{"_id":"57a0e6804f1c1be84f2b8d6f","slug":"nakli-dava","type":"story","status":"publish","title_hn":"नकली दवा के खेल में न दर्द ठीक, न एलर्जी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नकली दवा के खेल में न दर्द ठीक, न एलर्जी
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Wed, 03 Aug 2016 02:04 AM IST
विज्ञापन
दवाएं
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े दवा कारोबार के बीच नकली दवा का रैकेट भी अपने पैर पसार रहा है। बीत तीन महीने की छापेमारी व निरीक्षण के बीच भरे गए सैंपल की रिपोर्ट बात रही है कि जनता घटिया क्वालिटी की दवा खा रही है। कुछ ऐसी फर्म है जो बिना किसी लैब टेस्टिंग के दवा बनाकर बाजार में बेच रही हैं।
ऐसे में काले कारोबार को थामने के लिए खाद्य एवं औषधि विभाग (एफडीए) की तरफ से अभियान चलाया जा रहा है। दवा निर्माण करने वाले फर्म से लेकर रिटेल व होलसेल तक के स्टोर पर औचक निरीक्षण कर सैंपल भरे जा रहा है। साथ ही कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। शासन ने भी बिना देरी किये ड्रग विभाग को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं।
ड्रग विभाग ने बीते तीन महीनों में औचक छापेमारी व निरीक्षण के दौरान 48 सैंपल भरे, जिसमें से 28 सैंपल की रिपोर्ट प्राप्त हुई है जो काफी चौंकाने वाली है। 7 सैंपल फेल हो गए हैं जो एंटीबायोटिक, एंटी एलर्जी व दर्द निवारक दवाओं के हैं। इसी तरह से दो सैंपल पर गलत स्टेटमेंट दिया गया है। यानी अभी तक प्राप्त हुए सैंपल के आधार पर करीब 38 फीसदी सैंपल नकली पाये गए हैं वो भी उन दवाओं के जिन्हें मरीज के ट्रीटमेंट का मैन हिस्सा माना जाता है।
विज्ञापन
इससे साफ हो गया है कि बाजार में भारी मात्रा में नकली दवा सप्लाई हो रही है जिनके खाने पर मरीज ठीक होने की जगह बढ़ता चला जायेगा। सबसे खास बात यह है कि कंपनियां जिस डोज व साल्ट का दावा कर दवाओं को बाजार में बेच रही है ना तो उतनी मात्रा में डोज दवा के अंदर है और ना ही उनमें वो साल्ट शामिल है। यानी दवा के नाम पर महज कैल्शियम की टैबलेट रेपर में पैक कर बेची जा रही है जिनके खान पर शरीर को कोई नुकसान तो नहीं होगा लेकिन बीमारी कभी ठीक नहीं हो पायेगी।
विभाग को कार्रवाई की खुली छूट
चौंकाने वाली रिपोर्ट के बाद एफडीए मुख्यालय एवं शासन ने ड्रग विभाग कोे खुलकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। ड्रग इंस्पेक्टर संदीप चौधरी का कहना है कि अब मुख्यालय स्तर से कार्रवाई की जा रही है। दूसरे जिलों के ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम बनाकर छापा मारना मुख्यालय की प्लानिंग का हिस्सा था ताकि बाजार से बिना किसी विरोध के सैंपलिंग की जा सके। अब साफ कर दिया गया है कि जिन मेडिकल स्टोर पर निरीक्षण के दौरान फार्मेसिस्ट उपलब्ध ना हो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाये। मुख्यालय के सख्त निर्देश के बीच 2 मेडिकल स्टोर के लाइसेंस फार्मेसिस्ट उपलब्ध ना होने पर निरस्त कर दिये गए हैं।
शासन के सख्त होने का नतीजा (तीन महीने का कार्ड)
निरीक्षण - 6 निर्माण फर्म, 6 ब्लड बैंक व 53 मेडिकल स्टोर
लाइसेंस निलंबित - 4 मेडिकल स्टोर
लाइसेंस निरस्त - 1 मेडिकल स्टोर
चेतावनी - 17 होलसेल व रिटेल स्टोर
परिवाद दाखिल - 1 फर्म
सैंपल भरे - 48
सैंपल रिपोर्ट प्राप्त - 28
सैंपल पास हुए - 19
सैंपल फेल - 9
मरीज की सेहत से खिलवाड़
एफडीए का मानना है कि नकली दवाओं की बाजार में उपलब्धता के बीच मरीज की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रही है। मरीज दवा खरीदने पर मोटा पैसा खर्च कर रहा है जबकि कुछ कंपनियां बिना किसी टेस्टिंग के बाजार में दवायें बनाकर बेच रही है जिसके बदले मरीज से भारी रकम वसूल रही है। ऐसी स्थित में मरीज को दोहरा नुकसान हो रहा है। नंबर एक मरीज की सेहत ठीक नहीं हो रही है और मरीज मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंट की श्रेणी में चला जा रहा है। वहीं मरीज को ऐसी कंपनियां भारी चूना लगा रहा है।
प्रदेश में मेरठ की सेहत खराब
