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निगम के हैंडपंप में भ्रष्टाचार का रिबोर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jun 2016 02:01 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम में ऐसे कारनामों को अंजाम दिया जा रहा है, जिसका स्मार्ट सिटी की तैयारियों पर विपरीत असर पड़ेगा। शहर में हैंडपंप के रिबोर में जलकल विभाग का कल तक जो ठेका 27 हजार रुपये में छूटता था, अब यह फिगर बढ़कर 36 हजार रुपये पहुंच गई है। ये महज नौ हजार का खेल नहीं है। करीब 1500 हैंडपंप रिबोर होने के इस भ्रष्टाचार में निगम के खजाने पर सीधे एक करोड़ पैंतीस लाख रुपये की चोट लग रही है। जिसकी जड़ वही सदाबहार कमीशन की लत है, जिसके बिना सरकारी विभागों में फाइल तक आगे नहीं सरकती।
मार्च तक ये स्थिति थी
निगम निगम के जलकल विभाग में शहर में लगे हैंडपंप रिबोर का ठेका मार्च 2016 से पहले 27 हजार रुपये में छूटता था। जो अब बढ़ाकर 36 हजार में छोड़ा गया है। यानी पुराने रेट पर 1500 हैंडपंप रिबोर करने पर चार करोड़ 05 लाख रुपये खर्च होते, जो अब बढ़कर पांच करोड़ 40 लाख रुपये हो जाएंगे। यानी सीधे-सीधे लगभग एक करोड़ 35 लाख रुपये का निगम पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।
20 प्रतिशत कम रेट पर था ठेका
पिछले वित्तीय वर्ष में पूर्व नगरायुक्त एसके दूबे ने हैंडपंप रिपेयर और रिबोर के टेंडर निकाले गए थे। जो निगम के निर्धारित रेट से 20 प्रतिशत कम रेट पर हैंडपंप रिपेयर का ठेका छूटा था। उन्हीं दरों पर 31 मार्च 2016 तक काम किया गया। तत्कालीन नगरायुक्त उमेश प्रताप ने संबंधित ठेकेदारों को 20 प्रतिशत कम रेट पर ही हैंडपंप रिबोर करने के निर्देश दिए। कुछ हैंडपंप रिबोर भी किए गए। लेकिन जलकल और ठेकेदारों के बीच आपसी सामंजस्य न बनने के कारण हैंडपंप रिबोर का काम बीच में ही रुक गया। हालांकि अभी भी ठेकेदार अपना नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि अगर निगम में ऊपर का खर्च न देना पड़े तो हम पुराने रेट पर भी रिबोर करने को तैयार हैँ।
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स्मार्ट सिटी का भी नहीं रखा गया है ध्यान
हैंडपंप रिबोर का ठेका अधिक रेट पर छोड़ते समय निगम प्रशासन ने स्मार्ट सिटी के उस बिंदु पर भी ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण स्मार्ट सिटी की पहली सूची से मेरठ बाहर हो गया था। यानी जलकल विभाग ने स्मार्ट सिटी टीम के सामने प्रस्तुत किए गए आंकड़ों में आय कम और व्यय अधिक दर्शाया था। स्मार्ट सिटी पाने के लिए नगर निगम प्रशासन को यह बिंदु नसीहत से कम नहीं है। उसके बाद भी नगर निगम प्रशासन ने हैंडपंप रिबोर पर खर्च घटाने की बजाय बढ़ा दिया है। जिसका असर स्मार्ट सिटी पर फिर से पड़ सकता है। यानी शहर की मंशा पर एक बार फिर पानी फिर सकता है।
जोड़-तोड़ में ही गुजरे दो माह
अप्रैल और मई माह निगम अफसरों ने हैंडपंपों रिबोर की टेंडर प्रक्रिया की जोड़तोड़ में ही गुजार दिए। शहर में 15 सौ हैंडपंप रिबोर होना यह बताने के लिए काफी है कि जलकल विभाग किस गति से काम कर रहा है। अब कब हैंडपंप रिबोर होंगे और लोगों का कुछ भला होगा या नहीं, यह तो अलग बात है। लेकिन निगम में तो भ्रष्टाचार का रिबोर हो ही चुका है।
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मार्च तक ये स्थिति थी
निगम निगम के जलकल विभाग में शहर में लगे हैंडपंप रिबोर का ठेका मार्च 2016 से पहले 27 हजार रुपये में छूटता था। जो अब बढ़ाकर 36 हजार में छोड़ा गया है। यानी पुराने रेट पर 1500 हैंडपंप रिबोर करने पर चार करोड़ 05 लाख रुपये खर्च होते, जो अब बढ़कर पांच करोड़ 40 लाख रुपये हो जाएंगे। यानी सीधे-सीधे लगभग एक करोड़ 35 लाख रुपये का निगम पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।
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20 प्रतिशत कम रेट पर था ठेका
पिछले वित्तीय वर्ष में पूर्व नगरायुक्त एसके दूबे ने हैंडपंप रिपेयर और रिबोर के टेंडर निकाले गए थे। जो निगम के निर्धारित रेट से 20 प्रतिशत कम रेट पर हैंडपंप रिपेयर का ठेका छूटा था। उन्हीं दरों पर 31 मार्च 2016 तक काम किया गया। तत्कालीन नगरायुक्त उमेश प्रताप ने संबंधित ठेकेदारों को 20 प्रतिशत कम रेट पर ही हैंडपंप रिबोर करने के निर्देश दिए। कुछ हैंडपंप रिबोर भी किए गए। लेकिन जलकल और ठेकेदारों के बीच आपसी सामंजस्य न बनने के कारण हैंडपंप रिबोर का काम बीच में ही रुक गया। हालांकि अभी भी ठेकेदार अपना नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि अगर निगम में ऊपर का खर्च न देना पड़े तो हम पुराने रेट पर भी रिबोर करने को तैयार हैँ।
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स्मार्ट सिटी का भी नहीं रखा गया है ध्यान
हैंडपंप रिबोर का ठेका अधिक रेट पर छोड़ते समय निगम प्रशासन ने स्मार्ट सिटी के उस बिंदु पर भी ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण स्मार्ट सिटी की पहली सूची से मेरठ बाहर हो गया था। यानी जलकल विभाग ने स्मार्ट सिटी टीम के सामने प्रस्तुत किए गए आंकड़ों में आय कम और व्यय अधिक दर्शाया था। स्मार्ट सिटी पाने के लिए नगर निगम प्रशासन को यह बिंदु नसीहत से कम नहीं है। उसके बाद भी नगर निगम प्रशासन ने हैंडपंप रिबोर पर खर्च घटाने की बजाय बढ़ा दिया है। जिसका असर स्मार्ट सिटी पर फिर से पड़ सकता है। यानी शहर की मंशा पर एक बार फिर पानी फिर सकता है।
जोड़-तोड़ में ही गुजरे दो माह
अप्रैल और मई माह निगम अफसरों ने हैंडपंपों रिबोर की टेंडर प्रक्रिया की जोड़तोड़ में ही गुजार दिए। शहर में 15 सौ हैंडपंप रिबोर होना यह बताने के लिए काफी है कि जलकल विभाग किस गति से काम कर रहा है। अब कब हैंडपंप रिबोर होंगे और लोगों का कुछ भला होगा या नहीं, यह तो अलग बात है। लेकिन निगम में तो भ्रष्टाचार का रिबोर हो ही चुका है।