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बसपा कार्यकर्ताओं का हंगामा, खिसके नसीमुद्दीन
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sun, 10 Apr 2016 02:18 AM IST
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सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं से बात करते नसीमुद्दीन सिद्दीकी।
- फोटो : अमर उजाला
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बसपा के वेस्ट यूपी प्रभारी नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सामने पार्टी कार्यकर्ताओं ने शनिवार को सर्किट हाउस में जमकर हंगामा किया। जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव पर पार्टी कार्यकर्ताओं को ‘हनी ट्रैप’ में फंसाने के आरोप लगाए। हंगामा बढ़ने पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी को वहां से जाना पड़ा। उधर, देर रात आरोप लगाने वाले कार्यकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
रविवार को बागपत में होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन में शिरकत करने के लिए नसीमुद्दीन सिद्दीकी शनिवार को ही मेरठ सर्किट हाउस पर पहुंच गए थे।
शाम के समय वह पार्टी पदाधिकारियों से वार्ता कर रहे थे। इसी बीच हंगामा शुरू हो गया। पचगांव के कार्यकर्ता सरदार जगदेव सिंह के साथ महिलाओं ने जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप लगाया कि अश्वनी ने कार्यकर्ताओं को हनी ट्रैप यानी महिलाओं के जाल में फंसाना शुरू कर दिया है। अपने कारनामे दबाने के लिए वह ऐसा कर रहे हैं। जगदेव के मुताबिक दो दिन पूर्व अश्वनी ने फोन कर उन्हें कालिया गढ़ी बुलवाया था।
वहां अपने साथियों से पिटवाया और एक महिला से झूठा आरोप लगवाकर मेडिकल पुलिस से पकड़वा दिया। नसीमुद्दीन ने उनसे सुबह एक दरख्वास्त लिखकर देने की बात कही। आश्वासन दिया कि बसपा सुप्रीमो से वह वार्ता करेंगे। इस पर कार्यकर्ता उनसे तत्काल सीधा निर्णय लेने की जिद पर अड़ गए। आनकानी पर हंगामा बढ़ गया। इस पर नसीमुद्दीन यहां से सीधे याकूब कु रैशी के यहां चले गए। माना जा रहा है कि आज होने वाले सम्मेलन में बागपत से अहमद हमीद के साथ ही सरधना सीट के लिए इमरान के नाम की भी घोषणा की जा सकती है।
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तीन अप्रैल को मेरी बेटी की शादी थी। वहां अश्वनी ने नशे में महिलाओं से अभद्रता की। मैने इसका विरोध किया। साथ ही पार्टी आलाकमान को अवगत कराने की बात कही। इस पर पहले तो अश्वनी ने मान मनोव्वल कर लिया और बाद में मुझे ही साजिश के तहत फंसा दिया। इसके विरोध में बसपा सुप्रीमो तक आवाज उठाई जाएगी। - सरदार जगदेव बसपा कार्यकर्ता
मेरे खिलाफ साजिश हो रही है। मेरा किसी मामले से कोई लेना देना नहीं है। मैने किसी के साथ अभद्रता नहीं की। मैं पार्टी में गंभीरता से सक्रिय हूं। पार्टी आलाकमान मुझे में विश्वास बनाए है, यही बात कुछ लोगों को हजम नहीं हो रही है- अश्वनी जाटव जिलाध्यक्ष बसपा
वेस्ट यूपी में बसपाइयों में फूट
मेरठ। चुनाव से पहले वेस्ट यूपी में बसपाइयों में फूट शुरू हो गई है। कोर्डिनेटरों और जिलाध्यक्षों में आपसी समन्वय न होने से रार बढ़ रही है। मेरठ से जुड़े दो कोर्डिनेटर बलात्कार के आरोपी के यहां होली मिलन समारोह में गए थे। इस पर पार्टी आलाकमान खफा है। दोनों को बुलाकर फटकार लगाई गई है। उधर हटाए गए कुछ कोर्डिनेटर अपने हिसाब से राजनीतिक गोटियां बिछा रहे हैं। वेस्ट यूपी में बसपा की राजनीति गरमा रही है।
हैरत की बात यह है कि पार्टी थिंक टैंक का फोकस वेस्ट यूपी पर है, लेकिन यहां स्थिति सही होने के बजाय और बिगड़ रही है। कई कोर्डिनेटराें को हटाया गया। चर्चा है कि केवल गुटबाजी के कारण ही ऐसा हुआ है। पार्टी में धड़े बन गए हैं। सर्किट हाउस में आरोप प्रत्यारोप ने नई बहस छेड़ दी है। पार्टी आलाकमान से कुछ कार्यकर्ता जिला कार्यालय पर संदिग्ध गतिविधि होने की शिकायत करने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि जिला कार्यालय पर हालत खराब है। कार्यकर्ता पार्टी में अनुशासन पूरी तरह से ध्वस्त होने का आरोप लगा रहे हैं।
शिकायत का मतलब गाज गिरना
पार्टी कार्यकर्ताओं में यह बात घर करती जा रही है कि बसपा में विरोध करेंगे तो सुनी नहीं जाएगी। उल्टा निष्कासन होगा या पद से हटाया जाएगा। छह सितंबर को अब्दुल्लापुर में आए नसीमुद्दीन का विरोध हो गया था। जनता उनकी गाड़ी के पीछे पत्थर लेकर दौड़ी थी। नतीजा, दो कोर्डिनेटरों को हटा दिया गया। सरधना तथा कैंट के तो उम्मीदवारों तक का निष्कासन कर दिया गया। उनकी गलती भी नहीं बताई गई।
