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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Navratri 2022: first Navratri tomorrow, Sanjhi will be seated in homes Today

Navratri 2022: आज घरों में विराजेंगी सांझी, कल पहला नवरात्र, जमकर हुई रेडीमेड सांझी की खरीदारी

Sat, 24 Sep 2022 05:53 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 24 Sep 2022 05:53 PM IST
सार

Navratri 2022: पितृ विसर्जन अमावस्या पर देवी स्वरुपा सांझी का घरों में आज से मां दुर्गा का पदार्पण होगा। आकर्षक रंगों से सजी रेडीमेड सांझी की महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। कल पहले नवरात्र को मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाएगी।

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Navratri 2022: first Navratri tomorrow, Sanjhi will be seated in homes Today
नवरात्र 2022 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सांझी ले लो सांझी...यह आवाज कई दिनों से गली मोहल्लों में गूंज रही है। दुकानों पर आकर्षक रंगों से सजी रेडीमेड सांझी की महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। पितृ विसर्जन अमावस्या पर देवी स्वरुपा सांझी का घरों में आज मंगलकारी सांझी का पदार्पण होगा। सोमवार से पहला नवरात्र है।

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श्राद्ध के बाद परंपरागत सांझी पर्व का अनूठा महत्व है। रविवार को श्राद्ध के बाद अमावस्या पर पूजा-अर्चना के घरों में मंगलकारी सांझी का पदार्पण होगा। इसके साथ शुभ कार्यों की शुरूआत होगी। महिलाएं और युवतियां तैयारी में जुटी हैं। अब रेडीमेड सांझी खरीदकर सजाने में दिलचस्पी लेती हैं।
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इसके विपरीत दूधली, कुटेसरा, बिरालसी, लुहारी खुर्द और कस्बे में कुछ महिलाएं आज भी उत्साहपूर्वक सांझी बनाती है। गृहणी बबीता, अंजना, कविता और मंजू आदि का कहना है सोशलसाइटों ने सांझी के वैभव को पहले से कम किया है।
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घर में सांझी बनाने की जिद करते हैं बच्चे
अंशिका, कासवी, भव्या, सलोनी, पलक, पारिसा आदि बच्चे मम्मी से घर पर सांझी बनाने की जिद करते हैं। सांझी के साथ सजाने के लिए टिकड़ी, तोते, सांझी का भाई, बाजे वाला, मोर, बामनी आदि बनाने के लिए कई दिन पहले तैयारियां शुरू हो जाती थी हैं। गांव में हस्त निर्मित सांझी को किशोरियों के लिए कला सीखने की पहली सीढ़ी मानी जाती थी।

रेडीमेड सांझी की खूब हो रही बिक्री
घिस्सुखेड़ा गांव के दिनेश प्रजापति आसपास गांव और कस्बे में रेडीमेड सांझी बेचने के लिए सुबह मोपेड पर निकल जाते है। कहते है 60 से 100 रुपये तक सांझी बेच रहे है। हकीमपुरा रोड़ पर चाक चलाने वाले विनोद प्रजापति का कहना है कि मिट्टी की किल्लत और मौसम गड़बड़ाने से बाजार से खरीदकर ही सांझी बेची है। दुकानदार आलोक कुमार कहते है कि परंपरा में बदलाव के कारण ज्यादातर महिलाएं बाजार से सांझी खरीदकर घरों में सजाने लगी है। 

सांझी की आरती से घर-आंगन में गूंजेगी भक्ति धारा
आरता री आरता...सांझी माई आरता...दियों की टिमटिमाती थालियां लेकर घरों में बालिकाएं आरती करने पहुंचती है। सांझ ढलने पर घरों में लड़कियों की टोलियां घरों से निकलती है। घर देवी मां की भक्ति में लीन हो जाता है। किशोरियों और बच्चों को इन दिनों का बेसब्री से इंतजार रहता हैं।

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