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Meerut News: धराली आपदा पर एनजीटी का बड़ा फैसला, कहा- पूरे गंगा फ्लड प्लान की दाेबारा हो समीक्षा
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मेरठ। उत्तरकाशी के धराली में पांच अगस्त को बादल फटने से आई भीषण आपदा के बाद अब इस मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रियंक भारती बनाम भारत संघ एवं अन्य वाद में एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को गंगा फ्लड प्लान के पूरे सीमांकन कार्य की दोबारा समीक्षा और पुनर्निर्धारण करने का आदेश दिया है।
मेरठ निवासी प्रियंक भारती की याचिका पर एनजीटी ने कहा कि हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा नदी के बाढ़ मैदान का जो सीमांकन किया गया था वह गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश 2016 के अनुरूप नहीं है। मुख्य सचिव और सचिव सिंचाई विभाग ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया कि सीमांकन 1:5 और 1:25 बाढ़ आवृत्ति पर आधारित था जबकि इसे 1:100 वर्ष के उच्चतम बाढ़ स्तर और 1 मीटर कंटूर लाइन के आधार पर किया जाना अनिवार्य था। एनजीटी ने संबंधित प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस पर पुनर्विचार करें और 2016 के आदेश में दिए गए प्रावधान के अनुसार सीमांकन करें जिसमें वैधानिक बल और इस संबंध में न्यायाधिकरण के निर्देश भी शामिल हैं।
उन्नाव से बलिया तक भी सवालों के घेरे में
राज्य सरकार ने बताया कि उन्नाव से बलिया तक सीमांकन 1:100 बाढ़ आवृत्ति पर आधारित है लेकिन हलफनामे में 1 मीटर कंटूर लाइन का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। एनजीटी ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा अगली रिपोर्ट में 1 मीटर कंटूर आधारित सीमांकन का पूरा विवरण अनिवार्य रूप से दिया जाए। फेज-2 का भौतिक सीमांकन 31 मार्च 2026 तक पूरा किया जाए।
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मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश ने बुलाई थी उच्चस्तरीय बैठक
धराली प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव ने छह नवंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक की। हलफनामे में कहा गया है कि नदी की भूमि से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी जिला गंगा समितियों की है। राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया कि रिवर बेड किसी भी कानून के तहत आवंटित नहीं किया जा सकता। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में बूढ़ी गंगा सहित 20 नदियों का फ्लड प्लेन निर्धारण प्रक्रिया में है।
याचिकाकर्ता प्रियंक भारती को 3 सप्ताह का समय
ट्रिब्यूनल ने प्रियंक भारती को प्रतिवादियों के जवाब पर अपना रिजॉइंडर दाखिल करने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया है। प्रियंक भारती ने एनजीटी को बताया यदि नदियों और उनके फ्लड प्लेन में अतिक्रमण न होते तो धराली जैसे हादसे इतनी भीषणता न लेते। प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल के आदेशों की निरंतर अवहेलना हो रही है। कई नदियां और फ्लड प्लेन आज अतिक्रमण से पूरी तरह ग्रसित हैं।
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मेरठ निवासी प्रियंक भारती की याचिका पर एनजीटी ने कहा कि हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा नदी के बाढ़ मैदान का जो सीमांकन किया गया था वह गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश 2016 के अनुरूप नहीं है। मुख्य सचिव और सचिव सिंचाई विभाग ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया कि सीमांकन 1:5 और 1:25 बाढ़ आवृत्ति पर आधारित था जबकि इसे 1:100 वर्ष के उच्चतम बाढ़ स्तर और 1 मीटर कंटूर लाइन के आधार पर किया जाना अनिवार्य था। एनजीटी ने संबंधित प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस पर पुनर्विचार करें और 2016 के आदेश में दिए गए प्रावधान के अनुसार सीमांकन करें जिसमें वैधानिक बल और इस संबंध में न्यायाधिकरण के निर्देश भी शामिल हैं।
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उन्नाव से बलिया तक भी सवालों के घेरे में
राज्य सरकार ने बताया कि उन्नाव से बलिया तक सीमांकन 1:100 बाढ़ आवृत्ति पर आधारित है लेकिन हलफनामे में 1 मीटर कंटूर लाइन का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। एनजीटी ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा अगली रिपोर्ट में 1 मीटर कंटूर आधारित सीमांकन का पूरा विवरण अनिवार्य रूप से दिया जाए। फेज-2 का भौतिक सीमांकन 31 मार्च 2026 तक पूरा किया जाए।
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मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश ने बुलाई थी उच्चस्तरीय बैठक
धराली प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव ने छह नवंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक की। हलफनामे में कहा गया है कि नदी की भूमि से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी जिला गंगा समितियों की है। राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया कि रिवर बेड किसी भी कानून के तहत आवंटित नहीं किया जा सकता। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में बूढ़ी गंगा सहित 20 नदियों का फ्लड प्लेन निर्धारण प्रक्रिया में है।
याचिकाकर्ता प्रियंक भारती को 3 सप्ताह का समय
ट्रिब्यूनल ने प्रियंक भारती को प्रतिवादियों के जवाब पर अपना रिजॉइंडर दाखिल करने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया है। प्रियंक भारती ने एनजीटी को बताया यदि नदियों और उनके फ्लड प्लेन में अतिक्रमण न होते तो धराली जैसे हादसे इतनी भीषणता न लेते। प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल के आदेशों की निरंतर अवहेलना हो रही है। कई नदियां और फ्लड प्लेन आज अतिक्रमण से पूरी तरह ग्रसित हैं।