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कोई चुड़ैल नहीं, दिमागी लोचा हैं चोटी कटने की घटनाएं, जानिए कैसे ?

Mon, 07 Aug 2017 12:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर Updated Mon, 07 Aug 2017 12:49 PM IST
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No witch, brains are low incidence of peak cutting, panic from rumors
चोटी कटने का सिलसिला नहीं थम रहा

सहारनपुर। हरियाणा, एनसीआर क्षेत्र और दिल्ली से शुरू हुआ चुड़ैल और चोटी कटने का हल्ला सहारनपुर तक पहुंच गया है। दो दिन में छह घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें चार घटनाएं शुक्रवार रात हुई है। दहशत का हाल यह है कि लोग जागकर पहरा दे रहे हैं, टोना टोटका करने वाले तांत्रिकों की शरण में जा रहे हैं, वह मौके का फायदा उठाकर लोगों को ठग रहे हैं। 

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पुलिस की टीमें सच्चाई जानने के लिए गांवों में एक-एक व्यक्ति से बात कर रहीं हैं। फिलहाल पुलिस इन्हें शरारती तत्वों की शरारत बता रही है, लेकिन अभी तक कोई पकड़ा नहीं जा सका।
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मनोविशेषज्ञ इसे दहशत के चलते दिमाग में होने वाला केमिकल लोचा मान रहे हैं। इससे पूर्व बृहस्पतिवार की रात हलवाना रोड निवासी महफूज की पत्नी खुशनुदा और शुक्रवार को दिन में दलित कालोनी निवासी जलसिंह की पत्नी कुसुम की भी चोटी कट गई थी। शुक्रवार रात में फिरोजाबाद गांव में एक महिला और एक युवती, छुटमलपुर में एक महिला की चोटी कट गई। देवबंद के फलौदा रहमतपुर गांव में किशोरी की चोटी कटी मिली।  
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पुलिस अधिकारियों ने हर घटना में सीओ और एसओ की टीम बनाकर जांच के लिए भेज दी हैं। जिस जगह घटना हुई उस पीड़िता के साथ-साथ आसपास के घरों के एक-एक व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि किसी की खुराफात हो सकती है। लेकिन अभी तक पुलिस ने किसी खुराफाती को नहीं पकड़ा है। जिससे ऐसा लग रहा है कि पुलिस समझ रही है कि महिलाएं कहीं इस अफवाह में खुद ही तो अपनी चोटियां नहीं काट रहीं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि कुछ महिलाएं बाल कटवाने के लिए इस अफवाह का सहारा ले रहीं हों।

एक साथ चार घटनाएं

No witch, brains are low incidence of peak cutting, panic from rumors
यहां भी कट गई कई महिलाओं की चोटी

घटना एक 
चिलकाना। शुक्रवार की रात ग्राम फिरोजाबाद में महिला प्रेमो देवी (50) पत्नी हुक्म सिंह ने रात 9:20 बजे चीखना शुरू कर दिया। परिवारीजन और आसपास के लोग पहुंचे तो प्रेमो देवी की चोटी कटी पड़ी थी और वह बेसुध थी। होश में आने पर उन्होंने बताया कि सोते समय उसे छम-छम की आवाज सुनाई दी। उसने सोचा कि ऊपर वाले कमरे से बहू नीचे आ रही होगी, परंतु बहू के पास तो पायल ही नहीं है। इसी को सोचकर वह उठकर बैठी तो एक काले रंग की बिल्ली जाती दिखाई पड़ी, जिसे देखकर वह बेहोश हो गई।

घटना दो
चिलकाना। फिरोजाबाद में ही प्रीतम सिंह की बेटी मोनिका के साथ भी रात में 9:30 बजे सोते समय किसी ने उसके दोनों बाजू पकड़ लिए। जिसपर उसकी चीख निकल गई। चीख सुनकर उसके परिवारीजन आए तो देखा कि उसकी चोटी कटी पड़ी हुई थी। 