उनकी जगह नए उम्मीदवार घोषित कर दिए गए। इस मामले में भी पार्टी ने यहीं रवैया अपनाया है। जिलाध्यक्ष के खिलाफ आवाज उठाने पर पार्टी ने जगदेव सिंह, अनिल प्रधान तथा अमल सिंह को निष्कासित कर दिया है। जिलाध्यक्ष के मुताबिक पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने और अनुशासनहीनता के चलते यह कार्रवाई की गई है।
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रविवार को बागपत में होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन में शिरकत करने के लिए नसीमुद्दीन सिद्दीकी शनिवार को ही मेरठ सर्किट हाउस पर पहुंच गए थे।
शाम के समय वह पार्टी पदाधिकारियों से वार्ता कर रहे थे। इसी बीच हंगामा शुरू हो गया। पचगांव के कार्यकर्ता सरदार जगदेव सिंह के साथ महिलाओं ने जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप लगाया कि अश्वनी ने कार्यकर्ताओं को हनी ट्रैप यानी महिलाओं के जाल में फंसाना शुरू कर दिया है। अपने कारनामे दबाने के लिए वह ऐसा कर रहे हैं। जगदेव के मुताबिक दो दिन पूर्व अश्वनी ने फोन कर उन्हें कालिया गढ़ी बुलवाया था।
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वहां अपने साथियों से पिटवाया और एक महिला से झूठा आरोप लगवाकर मेडिकल पुलिस से पकड़वा दिया। नसीमुद्दीन ने उनसे सुबह एक दरख्वास्त लिखकर देने की बात कही। आश्वासन दिया कि बसपा सुप्रीमो से वह वार्ता करेंगे। इस पर कार्यकर्ता उनसे तत्काल सीधा निर्णय लेने की जिद पर अड़ गए। आनकानी पर हंगामा बढ़ गया। इस पर नसीमुद्दीन यहां से सीधे याकूब कु रैशी के यहां चले गए। माना जा रहा है कि आज होने वाले सम्मेलन में बागपत से अहमद हमीद के साथ ही सरधना सीट के लिए इमरान के नाम की भी घोषणा की जा सकती है।
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तीन अप्रैल को मेरी बेटी की शादी थी। वहां अश्वनी ने नशे में महिलाओं से अभद्रता की। मैने इसका विरोध किया। साथ ही पार्टी आलाकमान को अवगत कराने की बात कही। इस पर पहले तो अश्वनी ने मान मनोव्वल कर लिया और बाद में मुझे ही साजिश के तहत फंसा दिया। इसके विरोध में बसपा सुप्रीमो तक आवाज उठाई जाएगी। - सरदार जगदेव बसपा कार्यकर्ता
मेरे खिलाफ साजिश हो रही है। मेरा किसी मामले से कोई लेना देना नहीं है। मैने किसी के साथ अभद्रता नहीं की। मैं पार्टी में गंभीरता से सक्रिय हूं। पार्टी आलाकमान मुझे में विश्वास बनाए है, यही बात कुछ लोगों को हजम नहीं हो रही है- अश्वनी जाटव जिलाध्यक्ष बसपा
वेस्ट यूपी में बसपाइयों में फूट
मेरठ। चुनाव से पहले वेस्ट यूपी में बसपाइयों में फूट शुरू हो गई है। कोर्डिनेटरों और जिलाध्यक्षों में आपसी समन्वय न होने से रार बढ़ रही है। मेरठ से जुड़े दो कोर्डिनेटर बलात्कार के आरोपी के यहां होली मिलन समारोह में गए थे। इस पर पार्टी आलाकमान खफा है। दोनों को बुलाकर फटकार लगाई गई है। उधर हटाए गए कुछ कोर्डिनेटर अपने हिसाब से राजनीतिक गोटियां बिछा रहे हैं। वेस्ट यूपी में बसपा की राजनीति गरमा रही है।
हैरत की बात यह है कि पार्टी थिंक टैंक का फोकस वेस्ट यूपी पर है, लेकिन यहां स्थिति सही होने के बजाय और बिगड़ रही है। कई कोर्डिनेटराें को हटाया गया। चर्चा है कि केवल गुटबाजी के कारण ही ऐसा हुआ है। पार्टी में धड़े बन गए हैं। सर्किट हाउस में आरोप प्रत्यारोप ने नई बहस छेड़ दी है। पार्टी आलाकमान से कुछ कार्यकर्ता जिला कार्यालय पर संदिग्ध गतिविधि होने की शिकायत करने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि जिला कार्यालय पर हालत खराब है। कार्यकर्ता पार्टी में अनुशासन पूरी तरह से ध्वस्त होने का आरोप लगा रहे हैं।
शिकायत का मतलब गाज गिरना
पार्टी कार्यकर्ताओं में यह बात घर करती जा रही है कि बसपा में विरोध करेंगे तो सुनी नहीं जाएगी। उल्टा निष्कासन होगा या पद से हटाया जाएगा। छह सितंबर को अब्दुल्लापुर में आए नसीमुद्दीन का विरोध हो गया था। जनता उनकी गाड़ी के पीछे पत्थर लेकर दौड़ी थी। नतीजा, दो कोर्डिनेटरों को हटा दिया गया। सरधना तथा कैंट के तो उम्मीदवारों तक का निष्कासन कर दिया गया। उनकी गलती भी नहीं बताई गई।
उनकी जगह नए उम्मीदवार घोषित कर दिए गए। इस मामले में भी पार्टी ने यहीं रवैया अपनाया है। जिलाध्यक्ष के खिलाफ आवाज उठाने पर पार्टी ने जगदेव सिंह, अनिल प्रधान तथा अमल सिंह को निष्कासित कर दिया है। जिलाध्यक्ष के मुताबिक पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने और अनुशासनहीनता के चलते यह कार्रवाई की गई है।