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तकनीकी युग में रोजगार के नए द्वार खुले हैं: डॉ. संदीप कुमार
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। आरजी पीजी कॉलेज में मंगलवार को संस्कृत साहित्य में बौद्धिक संपदा और रोजगार के अवसरों पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान प्राचार्य प्रो. निवेदिता मलिक के मार्गदर्शन में हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. संदीप कुमार ने कहा कि संस्कृत केवल कर्मकांड की भाषा नहीं है बल्कि इसमें कंप्यूटर और तकनीकी को जोड़कर नवीन रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. उपासना सिंह ने किया। डॉ. बबीता मांझी और अन्य शिक्षकों का योगदान रहा।
भारतीय संगीत में भावों का महत्व बताया
मेरठ। आरजी पीजी कॉलेज में मंगलवार को संगीत विभाग और संगीत समाज म्यूजिक कॉलेज के बीच समझौता ज्ञापन के तहत कार्यक्रम किया गया। इसमें भारतीय संगीत के प्रस्तुतीकरण में भावों का महत्व बताया गया। संगीत विभाग की अध्यक्ष डॉ. किरन शर्मा ने राग और भाव के संबंध को बताया। संगीत समाज म्यूजिक कॉलेज की प्रिंसिपल रुचिका सिंह ने बताया कि संगीत हृदय के भावों को प्रकट करने का प्रभावशाली साधन है। उन्होंने कहा कि कलाकार राग और ताल के माध्यम से आनंद, विरह, वीर या शांत रस जैसे भावों को श्रोताओं तक पहुंचाता है। नृत्य शिक्षक रूपम शर्मा ने भरतनाट्यम में अभिनय और मुद्राओं से भावों की अभिव्यक्ति समझाई।
कार्यक्रम में भूमिका सिवाच और यादवी ने भरतनाट्यम और कथक की प्रस्तुति दी। संयोजिका डॉ. स्वाति शर्मा ने बताया कि भावपूर्ण प्रस्तुति ही श्रोता को कलाकार से जोड़ती है। तबला संगतकार हेमंत शुक्ला ने छात्राओं को भाव और रस के अनुसार तालों के उचित प्रयोग के बारे में बताया। छात्राओं ने विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। डॉ. स्वाति शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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मेरठ। आरजी पीजी कॉलेज में मंगलवार को संस्कृत साहित्य में बौद्धिक संपदा और रोजगार के अवसरों पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान प्राचार्य प्रो. निवेदिता मलिक के मार्गदर्शन में हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. संदीप कुमार ने कहा कि संस्कृत केवल कर्मकांड की भाषा नहीं है बल्कि इसमें कंप्यूटर और तकनीकी को जोड़कर नवीन रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. उपासना सिंह ने किया। डॉ. बबीता मांझी और अन्य शिक्षकों का योगदान रहा।
भारतीय संगीत में भावों का महत्व बताया
मेरठ। आरजी पीजी कॉलेज में मंगलवार को संगीत विभाग और संगीत समाज म्यूजिक कॉलेज के बीच समझौता ज्ञापन के तहत कार्यक्रम किया गया। इसमें भारतीय संगीत के प्रस्तुतीकरण में भावों का महत्व बताया गया। संगीत विभाग की अध्यक्ष डॉ. किरन शर्मा ने राग और भाव के संबंध को बताया। संगीत समाज म्यूजिक कॉलेज की प्रिंसिपल रुचिका सिंह ने बताया कि संगीत हृदय के भावों को प्रकट करने का प्रभावशाली साधन है। उन्होंने कहा कि कलाकार राग और ताल के माध्यम से आनंद, विरह, वीर या शांत रस जैसे भावों को श्रोताओं तक पहुंचाता है। नृत्य शिक्षक रूपम शर्मा ने भरतनाट्यम में अभिनय और मुद्राओं से भावों की अभिव्यक्ति समझाई।
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कार्यक्रम में भूमिका सिवाच और यादवी ने भरतनाट्यम और कथक की प्रस्तुति दी। संयोजिका डॉ. स्वाति शर्मा ने बताया कि भावपूर्ण प्रस्तुति ही श्रोता को कलाकार से जोड़ती है। तबला संगतकार हेमंत शुक्ला ने छात्राओं को भाव और रस के अनुसार तालों के उचित प्रयोग के बारे में बताया। छात्राओं ने विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। डॉ. स्वाति शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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