घटना तीन
छुटमलपुर। हलवाना रोड निवासी भूरा की पत्नी नसरीन ने बताया कि शुक्रवार की रात करीब 12 बजे अचानक उसकी आंख खुल गई और उसे काले कपड़ों में भयानक चेहरे वाली एक औरत देखी, जिसके लंबे लंबे दांत थे जो उसके घर में घुस रही थी। उसे देखकर वह घबरा गई और उसने शोर मचा दिया। उसके चिल्लाने पर घर में सो रहे अन्य परिवारीजन भी जाग गए। उन्होंने भी ऐसी ही महिला को घर से बाहर निकलते हुए देखा, जो पीछा करने पर गायब हो गई। महिला के जाने के बाद उसे सिर में दर्द हुआ और उसकी चोटी नीचे मिली। 

घटना चार
देवबंद। फलौदा रहमतपुर में रामपाल सिंह की बेटी प्रियांशी (13)  शुक्रवार की मध्य रात्रि करीब 2 बजे उठी तो पलंग पर कटी हुई चोटी देखकर उसकी चीख निकल गई। आवाज सुनकर परिवार के अन्य लोग भी उठ गए। शनिवार की सुबह पुलिस को इसकी जानकारी दी गई तो वह भी जांच करने के लिए वहां पहुंची। लेकिन पुलिस को कुछ भी ऐसा नहीं मिला।

हर जगह अलग कहानी, पर सब हैं टीवी जैसी

No witch, brains are low incidence of peak cutting, panic from rumors
कटी कई महिलाओं की चोटी

घटनाएं भी अलग अलग तरह की है। किसी को सोते समय बिल्ली दिखी तो किसी ने चुड़ैल जैसी महिला देखने की बात कही, किसी ने अचानक सिर में दर्द होने की बात कही, घटनाक्रम की ये कहानियां ऐसी है, जो इन घटनाओं की खबरें टीवी पर दिखाए जाने के दौरान बताई गई। यानी नया कुछ नहीं है, मास हिस्टीरिया जैसे लक्षण, किसी घटना को देख सुनकर अपने साथ वैसा ही होने की कल्पना कर लेने जैसा है।  

केमिकल इम्बैलेंस भी हो सकता है
इस बात को बल मनोविशेषज्ञों द्वारा बताए जा रहे कारणों से भी मिल रहा है। मनोविशेषज्ञ अमरजीत पोपली का कहना है कि मास हिस्टीरिया नाम का दिमागी केमिकल लोचा इस प्रकार की बातों से व्यक्ति को जोड़ देता है और भावों में बहकर व्यक्ति उसी प्रकार की हरकतें करने लगता है। दिमाग में मास हिस्टीरिया के तहत डोपामाइन और सिरोटोनिन जैसे केमिकल हलचल पैदा करते हैं, जो मौसम के बदलने, विटामिनों की कमी अथवा दहशत के चलते न्यूरो ट्रांसमीटर से संतुलन को बढ़ा अथवा कम कर देते हैं। जिससे व्यक्ति अलग तरह की हरकतें करने लगता है। कुछ लोग इसका फायदा उठाकर खुद को सुर्खियों में लाने के लिए इस प्रकार का कार्य कर देते हैं।

ये भी हो सकती हैं वजह 
- अधिकांश घटनाएं बाहरी इलाकों में रहने वाले मकानों में हुई है। बरसात के मौसम में न लोग खुले में सो पाते है और न मकानों के कमरों को बंद कर सो पाते हैं। बदमाशों की वारदात भी बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ लोग इस तरह का हल्ला मचा देते है, जिससे दहशत में आए लोग जागकर पहरा देने लगते है।

- कुछ शरारती तत्व भी ऐसे मौकों का फायदा उठाते हैं। मनोविज्ञानी बताते हैं कि उन्हें ऐसा करने और बाद में लोगों को परेशान होता देखने में एक आनंद की अनुभूति होती है। हो सकता है कि वह सो रही महिला की चोटी काटकर भाग जाते हों। 

- कुछ किशोरी और युवतियां अपने बाल कटवाना चाहती है, लेकिन परिवारिक और सामाजिक बंदिशों के चलते वह ऐसा नहीं करा पाती। वह खुद भी अपनी चोटी काट लेती है और ऐसी अफवाहों और तंत्र मंत्र करने के संदेह जताकर मामले को दूसरा मोड़ देती है। छात्राओं के बीच ऐसे मामलों की चर्चा हो रही है।

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