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राष्ट्रीय बालिका दिवस: बेटियों की काबिलियत ने बदली परिवार और समाज की सोच, हर क्षेत्र में जीतने का है जज्बा

Tue, 24 Jan 2023 12:09 PM IST
Dimple Sirohi पूजा राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
पूजा राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 24 Jan 2023 12:09 PM IST
सार

बेटियां अब कमजोर नहीं हैं बल्कि अपनी काबिलियत से वे परिवार और समाज का नाम ऊंचा कर रही हैं। बेटियों की काबिलियत के चलते आज परिवार के साथ ही समाज की सोच भी उनके प्रति बदल गई है। 

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National Girl Child Day: ability of daughters has changed the thinking of family and society
मां के साथ अंकिता अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अब बेटियां बोझ नहीं हैं। वे असहाय नहीं हैं। बेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां पर वे दुनिया जीतने का जज्बा नहीं रखती हों। अपने यहां की बेटियां आज तमाम क्षेत्रों में परिवार ही नहीं बल्कि पूरे मेरठ का नाम रोशन कर रही हैं। बेटियों की इस काबिलियत के चलते आज परिवार के साथ ही समाज की सोच भी उनके प्रति बदल गई है। 

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बेटी ने अकेली मां को समाज में दिलाई पहचान 
जागृति विहार निवासी अंकिता अग्रवाल अकेली मां हैं। इकलौती बेटी रुद्राक्षी अग्रवाल ने मां की परवरिश को समाज में पहचान दिलाई है। राधा गोविंद स्कूल की छात्रा रुद्राक्षी हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं। स्कूल में सभी विषयों के शिक्षकों द्वारा उनकी उपलब्धियां गिनाई जाती हैं। चित्रकला, नृत्य, खेल, पर्यावरण, आईटी आदि क्षेत्रों में मेडल जीतकर मां और स्कूल को गौरवांवित किया है। 

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बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया 
चाणक्पुयरी निवासी डाॅ. रितु केला अपनी दो बेटियां वेदांशी और रिद्धिमा के साथ खुद को पूरा मानती हैं। वह बताती हैं कि दोनों बेटियों के साथ बेटे की कमी कभी महसूस नहीं हुई। मैंने बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया। बड़ी बेटी वेदांशी ने पहली नौकरी से पैसे जोड़कर यूरोप की ट्रिप प्लान की है, बुधवार को रवाना होंगे। 

जागृति विहार निवासी 10 साल की ईहा दीक्षित आज सभी के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। चार साल की उम्र में पौधरोपण के जुनून के चलते 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। पीएम मोदी भी ईहा के कार्य की सराहना कर चुके हैं। 
 

कम उम्र में घर को संभाल रही हैं विदुषी 
लालकुर्ती निवासी विदुषी प्रधान ने 22 वर्ष की उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियां संभाल ली। साल 2022 में पिता का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। घर की आर्थिक स्थिति खराब होती गई। उस वक्त वे मेरठ कॉलेज में बीकॉम अंतिम वर्ष में थीं। 

मेरठ की बेटी कर्तव्य पथ पर करेगी कदमताल 
गंगानगर निवासी एनसीसी कैडेट पूजा अहलावत 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर कदमताल करती नजर आएंगी। वे 71 यूपी बटालियन एनसीसी वाहिनी में अंडर ऑफिसर हैं और आर्मी पब्लिक स्कूल में कक्षा 12वीं की छात्रा हैं। 

गोला फेंक में विधि का नहीं कोई तोड़ 
हसनपुर रजापुर गांव की विधि चौधरी का गोला फेंक में कोई तोड़ नहीं है। पिछले चार साल में उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। राष्ट्रीय स्तर पर दो स्वर्ण, एक रजत व एक कांस्य पदक अपने नाम कर चुकी हैं। 
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