फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Namami Gange Project, the Ganga coast will also be used by the people, know how

नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत अब गंगा का तट भी लोगों के काम आएगा, जानिए कैसे

Fri, 23 Feb 2018 05:05 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सचिन त्यागी, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सचिन त्यागी, मेरठ Updated Fri, 23 Feb 2018 05:05 PM IST
विज्ञापन
Namami Gange Project, the Ganga coast will also be used by the people, know how
फाइल फोटो

मेरठ में गंगा पतित पावनी है, इसका पानी अमृत है। ऐसी धारणा युगों युगों से चली आ रही है। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत अब गंगा का तट भी लोगों के काम आएगा। इसके लिए वन विभाग ने हस्तिनापुर इलाके के तीन गांव भगवानपुर, सिकंदरपुर और दूधली में औषधीय पौधे लगाने का काम शुरू कर दिया है। कई दूसरे राज्यों से 36 हजार औषधीय पौधे मंगाकर उन्हें परीक्षितगढ़ नर्सरी में तैयार कर लिया है। ये औषधीय पौधे जटिल रोगों के इलाज में काम आएंगे। जुलाई में ये रोपे जाएंगे।

विज्ञापन


गंगा को निर्मल बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से नमामि गंगे प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी। इसके लिए उत्तराखंड, यूपी, बिहार, वेस्ट बंगाल के लिए मिट्टी और मौसम को देखते हुए अलग-अलग मॉडल बनाए जाने थे। फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून को मॉडल तैयार करने की जिम्मेदारी मिली थी। मेरठ में इसके लिए एनएफ-पी-वन मॉडल तय किया गया।
विज्ञापन


डीएफओ अदिति शर्मा ने बताया मॉडल के मुताबिक गंगा के किनारे की तरफ पहले प्रति हेक्टेयर घास के 400 पौधे लगाए जाएंगे। ताकि कटान न हो और अधिक पानी आने पर पौधों को नुकसान न पहुंचे। इसके बाद झाड़ियां लगाई जाएगी फिर प्रति हेक्टेयर 12 सौ औषधीय पौधे रोपे जाएंगे। दस हेक्टेयर में इनकी संख्या 12 हजार हो जाएगी। इसके बाद प्रति हेक्टेयर 600 दूसरे पौधे लगाए जाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

तेजी से चल रहा काम

Namami Gange Project, the Ganga coast will also be used by the people, know how
औषधीय पौधे - फोटो : अमर उजाला

डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि पौधे तैयार कराकर नर्सरी में रखे गए हैं। गड्ढों की खुदाई हो  चुकी है। जुलाई में इन्हें रोपा जाएगा। तीनों गांवों को भी इसका लाभ मिलेगा। 

दवाइयों में हो सकेगा इस्तेमाल 
इतनी बड़ी संख्या में रोपे गए औषधीय पौधों को विभिन्न बीमारियों के लिए बनाई जाने वाली दवाईयों में इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे कई बीमारियों का इलाज होगा। इसी के साथ गंगा किनारे का पर्यावरण भी बदलेगा। 

ये हैं औषधीय पौधे 
जो औषधीय पौधे लगाए जाने हैं उनमें ब्राह्मी, कोलियस, ग्रेनियम, लेमनग्रास, घ्रतकुमारी, चिटरोनेला, मेनथोल मिंट, पिपली, रोजमेरी, सतावर, सर्पगंधा, स्टेविया, वाच, वेटीवर, अफ्रीकन मेरीगोल्ड, अश्वगंधा, ब्लैक हेनबेन, चमोली, करलमेघ, केवान्च, मिल्क थिस्टल, ओपियम पॉपी, पालमारोसा, स्वीट फिनाल, तुलसा, तुलसी, डामास्क रोज आदि शामिल हैं।  मेरठ कॉलेज के बॉटनी विभाग के डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि ये पौधे एक जगह पर नहीं मिलते हैं। अलग-अलग राज्यों में पाए जाते हैं। ऐसे में इनका एक साथ उगाया जाना बहुत उपयोगी है। मेरठ के तीनों गांवों का भी इससे नाम होगा।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed