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भगवान गणेश और कार्तिकेय जन्म के प्रसंग सुनाए
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- दिल्ली रोड जगदीश मंडप में हुई शिव महापुराण कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दिल्ली रोड स्थित जगदीश मंडप में शिव महापुराण कथा हुई। इसमें कथा व्यास शीतल कृष्ण महाराज ने भगवान गणेश और कार्तिकेय जी के जन्म के प्रसंग सुनाए। कथा व्यास ने बताया कि माता पार्वती ने सुंदर बालक की रचना की और उसे जीवित कर अपना द्वारपाल नियुक्त कर दिया। जब भगवान शिव वहां पहुंचे तो बालक ने उन्हें रोक दिया।
कथा व्यास ने बताया कि भगवान शिव को बालक ने प्रवेश नहीं करने दिया। क्रोध में शिव ने उसका गला काट दिया। इसके बाद माता पार्वती दुखी हुई तो शिव जी ने अपने गणों को भेज किसी का भी सिर लाने के लिए कहा। गण हाथी का सिर लेकर आए और भगवान शिव ने उस बालक को जीवित कर दिया। तब विघ्नहर्ता गणेश का जन्म हुआ। उन्हें देवताओं ने बुद्धि, समृद्धि और प्रथम पूज्य का वरदान दिया। कथा में मुख्य यजमान तरुण गुप्ता और नीतू गुप्ता ने व्यासपीठ का पूजन किया गया।
कथा में लोग भगवान गणेश के जयकारे लगाते रहे। कथा व्यास ने बताया कि कार्तिकेय को स्कंद या मुरुगन भी कहा जाता है। भगवान कार्तिकेय का जन्म तारकासुर का वध करने के लिए हुआ। कार्तिकेय देवताओं के सेनापति बने और तारकासुन का उन्होंने संहार किया। कथा श्रवण करने वालों में दीपक सिंघल, मनोज अग्रवाल, अंकित, हर्षित, गौरव बंसल, विक्की, राजेश आदि रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दिल्ली रोड स्थित जगदीश मंडप में शिव महापुराण कथा हुई। इसमें कथा व्यास शीतल कृष्ण महाराज ने भगवान गणेश और कार्तिकेय जी के जन्म के प्रसंग सुनाए। कथा व्यास ने बताया कि माता पार्वती ने सुंदर बालक की रचना की और उसे जीवित कर अपना द्वारपाल नियुक्त कर दिया। जब भगवान शिव वहां पहुंचे तो बालक ने उन्हें रोक दिया।
कथा व्यास ने बताया कि भगवान शिव को बालक ने प्रवेश नहीं करने दिया। क्रोध में शिव ने उसका गला काट दिया। इसके बाद माता पार्वती दुखी हुई तो शिव जी ने अपने गणों को भेज किसी का भी सिर लाने के लिए कहा। गण हाथी का सिर लेकर आए और भगवान शिव ने उस बालक को जीवित कर दिया। तब विघ्नहर्ता गणेश का जन्म हुआ। उन्हें देवताओं ने बुद्धि, समृद्धि और प्रथम पूज्य का वरदान दिया। कथा में मुख्य यजमान तरुण गुप्ता और नीतू गुप्ता ने व्यासपीठ का पूजन किया गया।
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कथा में लोग भगवान गणेश के जयकारे लगाते रहे। कथा व्यास ने बताया कि कार्तिकेय को स्कंद या मुरुगन भी कहा जाता है। भगवान कार्तिकेय का जन्म तारकासुर का वध करने के लिए हुआ। कार्तिकेय देवताओं के सेनापति बने और तारकासुन का उन्होंने संहार किया। कथा श्रवण करने वालों में दीपक सिंघल, मनोज अग्रवाल, अंकित, हर्षित, गौरव बंसल, विक्की, राजेश आदि रहे।
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