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नो कैश से अब बिगड़ने लगे शहर के हालत

Tue, 22 Nov 2016 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Tue, 22 Nov 2016 01:47 AM IST
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no cash
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
 नोट बंदी के 13 वें दिन नो कैश से बैंकों के हालात सुधरने के बजाय बिगड़ गए। प्रह्लाद नगर स्थित ओबीसी शाखा पर सोमवार सुबह पथराव और तोड़फोड़ से साफ है कि लंबी लाइनों में लग रहे लोगों का अब धैर्य जवाब दे रहा है। देहात में भी कई बैंकों पर लोगों ने गुस्सा जताया। शादी वाले परिवारों को भी लौटा दिया गया। नाराज लोगों ने कलक्ट्रेट और एलडीएम ऑफिस में जमकर हंगामा किया। जिले में कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा देख डीएम ने सोमवार रात सभी बैंकों के रीजनल मैनेजरों की बैठक बुलाई। शासन और आरबीआई से बात की गई। वहीं प्रयासों के बावजूद अगले दो-तीन दिन हालात सुधरने की उम्मीद नहीं है।
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मंगलवार को आरबीआई से कैश मिलने की उम्मीद बैंकों को थी। लेकिन केवल एसबीआई को ही कैश उपलब्ध हो सका। बाकी शाखाओं में कैश न मिलने से हालात बिगड़ गए। सुबह से ही कई बैंकों ने अपने यहां नो कैश का नोटिस लगा दिया था। बागपत रोड स्थित पीएनबी, कबाड़ी बाजार के इलाहाबाद बैंक, सिंडिकेट बैंक, ओबीसी प्रह्लाद नगर, मेट्रो प्लाजा सहित अधिकांश बैंक शाखाओं में दोपहर में कैश खत्म हो चुका था। कैश की कमी से बैंकों के एटीएम भी खाली थे। घंटो लाइन में लगने के बाद भी लोगों को कैश नहीं मिला तो उनका गुस्सा फूटने लगा। उन्होंने उक्त शाखाओं के बाहर हंगामा किया। प्रहलाद नगर में तो गुस्साई भीड़ ने बैंक में धावा बोलकर जमकर तोड़फोड़ की। मैनेजर और स्टाफ को बंधक बना लिया। कबाड़ी बाजार स्थित इलाहाबाद बैंक में लाइन में लगे लोग एक-दूसरे से भिडृ गए। जमकर मारपीट हुई। सरधना, किठौर, जानी, मवाना क्षेत्रों के बैंकों में भी कई जगह हंगामे हुए।
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आज भी हालात सुधरने की उम्मीद नहीं
मेरठ। बैंकों में कैश की जबर्दस्त किल्लत है। हालत है कि डिमांड का 30 फीसदी भी कैश बैंकों को नही मिल पा रहा। करेंट एकाउंट वाले व्यापारी भी बैंक से 50 हजार एक साथ निकालने का दबाव बना रहे हैं। उधर, शादी वाले परिवार भी ढाई लाख मांग रहे हैं। ऐसे में एक दिन के कैश में भी स्थिति सुधरने वाली नहीं है। हालात सुधारने के लिए आरबीआई से लगातार कैश का फ्लो बढ़ाने की मांग हो रही है। इसलिए फिलहाल मंगलवार को भी लोगों को राहत के आसार नहीं है।
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हुआ प्रदर्शन, घेराव
मेरठ। शादी वाले परिवारों को भी बैंकों ने कैश की कमी और आरबीआई का गजट न मिलने की बात कहकर लौटा दिया। मेरठ, सरधना, किठौर, मवाना, सहित दर्जनों स्थानों से आए शादी वाले परिवारों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। डीएम को समस्या बताई। दर्जनों लोगों ने लीड बैंक मैनेजर कार्यालय पहुंचकर भी उनका घेराव किया और हंगामा काटा।

डीएम ने अपनाया सख्त रुख
मेरठ। बैंकों की खराब स्थिति देख प्रशासन को भी कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका लगने लगी है। इसे लेकर डीएम बी. चंद्रकला ने जिले के सभी बैंकों के रीजनल मैनेजर की बैठक बुलाई। रीजनल मैनेजरों ने कैश की किल्लत बताई। डीएम ने शासन और आरबीआई के अधिकारियों से वार्ता की। बैंक अधिकारियों से कहा गया कि वह कैश के लिए मुख्यालय और आरबीआई पर पूरा दबाव बनाएं। उन्हें सख्त लेटर जारी करें। बैंकों की वजह से किसी कीमत पर जिले की कानून व्यवस्था खराब नहीं होने दी जाएगी।

एचडीएफसी में पैन से लगेगा निशान
मेरठ। नोट एक्सचेंज करने वालों की उंगली में अमिट स्याही लगाने की समस्याएं बैंक अपने स्तर से सुलझाने लगे हैं। एचडीएफसी बैंक प्रबंधन ने अपनी शाखाओं में एक इंक मार्कर भेजा है। बैंक की वेस्टर्न कचहरी ब्रांच के मैनेजर ने बताया कि उनके यहां यह पैन आ गए हैं। लोगों की उंगली पर निशान लगाया जा रहा है।

पुराने नोटों से इलाज पर 40 फीसदी तक कमीशन
कुछ निजी अस्पतालों और क्लीनिक पर पुराने नोट कमीशन पर लिया जा रहा है। हालात यह हैं कि अगर किसी चिकित्सक की फीस 300 या 400 रुपये है तो कुछ जगहों पर 500 का नोट लिया जा रहा है। यही हाल दवाओं की खरीद को लेकर भी है। अगर आपने 800 या 850 रुपये की दवा खरीदी और एक हजार का नोट दिया तो बाकी के पैसे नहीं लौटाए जा रहे हैं। ऐसे में इलाज कराने के लिए मजबूर लोगों को 20 से 40 फीसदी तक कमीशन देना पड़ रहा है।


अधिकांश अस्पताल कर रहे आनाकानी
उधर, अधिकांश निजी अस्पताल पुराने नोट लेने में ही आनाकानी कर रहे हैं। इससे अस्पतालों में नोकझोंक की घटनायें बढ़ गई हैं। आलम यह है कि अस्पताल अब तीन ही स्थिति में इलाज कर रहे हैं। आप नए नोट दें या फिर फुटकर दें। इसके अलावा अस्पताल चेक, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग के जरिये ही भुगतान लेना चाहते हैं। अस्पतालों के इस रुख से इमरजेंसी में फंसे मरीज और उनके तीमारदारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
 
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