वाहनों की गति काबू करने की दिशा में नहीं हुआ काम
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मेरठ। वाहनों की गति नियंत्रण को लेकर यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के पास ठोस प्लान नहीं है। वहीं, वर्ष 2019 में 70 फीसदी मौत हाईवे पर हुई हैं। यहां ब्लैक स्पॉट लगातार जान लेते रहे हैं। वहीं, अधिकतर स्थानों पर न लाइट की व्यवस्था है और न ही रिफ्लेक्टर की।
यातायात पुलिस के अनुसार बीते वर्ष मेरठ में सड़क हादसों 434 लोगों की जान गईं। इनमें 305 लोगों की मौत राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर परतापुर बाईपास, कंकरखेड़ा, मोदीपुरम और दौराला क्षेत्र में हुई हैं। इसके बाद मेरठ-बुलंदशहर हाईवे पर मौत हुई हैं। हालांकि शहरी क्षेत्र और अन्य मार्गों पर 30 फीसदी लोगों की मौत हुई है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि हाईवे पर हादसों में मौत की वजह वाहनों की अधिक स्पीड होना है। बीते वर्ष 120 लोगों की मौत दोपहिया वाहनों पर हुई थी। इनमें से अधिकतर ने हेलमेट नहीं लगाया हुआ था।
वर्जन
यातायात पुलिस वाहनों की गति को लेकर कई बार अभियान चला चुकी है। हेलमेट के संबंध में लगातार जागरूक किया जा रहा है। इस वर्ष लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के चलते सड़क हादसों में कमी आई है।-जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी ट्रैफिक
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यातायात पुलिस के अनुसार बीते वर्ष मेरठ में सड़क हादसों 434 लोगों की जान गईं। इनमें 305 लोगों की मौत राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर परतापुर बाईपास, कंकरखेड़ा, मोदीपुरम और दौराला क्षेत्र में हुई हैं। इसके बाद मेरठ-बुलंदशहर हाईवे पर मौत हुई हैं। हालांकि शहरी क्षेत्र और अन्य मार्गों पर 30 फीसदी लोगों की मौत हुई है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि हाईवे पर हादसों में मौत की वजह वाहनों की अधिक स्पीड होना है। बीते वर्ष 120 लोगों की मौत दोपहिया वाहनों पर हुई थी। इनमें से अधिकतर ने हेलमेट नहीं लगाया हुआ था।
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यातायात पुलिस वाहनों की गति को लेकर कई बार अभियान चला चुकी है। हेलमेट के संबंध में लगातार जागरूक किया जा रहा है। इस वर्ष लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के चलते सड़क हादसों में कमी आई है।-जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी ट्रैफिक
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