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मेरठ को मिला सबसे ज्यादा 2753 करोड़ का टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jan 2017 12:35 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर के मेरठ कार्यालय को सिगरेट के उत्पादन पर सबसे ज्यादा उत्पाद शुल्क मिल रहा है। कार्यालय की तरफ से सालाना वसूल की जाने वाले एक्साइज ड्यूटी में अकेले सिगरेट की हिस्सेदारी करीब 85 फीसदी है। सिगरेट के बाद शुगर मिल का नंबर आता है। जबकि तीसरे नंबर पर पेपर मिल और चौथे नंबर पर आयरन स्टील है। बीते सालों के दौरान जहां सिगरेट से मिलने वाला उत्पादन शुल्क बढ़ा है, तो वहीं आयरन स्टील से घट गया है। क्योंकि मेरठ और सहारनपुर क्षेत्र में करीब 13 आयरन स्टील फैक्ट्री बंद हो गई हैं।
चालू वित्तीय वर्ष में मेरठ कार्यालय को एक्साइज ड्यूटी वसूली के लिए 3944 करोड़ रुपये का टारगेट मिला है, जबकि सर्विस टैक्स का 395 करोड़ रुपये। ऐसे में दिसंबर तक कार्यालय 3202 करोड़ रुपया एक्साइज ड्यूटी के तौर पर वसूल चुका है, जिसमें अकेले 2753 करोड़ रुपये सिगरेट से आया है, जो सहारनपुर स्थित आईटीसी की यूनिट द्वारा सिगरेट उत्पादन करने पर दिया गया है।
सेंट्रल एक्साइज के एडिशनल कमिश्नर राकेश गुप्ता का कहना है कि सिगरेट व तंबाकू उत्पाद पर सबसे ज्यादा टैक्स है। सिगरेट की वास्तविक कीमत पर 80 फीसदी से अधिक टैक्स लगता है। गौरतलब है कि बीते वित्तीय वर्ष कार्यालय से उत्पादन शुल्क 3799 करोड़ और सर्विस टैक्स 357 करोड़ वसूला गया था। इससे साफ है कि सिगरेट से मिलने वाला उत्पाद शुल्क लगातार बढ़ता जा रहा है।
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चालू वित्तीय वर्ष में मेरठ कार्यालय को एक्साइज ड्यूटी वसूली के लिए 3944 करोड़ रुपये का टारगेट मिला है, जबकि सर्विस टैक्स का 395 करोड़ रुपये। ऐसे में दिसंबर तक कार्यालय 3202 करोड़ रुपया एक्साइज ड्यूटी के तौर पर वसूल चुका है, जिसमें अकेले 2753 करोड़ रुपये सिगरेट से आया है, जो सहारनपुर स्थित आईटीसी की यूनिट द्वारा सिगरेट उत्पादन करने पर दिया गया है।
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सेंट्रल एक्साइज के एडिशनल कमिश्नर राकेश गुप्ता का कहना है कि सिगरेट व तंबाकू उत्पाद पर सबसे ज्यादा टैक्स है। सिगरेट की वास्तविक कीमत पर 80 फीसदी से अधिक टैक्स लगता है। गौरतलब है कि बीते वित्तीय वर्ष कार्यालय से उत्पादन शुल्क 3799 करोड़ और सर्विस टैक्स 357 करोड़ वसूला गया था। इससे साफ है कि सिगरेट से मिलने वाला उत्पाद शुल्क लगातार बढ़ता जा रहा है।
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