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न बस, न थ्री व्हीलर : गांव की डगर, मुश्किल सफर
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परिवहन की व्यवस्था न होने के कारण बिजनौर के ग्राम गंगदासपुर से साईकिल से आते ग्रामीण।
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- फतेहपुर-बिजनाैर मार्ग टूटने से बसों, टेंपो का संचालन हुआ बंद
- बरूकी से फतनपुर असल, नयागांव, निजामपुर आदि गांवों की भी यही दशा
- 559 बिजनौर तहसील गांव
- 333 आबाद गांव बिजनौर तहसील के
- 226 गैर आबाद गांव बिजनौर तहसील के
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। किसी गांव या शहर के विकास का बड़ा माध्यम सड़क व यातायात व्यवस्था है। सड़क अच्छी है, तो गांवों की शहर से दूरी कम लगती है। बिजनौर तहसील के 559 आबाद, गैर आबाद गांवों में सौ से ज्यादा गांव में यातायात की अच्छी व्यवस्था नहीं है, वहां की सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। इन गांवों के ग्रामीण शहर आने जाने के लिए निजी वाहनों से या पैदल ही सफर करते हैं। क्योंकि इन गांवों को बसों, प्राइवेट वाहन टेंपो, जीप आदि का संचालन नहीं होता है।
जिला मुख्यालय से फतेहपुर, उलेढ़ा वाया गंगदासपुर, गंज मार्ग से सिकंदरपुर, बरूकी से फतेहपुर असल, नया गांव, निजामपुरा फतनपुर आदि के लिए यातायात का माध्यम निजी वाहन ही है। बिजनौर से छोइयां नगली, फतेहपुर मार्ग पर पहले टेंपुओं का संचालन होता था, लेकिन मार्ग क्षतिग्रस्त होने से टेंपो आदि का संचालन बंद हो गए। इन गांवों के ग्रामीण निजी वाहन व ई-रिक्शा को बुलाकर ही सफर करते हैं। ग्राम फतेहपुर असल निवासी संदीप त्यागी का कहना है कि उनके गांव व आसपास के कई गांवों में यातायात का कोई साधन नहीं है। यहां के ग्रामीण बरूकी तक निजी वाहनों से ही पहुंचते हैं।
- ग्राम गंगदासपुर निवासी चौधरी शूरवीर सिंह ने कहा कि पहले गांवों तक घोड़ा तांगे, टेंपो, रिक्शा चलतीं थीं। सड़क बदहाल होने से उनका संचालन बंद हो गया।
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- गांव निवासी मोनू सिंह ने कहा कि सड़कें टूटी होने के कारण उनके गांव के लिए यातायात व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों को शहर आने जाने के लिए अपने वाहनों का ही सहारा लेना पड़ता है।
- जुड्डी निवासी गुड्डू सिंह का कहना है कि इन गांव से शहर आने जाने के लिए टेंपो, जीप आदि वाहनों का संचालन हो जाए, तो शहर आने जाने का सफल आसान हो जाएगा।
- वर्जन : तहसील मुख्यालय से उन सभी गांवों को परिवहन से जोड़ा गया है, जहां बसों का संचालन हो सकता है। कुछ सर्वे में बसों के संचालन के सही नहीं पाए गए हैं।
-धीरज सिंह पंवार, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक बिजनौर ।
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- बरूकी से फतनपुर असल, नयागांव, निजामपुर आदि गांवों की भी यही दशा
- 559 बिजनौर तहसील गांव
- 333 आबाद गांव बिजनौर तहसील के
- 226 गैर आबाद गांव बिजनौर तहसील के
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। किसी गांव या शहर के विकास का बड़ा माध्यम सड़क व यातायात व्यवस्था है। सड़क अच्छी है, तो गांवों की शहर से दूरी कम लगती है। बिजनौर तहसील के 559 आबाद, गैर आबाद गांवों में सौ से ज्यादा गांव में यातायात की अच्छी व्यवस्था नहीं है, वहां की सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। इन गांवों के ग्रामीण शहर आने जाने के लिए निजी वाहनों से या पैदल ही सफर करते हैं। क्योंकि इन गांवों को बसों, प्राइवेट वाहन टेंपो, जीप आदि का संचालन नहीं होता है।
जिला मुख्यालय से फतेहपुर, उलेढ़ा वाया गंगदासपुर, गंज मार्ग से सिकंदरपुर, बरूकी से फतेहपुर असल, नया गांव, निजामपुरा फतनपुर आदि के लिए यातायात का माध्यम निजी वाहन ही है। बिजनौर से छोइयां नगली, फतेहपुर मार्ग पर पहले टेंपुओं का संचालन होता था, लेकिन मार्ग क्षतिग्रस्त होने से टेंपो आदि का संचालन बंद हो गए। इन गांवों के ग्रामीण निजी वाहन व ई-रिक्शा को बुलाकर ही सफर करते हैं। ग्राम फतेहपुर असल निवासी संदीप त्यागी का कहना है कि उनके गांव व आसपास के कई गांवों में यातायात का कोई साधन नहीं है। यहां के ग्रामीण बरूकी तक निजी वाहनों से ही पहुंचते हैं।
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- ग्राम गंगदासपुर निवासी चौधरी शूरवीर सिंह ने कहा कि पहले गांवों तक घोड़ा तांगे, टेंपो, रिक्शा चलतीं थीं। सड़क बदहाल होने से उनका संचालन बंद हो गया।
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- गांव निवासी मोनू सिंह ने कहा कि सड़कें टूटी होने के कारण उनके गांव के लिए यातायात व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों को शहर आने जाने के लिए अपने वाहनों का ही सहारा लेना पड़ता है।
- जुड्डी निवासी गुड्डू सिंह का कहना है कि इन गांव से शहर आने जाने के लिए टेंपो, जीप आदि वाहनों का संचालन हो जाए, तो शहर आने जाने का सफल आसान हो जाएगा।
- वर्जन : तहसील मुख्यालय से उन सभी गांवों को परिवहन से जोड़ा गया है, जहां बसों का संचालन हो सकता है। कुछ सर्वे में बसों के संचालन के सही नहीं पाए गए हैं।
-धीरज सिंह पंवार, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक बिजनौर ।