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भारत जैसी अनमोल मिट्टी किसी देश की नहीं : डॉ. मोहन भागवत
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हस्तिनापुर (मेरठ)। भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन किसान गोष्ठी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहन राव भागवत ने कहा कि गो आधारित एवं जैविक खेती करने वाले किसानों को बताया कि भारत की मिट्टी अनमोल है। इतनी उपजाऊ मिट्टी किसी देश की नहीं है, जितनी भारत की है। यह मिट्टी हमारी प्राचीन सभ्यता की देन है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश की मिट्टी में किसानों के हितों के लिए कई पोषक तत्वों से भरपूर है। उन्होंने कहा कि किसान सिर्फ अपने हितों के लिए खेती नहीं करते, बल्कि वह पूरे देश के लोगों के हितों को देखते हुए खेती करते हैं। कठिन परिश्रम कर धान, गेहूं और अन्य फसल उगाते हैं। जबकि व्यापार में ऐसा नहीं है। व्यापार लोग सिर्फ अपने लिए करते हैं। हमारे देश के किसानों को हर मनुष्य की चिंता है।
रासायनिक खेती से देसी जड़ी बूटियां हो रहीं समाप्त
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अंधाधुंध रासायनिक खेती से हमारे खेतों में खड़ी कई महत्वपूर्ण जड़ी बूटियां समाप्त हो रही हैं, जो सिर्फ भारत में ही पाई जाती हैं। इसलिए जैविक खेती हमारे और हमारे स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक है।
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अमृत से भरपूर भोजन देंगे
डॉ. मोहन राव भागवत ने कहा कि भारत विभिन्नता का देश है। इसी तरह यहां विभिन्न प्रकार की फसलों को तैयार किया जाता है। अब समय आ गया है कि हमें सैकड़ो वर्ष पूर्व अपने पूर्वजों द्वारा की गई उसी प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा, जो पूरी तरह प्राकृतिक खेती थी। गो आधारित खेती कर समाज को विष नहीं, अमृत से भरपूर भोजन देंगे।
देसी गाय भारत की संजीवनी
डॉ. मोहन राव भागवत ने देसी गाय के महत्व को भी बताया। उन्होंने कहा कि देशी गाय भारत की संजीवनी है, जो कृषि और मनुष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस बात की समझ अब लोगों को आ रही है कि देसी गाय हमारी प्राचीन संस्कृति में पूजनीय है। वेद पुराणों में भी हम गाय को गो माता का दर्जा देते हैं। इसलिए हमें अब गाय के महत्व को समझना होगा और जागरूक होना होगा।
प्राकृतिक है मोटे अनाज की खेती
पूर्व में हमारे पूर्वज पूरी तरह प्राकृतिक खेती करते थे और मोटे अनाज की भरपूर पैदावार होती थी, जिससे लोगों को पौष्टिक भोजन मिलता था। परंतु रासायनिक खेती के चक्कर में सभी ने मोटे अनाज की खेती को छोड़ दिया। आज किसान रासायनिक खेती कर रहे हैं। जबकि सरकार मोटे अनाज पर जोर दे रही है। अब प्राचीन खेती करने का समय आ गया है। मोटे अनाज की खेती के लिए सरकार किसानों को जागरूक करने के लिए कई योजनाएं ला रही है।
इससे पूर्व पहले सत्र में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बद्री नारायण चौधरी, राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र, कार्यकारिणी अध्यक्ष हुकमचंद पाटीदार सहित कई पदाधिकारी ने जैविक खेती के संबंध में संबोधित किया।
जैविक खेती के बारे में करें दूसरों को भी जागरूक
डॉ. मोहन राव भागवत ने कहा कि जैविक खेती जो किसान कर रहे हैं, उन्हें जो लाभ हो रहे हैं उनसे होने वाले लाभों को उन्हें अपने मिलने वालों अपने दोस्तों और मित्रों को बताने चाहिएं, जिससे अन्य किसान भी जैविक खेती की ओर जागरूक हों। यही नहीं, जैविक खेती से न सिर्फ उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि उनके और उनके परिवार में होने वाली गंभीर बीमारियां भी पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।
अपने खेतों में लगाए फलदार और छाया वाले पौधे
उन्होंने कहा कि किसान विभिन्न प्रकार की फसलों का उगाएं, जिससे उनकी आय बढ़ेगी। अपने परिवार, बच्चों के लिए अपने खेतों में फलदार और छायादार पौधे लगाएं, जिससे उन्हें पौष्टिक और स्वादिष्ट फल भी खाने को मिलें। यह किसानों को सोचना चाहिए कि जमीन के किस हिस्से में कौन सी फसल उगानी है।
कृषि प्रदर्शनी का किया अवलोकन
जंबूद्वीप परिसर में जैविक खेती पर आधारित प्रदर्शनी का भी डॉ. मोहन राव भागवत ने अवलोकन किया। दूसरे सत्र में करीब 35 मिनट के संबोधन के बाद वह करीब चार बजे प्रदर्शनी में पहुंचे। उन्होंने करीब 30 मिनट तक प्रदर्शनी में लगे करीब एक दर्जन जैविक खेती पर आधारित प्रति स्टॉल पर जाकर जैविक खेती से तैयार होने वाले उत्पादों को देखा और उनकी बारे में जाना। इस अवसर पर गंगा अमृत एग्रो प्रोडक्शन द्वारा तैयार किया गया। प्राकृतिक गुड और शक्कर के बारे में उन्होंने जानकारी की और गुड़ का स्वाद भी चखा। इसके बाद गंगा अमृत एग्रो प्रोडक्शन द्वारा मोहन राव भागवत को गुड भेंट किया गया। हालांकि एकादशी का उपवास होने के कारण वह अन्य जैविक उत्पादों का स्वाद नहीं ले सके, परंतु उनकी गहनता से जानकारी जरूर की।
