{"_id":"587921cc4f1c1b7c58baa908","slug":"nigam-ki-pareshaani","type":"story","status":"publish","title_hn":" निगम की बढ़ी परेशानी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निगम की बढ़ी परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 14 Jan 2017 02:16 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर निगम में दो साल से खाली पड़ी मुख्य नगर लेखा परीक्षक ( एमएनएलपी ) की कुर्सी परेशानी का कारण बन सकती है। अमृत योजना के तहत जारी होने वाली धनराशि से पहले केंद्र सरकार ने निगम से तीन साल की एमएनएलपी की रिपोर्ट मांगी है। यदि रिपोर्ट नहीं गई तो शहर में अमृत योजना पर ब्रेक लग सकता है।
केंद्र सरकार शहर के सौंदर्यीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में है। इसके लिए अमृत योजना के तहत शहर में जहां पार्कों का सौंदर्यीकरण होना है, वहीं सीवर लाइन और पानी की पाइप लाइन डाली जाएगी। सरकार इसके लिए 20 करोड़ रुपये जारी भी कर चुकी है। अब केंद्र सरकार ने बाकी धन जारी करने से पहले नगर निगम प्रशासन से मुख्य नगर लेखा परीक्षक की रिपोर्ट का तीन साल का ब्योरा मांग लिया है। अब जल निगम डीपीआर तैयार कर रहा है। केंद्र सरकार ने योजना को सुचारु रूप से संचालित कराने और धन पर निगरानी रखने के लिए अधिकारियों की टीमें भी गठित कर दी हैं। टीम के तीन अधिकारी नगर निगम में बैठने शुरू हो गए हैं।
दो साल पहले किए थे निलंबित
करीब दो साल पहले नगरायुक्त की रिपोर्ट पर शासन ने एमएनएलपी सच्चिदानंद त्रिपाठी को निलंबित कर दिया था। उसके बाद से नगर निगम में एमएनएलपी की कुर्सी खाली पड़ी है। अब सवाल है कि नगर निगम प्रशासन किसको एमएनएलपी बनाएगा। किसके हस्ताक्षर से केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजेगा। यदि किसी ओर द्वारा सत्यापित करने पर रिपोर्ट स्वीकृत नहीं हुई तो अमृत योजना का मिलने वाला बाकी धन रुक सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्र सरकार शहर के सौंदर्यीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में है। इसके लिए अमृत योजना के तहत शहर में जहां पार्कों का सौंदर्यीकरण होना है, वहीं सीवर लाइन और पानी की पाइप लाइन डाली जाएगी। सरकार इसके लिए 20 करोड़ रुपये जारी भी कर चुकी है। अब केंद्र सरकार ने बाकी धन जारी करने से पहले नगर निगम प्रशासन से मुख्य नगर लेखा परीक्षक की रिपोर्ट का तीन साल का ब्योरा मांग लिया है। अब जल निगम डीपीआर तैयार कर रहा है। केंद्र सरकार ने योजना को सुचारु रूप से संचालित कराने और धन पर निगरानी रखने के लिए अधिकारियों की टीमें भी गठित कर दी हैं। टीम के तीन अधिकारी नगर निगम में बैठने शुरू हो गए हैं।
विज्ञापन
दो साल पहले किए थे निलंबित
करीब दो साल पहले नगरायुक्त की रिपोर्ट पर शासन ने एमएनएलपी सच्चिदानंद त्रिपाठी को निलंबित कर दिया था। उसके बाद से नगर निगम में एमएनएलपी की कुर्सी खाली पड़ी है। अब सवाल है कि नगर निगम प्रशासन किसको एमएनएलपी बनाएगा। किसके हस्ताक्षर से केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजेगा। यदि किसी ओर द्वारा सत्यापित करने पर रिपोर्ट स्वीकृत नहीं हुई तो अमृत योजना का मिलने वाला बाकी धन रुक सकता है।
विज्ञापन