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पशुओं को चुराने वाले गिरोह का नया कारनामा, 15 दिन में तड़पकर मर जाते हैं पशु

Wed, 22 Feb 2017 12:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Wed, 22 Feb 2017 12:42 PM IST
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niddle gang became problem for cattle keepar
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पशुओं को चोरी करने के साथ ही मारने के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। पहले जहां जहरखुरानी गिरोह से पशुओं को खतरा रहता था, तो अब सुई गिरोह सक्रिय हो गया है। इस गिरोह ने पशु पालकों को पशु को बेचने के लिए मजबूर हो जाने के लिए नई तकनीक निकाली है। यही नहीं यदि पशु मर भी जाता है, तब भी इस गिरोह का पुराना काम बरकरार रहता है। बड़ी बात ये है कि इस हरकत पर किसी को शक भी नहीं होता है।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला मामला
आजकल पशु अज्ञात बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसमें पशु चिकित्सक के लिए पशु की बीमारी का पता लगाना मुश्किल होता है। धीरे धीरे पशु बीमार होकर सूखने लगता है और मर जाता है। बहुत कम मामलों में जैसे किसी ने अपने पशु का बीमा कराया है तो वह उसका पोस्टमार्टम कराता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पशु की मौत का कारण सुई जैसी बारीक नुकीली लोहे की चीज पेट में जाने से होना पाया गया।
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धीरे-धीरे बीमार होकर होती है मौत
लगातार सुई या नुकीली बारीक चीजों से पशु की मौत के पिछले छह माह में कई मामले आ चुके हैं। इसके बाद इस गिरोह की तरफ संदेह पैदा हुआ। कुछ ग्रामीणों के अनुसार यह गिरोह पशुओं को आटे की लोई में सुई दबाकर उसे खिला देता है। पशु चिकित्सकों के अनुसार सुई पेट में जाने पर पशु की एक दम मौत नहीं होती है। वह दो तीन दिन बाद बेचैन होना शुरू होता है और चारा खाना कम करते करते बंद कर देता है। खरखौदा, माछरा, परीक्षितगढ़, रजपुरा और मेरठ ब्लॉक के कई पशु चिकित्सकों ने बताया कि इस तरह के बीमार पशु अक्सर आ रहे हैं। इनकी बीमारी का काफी प्रयास के बाद भी पता नहीं चल पाता है और पशु 10 से 20 दिन के भीतर दम तोड़ देता है।
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कई मामले आ चुके हैं सामने
परीक्षितगढ़ के पशु चिकित्सा प्रभारी डॉ. हयात वारिस सैफी के अनुसार बहुत कम पशुओं के पोस्टमार्टम होते हैं। पिछले छह माह के दौरान करीब चार-पांच मामले ऐसे आ चुके हैं, जिसमें पोस्टमार्टम के बाद पाया गया कि पशु के पेट में लोहे की सुई या बहुत बारीक तार पाया गया। डॉ. सैफी के अनुसार पशु चारा खाते हुए जुगाली करता है और ऐसे में यदि कोई लोहे का बोल्ट, कंकर, मोटी कील आदि मुंह में आ जाती है तो वह उसे बाहर निकाल देता है। लेकिन सुई या तार का छोटा टुकड़ा इतना बारीक होता है कि पशु उसे निगल लेता है। यही तार या सुई उसकी मौत का कारण बन जाता है।

सुई देने के पीछे गहरी साजिश
जहरखुरानी गिरोह पशु के चमड़े और अन्य अवशेष के लिए पशुओं को मारता था। क्योंकि मृत पशु का मांस बहुत जल्दी सड़ जाता है और वह बिकता नहीं है। लेकिन इस गिरोह की पशुओं को सुई देने के पीछे गहरी साजिश है। यह गिरोह जिस पशु को सुई देता है, फिर उसके सदस्य उस पर नजर रखते हैं। जब पशु बीमार होता है तो उक्त गिरोह के लोग पशु मालिक से पशु खरीदने के लिए ग्राहक बनकर संपर्क साधते हैं। बीमार पशु को मालिक सस्ते दामों पर बेचने को तैयार हो जाता है और गिरोह के लोग बीमार पशु को खरीदकर उसे कमेले में ले जाकर काट देते हैं। इससे उन्हें दोगुना लाभ मिलता है। यदि पशु मालिक पशु नहीं बेचता है और कुछ दिन बाद मर जाता है तो यह गिरोह मुर्दा मवेशी के ठेकेदार के माध्यम से पशु को चमड़ा आदि के लिए लेते हैं।


संदेह या बीमा पर ही पोस्टमार्टम
जनपद में कुल पशुओं की संख्या में लगभग 10 प्रतिशत पशुओं का ही बीमा होता है। यह बीमा भी सिर्फ वही कराते हैं जो सरकारी योजना के तहत पशु पालन पर ऋण लेते हैं। ऐसे पशुओं की मृत्यु होने पर क्लेम लेने के लिए उनका पोस्टमार्टम कराना जरूरी होता है। जबकि कुछ ऐसे भी मामलों में पोस्टमार्टम होता है, जिसमें पशु पालक के अपने पशु की मृत्यु के कारण पर शक होता है।

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