एफडीए की रिपोर्ट बता रही है कि मेरठ से भरे जा रहे सैंपल सबसे ज्यादा फेल हो रहे हैं, जिससे साफ है कि यहां पर नकली दवा का कारोबार बढ़ रहा है। इसकी को देखते हुए अब ड्रग विभाग ने बाकी जिलों की टीम बनाकर मेरठ में छापेमारी कर सैंपल भरने की प्लानिंग बनाई है। बीते दिनों खैर नगर में ललीतपुर से जौनपुर तक के ड्रग इंस्पेक्टर की टीम द्वारा छापा मारा जाना उसी प्लानिंग का हिस्सा रहा है।
विज्ञापन
ऐसे में काले कारोबार को थामने के लिए खाद्य एवं औषधि विभाग (एफडीए) की तरफ से अभियान चलाया जा रहा है। दवा निर्माण करने वाले फर्म से लेकर रिटेल व होलसेल तक के स्टोर पर औचक निरीक्षण कर सैंपल भरे जा रहा है। साथ ही कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। शासन ने भी बिना देरी किये ड्रग विभाग को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं।
विज्ञापन
ड्रग विभाग ने बीते तीन महीनों में औचक छापेमारी व निरीक्षण के दौरान 48 सैंपल भरे, जिसमें से 28 सैंपल की रिपोर्ट प्राप्त हुई है जो काफी चौंकाने वाली है। 7 सैंपल फेल हो गए हैं जो एंटीबायोटिक, एंटी एलर्जी व दर्द निवारक दवाओं के हैं। इसी तरह से दो सैंपल पर गलत स्टेटमेंट दिया गया है। यानी अभी तक प्राप्त हुए सैंपल के आधार पर करीब 38 फीसदी सैंपल नकली पाये गए हैं वो भी उन दवाओं के जिन्हें मरीज के ट्रीटमेंट का मैन हिस्सा माना जाता है।
विज्ञापन
इससे साफ हो गया है कि बाजार में भारी मात्रा में नकली दवा सप्लाई हो रही है जिनके खाने पर मरीज ठीक होने की जगह बढ़ता चला जायेगा। सबसे खास बात यह है कि कंपनियां जिस डोज व साल्ट का दावा कर दवाओं को बाजार में बेच रही है ना तो उतनी मात्रा में डोज दवा के अंदर है और ना ही उनमें वो साल्ट शामिल है। यानी दवा के नाम पर महज कैल्शियम की टैबलेट रेपर में पैक कर बेची जा रही है जिनके खान पर शरीर को कोई नुकसान तो नहीं होगा लेकिन बीमारी कभी ठीक नहीं हो पायेगी।
विभाग को कार्रवाई की खुली छूट
चौंकाने वाली रिपोर्ट के बाद एफडीए मुख्यालय एवं शासन ने ड्रग विभाग कोे खुलकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। ड्रग इंस्पेक्टर संदीप चौधरी का कहना है कि अब मुख्यालय स्तर से कार्रवाई की जा रही है। दूसरे जिलों के ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम बनाकर छापा मारना मुख्यालय की प्लानिंग का हिस्सा था ताकि बाजार से बिना किसी विरोध के सैंपलिंग की जा सके। अब साफ कर दिया गया है कि जिन मेडिकल स्टोर पर निरीक्षण के दौरान फार्मेसिस्ट उपलब्ध ना हो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाये। मुख्यालय के सख्त निर्देश के बीच 2 मेडिकल स्टोर के लाइसेंस फार्मेसिस्ट उपलब्ध ना होने पर निरस्त कर दिये गए हैं।
शासन के सख्त होने का नतीजा (तीन महीने का कार्ड)
निरीक्षण - 6 निर्माण फर्म, 6 ब्लड बैंक व 53 मेडिकल स्टोर
लाइसेंस निलंबित - 4 मेडिकल स्टोर
लाइसेंस निरस्त - 1 मेडिकल स्टोर
चेतावनी - 17 होलसेल व रिटेल स्टोर
परिवाद दाखिल - 1 फर्म
सैंपल भरे - 48
सैंपल रिपोर्ट प्राप्त - 28
सैंपल पास हुए - 19
सैंपल फेल - 9
मरीज की सेहत से खिलवाड़
एफडीए का मानना है कि नकली दवाओं की बाजार में उपलब्धता के बीच मरीज की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रही है। मरीज दवा खरीदने पर मोटा पैसा खर्च कर रहा है जबकि कुछ कंपनियां बिना किसी टेस्टिंग के बाजार में दवायें बनाकर बेच रही है जिसके बदले मरीज से भारी रकम वसूल रही है। ऐसी स्थित में मरीज को दोहरा नुकसान हो रहा है। नंबर एक मरीज की सेहत ठीक नहीं हो रही है और मरीज मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंट की श्रेणी में चला जा रहा है। वहीं मरीज को ऐसी कंपनियां भारी चूना लगा रहा है।
प्रदेश में मेरठ की सेहत खराब
एफडीए की रिपोर्ट बता रही है कि मेरठ से भरे जा रहे सैंपल सबसे ज्यादा फेल हो रहे हैं, जिससे साफ है कि यहां पर नकली दवा का कारोबार बढ़ रहा है। इसकी को देखते हुए अब ड्रग विभाग ने बाकी जिलों की टीम बनाकर मेरठ में छापेमारी कर सैंपल भरने की प्लानिंग बनाई है। बीते दिनों खैर नगर में ललीतपुर से जौनपुर तक के ड्रग इंस्पेक्टर की टीम द्वारा छापा मारा जाना उसी प्लानिंग का हिस्सा रहा है।