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उन्होंने कहा कि हमारे देश की मिट्टी में किसानों के हितों के लिए कई पोषक तत्वों से भरपूर है। उन्होंने कहा कि किसान सिर्फ अपने हितों के लिए खेती नहीं करते, बल्कि वह पूरे देश के लोगों के हितों को देखते हुए खेती करते हैं। कठिन परिश्रम कर धान, गेहूं और अन्य फसल उगाते हैं। जबकि व्यापार में ऐसा नहीं है। व्यापार लोग सिर्फ अपने लिए करते हैं। हमारे देश के किसानों को हर मनुष्य की चिंता है।
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रासायनिक खेती से देसी जड़ी बूटियां हो रहीं समाप्त
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अंधाधुंध रासायनिक खेती से हमारे खेतों में खड़ी कई महत्वपूर्ण जड़ी बूटियां समाप्त हो रही हैं, जो सिर्फ भारत में ही पाई जाती हैं। इसलिए जैविक खेती हमारे और हमारे स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक है।
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अमृत से भरपूर भोजन देंगे
डॉ. मोहन राव भागवत ने कहा कि भारत विभिन्नता का देश है। इसी तरह यहां विभिन्न प्रकार की फसलों को तैयार किया जाता है। अब समय आ गया है कि हमें सैकड़ो वर्ष पूर्व अपने पूर्वजों द्वारा की गई उसी प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा, जो पूरी तरह प्राकृतिक खेती थी। गो आधारित खेती कर समाज को विष नहीं, अमृत से भरपूर भोजन देंगे।
देसी गाय भारत की संजीवनी
डॉ. मोहन राव भागवत ने देसी गाय के महत्व को भी बताया। उन्होंने कहा कि देशी गाय भारत की संजीवनी है, जो कृषि और मनुष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस बात की समझ अब लोगों को आ रही है कि देसी गाय हमारी प्राचीन संस्कृति में पूजनीय है। वेद पुराणों में भी हम गाय को गो माता का दर्जा देते हैं। इसलिए हमें अब गाय के महत्व को समझना होगा और जागरूक होना होगा।
प्राकृतिक है मोटे अनाज की खेती
पूर्व में हमारे पूर्वज पूरी तरह प्राकृतिक खेती करते थे और मोटे अनाज की भरपूर पैदावार होती थी, जिससे लोगों को पौष्टिक भोजन मिलता था। परंतु रासायनिक खेती के चक्कर में सभी ने मोटे अनाज की खेती को छोड़ दिया। आज किसान रासायनिक खेती कर रहे हैं। जबकि सरकार मोटे अनाज पर जोर दे रही है। अब प्राचीन खेती करने का समय आ गया है। मोटे अनाज की खेती के लिए सरकार किसानों को जागरूक करने के लिए कई योजनाएं ला रही है।
इससे पूर्व पहले सत्र में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बद्री नारायण चौधरी, राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र, कार्यकारिणी अध्यक्ष हुकमचंद पाटीदार सहित कई पदाधिकारी ने जैविक खेती के संबंध में संबोधित किया।
जैविक खेती के बारे में करें दूसरों को भी जागरूक
डॉ. मोहन राव भागवत ने कहा कि जैविक खेती जो किसान कर रहे हैं, उन्हें जो लाभ हो रहे हैं उनसे होने वाले लाभों को उन्हें अपने मिलने वालों अपने दोस्तों और मित्रों को बताने चाहिएं, जिससे अन्य किसान भी जैविक खेती की ओर जागरूक हों। यही नहीं, जैविक खेती से न सिर्फ उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि उनके और उनके परिवार में होने वाली गंभीर बीमारियां भी पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।
अपने खेतों में लगाए फलदार और छाया वाले पौधे
उन्होंने कहा कि किसान विभिन्न प्रकार की फसलों का उगाएं, जिससे उनकी आय बढ़ेगी। अपने परिवार, बच्चों के लिए अपने खेतों में फलदार और छायादार पौधे लगाएं, जिससे उन्हें पौष्टिक और स्वादिष्ट फल भी खाने को मिलें। यह किसानों को सोचना चाहिए कि जमीन के किस हिस्से में कौन सी फसल उगानी है।
कृषि प्रदर्शनी का किया अवलोकन
जंबूद्वीप परिसर में जैविक खेती पर आधारित प्रदर्शनी का भी डॉ. मोहन राव भागवत ने अवलोकन किया। दूसरे सत्र में करीब 35 मिनट के संबोधन के बाद वह करीब चार बजे प्रदर्शनी में पहुंचे। उन्होंने करीब 30 मिनट तक प्रदर्शनी में लगे करीब एक दर्जन जैविक खेती पर आधारित प्रति स्टॉल पर जाकर जैविक खेती से तैयार होने वाले उत्पादों को देखा और उनकी बारे में जाना। इस अवसर पर गंगा अमृत एग्रो प्रोडक्शन द्वारा तैयार किया गया। प्राकृतिक गुड और शक्कर के बारे में उन्होंने जानकारी की और गुड़ का स्वाद भी चखा। इसके बाद गंगा अमृत एग्रो प्रोडक्शन द्वारा मोहन राव भागवत को गुड भेंट किया गया। हालांकि एकादशी का उपवास होने के कारण वह अन्य जैविक उत्पादों का स्वाद नहीं ले सके, परंतु उनकी गहनता से जानकारी जरूर की।