नहीं बदली तस्वीर: 50 करोड़ किए खर्च पर 90 दिन में उधड़ गईं सड़कें, अमर उजाला ने खोली थी गुणवत्ता की पोल
Meerut News : मेरठ में 50 करोड़ खर्च करने के बाद भी निगम सड़कों की सूरत नहीं बदल सका। हाल ये है कि शहर में 90 दिनों में ही सड़कें उखड़ गईं।
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अफसोस! मेरठ की सड़कें दुरुस्त करने की जुगत भी बदहाली का शिकार हो गई। चमचमाती सड़क बनने का सपना देखने वाले शहरवासियों को सालों बाद सड़क मिली भी तो 90 दिन के भीतर ही शहर की 12 सड़कें फिर खस्ताहाल हो गईं। सड़क बनाने में इतनी घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया कि सड़कें उधड़ गईं और गड्ढे में तब्दील होने लगीं। 50 करोड़ खर्च करने के बाद भी निगम सड़कों की सूरत नहीं बदल सका। हाल ही में बनीं इन सड़कों को लेकर लोगों ने शिकायत करनी शुरू की तो नगर आयुक्त गुणवत्ता परखने निकले। पांडवनगर, सूरजकुंड और गंगानगर सहित कई सड़कों का सरफेस नगर आयुक्त को उधड़ा मिला।
इस पर भुगतान में कटौती और अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही गई। लेकिन घटिया सड़कों के मामले में न ही कोई कार्रवाई की गई, न ही ठेकेदारों का भुगतान रोकने की पहल।
खस्ताहाल सड़कों से आजिज लोग निगम की नई सरकार बनने के बाद सड़कों की तकदीर बदलने की उम्मीद लगाए बैठे थे। सात महीने के गुणा-भाग के बाद नगर निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की। कई बार टेंडर प्रक्रिया ही अधर में लटक गई। तीन महीने पहले कई कोशिशों के बाद करीब 50 करोड़ की लागत से महानगर में सड़कें बनाने के टेंडर जारी किए गए। सड़कें बनीं तो तीन महीने में ही जिलाधिकारी आवास के सामने, पुलिस लाइन, सर्किट हाउस के पास, गंगानगर डिवाइडर रोड, गंगानगर मेन रोड, पांडवनगर, रक्षापुरम और सूरजकुंड सहित कई सड़कों का सरफेस खराब हो गया। उखड़ती सड़कों पर लोग फिसलकर गिरने लगे।
सूरजकुंड रोड उखड़ी
एक करोड़ चार लाख की लागत से बनी सूरजकुंड रोड फिर उखड़ने लगी है। लोग शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई शून्य है।
पांडवनगर रोड टूटी
एक करोड़ 40 लाख की लागत से तैयार सड़क तीन महीने बीतने से पहले ही अपनी बदहाली का रोना रोने लगी।
गंगानगर रोड फिर बदहाल
दो करोड़ तीस लाख रुपये की लागत से तैयार गंगानगर रोड भी कई जगह से गड्ढा युक्त हो गई।
ऐसा हुआ था हाल कि रोड खोदकर ट्रॉली में भर ले गए थे
माधवपुरम स्थित प्रेम विहार में सड़कों की गुणवत्ता की पोल 20 दिसंबर 2024 को अमर उजाला ने खोली थी। खराब सड़क बनने पर लोगों के हंगामे के बाद ठेकेदार को 24 घंटे में ही सड़क खोदकर घटिया मेटेरियल ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर ले जाना पड़ा था। इसके बाद भी निगम की नींद नहीं टूटी और लगातार सड़कों की खराब हालत के बावजूद निगम ने गुणवत्ता नहीं सुधारी।
ठेकेदारों का अपना तर्क... ट्रैफिक नहीं रोक पाया नगर निगम
घटिया सामग्री लगाकर सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदारों का अपना अलग तर्क है। ठेकेदारों के मुताबिक, नगर निगम सड़क बनने के बाद ट्रैफिक रोकने में नाकाम रहा। सड़क निर्माण होते ही ट्रैफिक चल पड़ा। इससे सरफेस उधड़ गया है। ठेकेदारों का दावा कि जिन सड़कों पर ट्रैफिक चालू नहीं हुआ या फिर 15-20 दिन तक भारी वाहन सड़क पर नहीं चला। उनकी हालत ठीक है। अवर अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता ने भी सड़कों की गुणवत्ता के बारे में रिपोर्ट दी है।
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सड़कों का निरीक्षण नगर निगम के अधिकारियों के नेतृत्व में टीम बनाकर किया गया। कई सड़कों का सरफेस उधड़ने की शिकायत पर अवर अभियंता, सहायक अभियंता से कारण बताओ नोटिस दिया गया है। ठेकेदारों के भुगतान से कटौती के भी निर्देश दिए गए हैं। - प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त
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