मौलाना साद के पक्ष में आए उलमा, बोले- सिर्फ वो ही नहीं, सरकार भी दोषी
उलमा, मकरज के जिम्मेदार, इमाम संगठन और जमीयत के पदाधिकारी मौलाना साद के पक्ष में आ चुके हैं।
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उलमा, मकरज के जिम्मेदार, इमाम संगठन और जमीयत के पदाधिकारी मौलाना साद के पक्ष में आ चुके हैं। उनका कहना है गलती दोनों पक्ष की है। मौलाना साद को सीधे दोषी ठहराना उचित नहीं है, इसके लिए सरकार भी दोषी है।
इमाम संगठन के प्रदेश अध्यक्ष, ऑल इंडिया शरीयत बोर्ड के चेयरमैन एवं उप्र अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य मुफ्ती जुल्फिकार का कहना है कि सरकार और कुछ लोगों ने मौलाना साद को पाक का हाफिज सईद बना दिया, जो ठीक नहीं है। मरकज मामले में गलती दोनों ओर से हुई है। मौलाना साद को लोगों से घरों में रहने का आह्वान करना था। सरकार को भी पता था कि मरकज में हर समय कई हजार लोग रहते हैं, उनको घरों पर पहुंचाने या उनके वहीं पर समय पर क्वारंटीन करने का प्रबंध करना चाहिए था। जो हुआ गलत हुआ, अब इसका दुष्प्रचार न करके सरकार को रोकथाम पर काम करना चाहिए।
जमीयत के जिलाध्यक्ष मौलाना कासिम का कहना है कि लॉकडाउन करने से पहले सरकार को कुछ समय दिया जाना चाहिए था, ताकि लोग अपने घरों पर पहुंच जाए, मगर ऐसा नहीं हुआ, इस मामले में गलती दोनों पक्षों की है। सरकार को पहले पता था कि मरकज में थाइलैंड, इंडोनेशिया आदि देशों से भी लोग आए हुए है। शहर के फक्करशाह मस्जिद के मरकज के जिम्मेदार मुस्तकीम कहते हैं कि वहां खुफिया विभाग की टीम भी रहती है। लॉकडाउन होने पर पुलिस, प्रशासन को खबर की थी, मगर कोई इंतजाम नहीं हुए।
मौ.राशिद कांधलवी का कहना है कि दिल्ली मरकज में करीब 80 वर्षों से काम हो रहा है। देश-विदेश मे यहां से तब्लीगी जमात का आना-जाना लगा रहता है। हर वक्त यहां पर हजारों लोगों का आना-जाना रहता है। हर खबर सरकार व पुलिस को होती है। हम सब लोगों को सरकार के द्वारा जारी आदेशों को पालन करना चाहिए ओर ऐसी परिस्थिति में अपने घरों में ही रहना चाहिए।
गढ़ी दौलत के मदरसा के प्रबधक आकिल कांधलवी ने कहा कि ये कोई जान-बूझकर किया जुर्म नहीं है, जो लोग मरकज के संपर्क में आए हैं उन्हें अपनी और दूसरों की हिफाजत के लिए सामने आना चाहिए। दिल्ली में जमा हुए लोगों के बारे में कहा कि 22 मार्च से पहले ज्यादा सख्ती नहीं थी, जब से सख्ती हुई थी तब से लोग वहीं पर हैं।
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