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मुजफ्फरनगर रेल हादसा : सीएम योगी ने फोन पर सीधे संभाला मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Sun, 20 Aug 2017 02:57 AM IST
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सीएम योगी
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रेल दुर्घटना की सूचना फ्लैश होते ही सीएम योगी फोन पर एक्टिव हो गए। उन्होंने लगातार फोन पर संपर्क साधे रखा। औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना एवं गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्यमंत्री सुरेश राणा को तत्काल मौकेपर भेजा। उधर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी मुजफ्फरनगर शहर विधायक कपिल देव अग्रवाल तथा केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री संजीव बालियान से भी सीधी बात की। सभी से कहा कि मौकेपर हर संभव मदद तत्काल मुहैया कराएं। इसके बाद न केवल मुजफ्फरनगर बल्कि मेरठ, बिजनौर तथा आसपास केसभी अधिकारी मौके पर पहुंच गए। मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, गाजियाबाद, बागपत, नोएडा आदि से सरकारी और निजी एंबुलेंस मौकेपर बुला ली गई। सीएम ने डीएम मुजफ्फरनगर जीएस प्रियदर्शी को भी कॉल कर सारी घटना की जानकारी ली और हर पल की रिपोर्ट देने को कहा।
घायल चीखते रहे और वो सामान ले जाते रहे
ट्रेन हादसे के बाद एक तरफ जहां बचाव कार्य चला तो दूसरी तरफ यात्रियों का सामान भी गायब मेरठ। खतौली में ट्रेन हादसे के बाद मची चीख पुकार के बाद जहां बचाव और राहत कार्य के लिए आसपास के सैकड़ों लोग मौके पर जुटे तो पीएसी और पुलिस के जवान भी घायलों का निकालने में लग गये। वहीं कुछ लोग ट्रेन में चढ़कर घायलों का सामान भी ले गए। पुलिस प्रशासन को भीड़ को संभालने के लिए देर रात तक मशक्कत करनी पड़ी। जगत कालोनी और आसपास के लोगों ने बताया कि हादसे के बाद घायलों को ट्रेन के डिब्बों से निकालकर एंबुलेंस से अस्पताल भेजा जा रहा था। मौके पर पुलिस भी भीड़ को संभालने में लगी रही। घायलों के परिजनों ने पुलिस अफसरों को बताया कि हादसे के बाद न तो ट्रेन में उनका बैग था, न ही मोबाइल फोन या घड़ी। जो भी सामान जिसे मिला वहीं लेकर चला गया। जब ट्रेन के डिब्बों की पुलिस और पीएसी टीम ने जांच की तो किसी भी यात्री या मरने वालों को कोई भी सामान नहीं मिला। ट्रेन में सवार यात्रियों की नकदी, अंगूठी, चेन, पर्स, मोबाइल और अन्य सामान नहीं मिलने से पुलिस अफसर भी हैरान हो गए। ट्रेन के डिब्बों और आसपास के स्थान पर जूते, चप्पल ही पड़े थे। किसी का हाथ कटा था तो किसी का पैर अलग था। ट्रेन हादसा होने के बाद शुरुआत के आधा घंटे में ही असामाजिक लोगों ने मानवता को दरकिनार करते ऐसी करतूत है। अस्पताल में भर्ती सरजीत ने बताया कि उसकी उसका बैग नहीं मिला वहीं मोबाइल व अन्य सामान भी नहीं था। खतौली के अस्पताल में लायी गई सरोज ने बताया कि उसे तो पता नहीं चला कि क्या हुआ है। जब तक उसे होश आया तो चीख पुकार मची थी। घायल मदद मांग रहे थे।
डीएम-एसएसपी घायलों को देखते पहुंचे
उत्कल एक्सप्रेस हादसे में घायल 24 लोगों को मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, आनंद हॉस्पिटल, एसडी ग्लोबल पल्लवपुरम, कैलाशी हॉस्पिटल, कंकरखेड़ा में भर्ती कराया है। घायलों को देखने के लिए रात में डीएम समीर वर्मा व एसएसपी मंजिल सैनी दहल सभी अस्पतालों में पहुंचे। इस घायलों से बातचीत कर डॉक्टरों को कहा कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
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अंधेरे से बढ़ी परेशानी
रोशनी न होने से बचाव कार्य शुरू करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दुर्घटना के कारण वैसे भी यहां की विद्युत आपूर्ति बंद करनी पड़ी। रेलवे ट्रैक की विद्युत लाइन तो वैसे ही ध्वस्त हो गई थी। ऐसे में यहां अंधेरा छाया था। पावर कारपोरेशन ने आस्का लाइटों का इंतजाम किया। तब यहां रोशनी आई और काम शुरू हो सका।
पलभर में दहल गया खतौली
शाम के करीब 5.40 बजे का वक्त था। बारिश की बूंदे धीमी गति से बरस रहीं थीं। चारों तरफ आसमान में बादल छाए हुए थे। बारिश के चलते जगत कालोनी और आसपास के लोग अपने घरों में थे। खतौली रेलवे स्टेशन पर भी कुछ लोग एक दूसरे से बातचीत कर रहे थे। अचानक आंधी की रफ्तार से ट्रेन आती दिखाई दी और जोर का धमाका हुआ। रेलवे की लाइन व बिजली के पोल हिलने शुरू हो गये। धमाका इतना भीषण था कि आवाज कई किमी तक सुनाई पड़ी तो पलभर में ही खतौली दहल गया। धूल का गुबार आसमान की तरफ उड़ने लगा। लोगों के घरों में रेलवे ट्र्रैक के पत्थर जा गिरे तो पूरी बिजली की लाइन हिलौरे मारकर जमीन पर गिर पड़ी। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों में तो दौड़े तो ट्रेन से चीख पुकार की आवाज आने लगी। चौधीर जगत सिंह ने 1974 में खतौली में रेलवे लाइन के पास जगत नाम से खतौली बनाई थी। रेलवे लाइन के पास ही जगत सिंह का चौधरी तिलकराम इंटर कॉलेज के नाम से कॉलेज है। ट्रेन हादसे के सबसे ज्यादा चश्मदीद भी जगत सिंह ही हैं, जो अपने घर के बाहर खड़े थे और पत्थर लगने से घायल भी हो गये। जगत सिंह ने बताया कि पूरे दिन में रेलवे ट्रैक पर कर्मचारी टूटी हुई पटरी को जोड़ने का काम कर रहे थे। कई बार उनसे कहा भी कि जब तक पटरी को नहीं जोड़ा जाता जाता कोई संकेतीकरण लगा दें तो ट्रेन की स्पीड तो कम हो जाएगी, लेकिन किसी नहीं सुनी।
जगत सिंह के घर में घुसा ट्रेन का डिब्बा
जगत सिंह ने बताया जब ट्रेन आ रही थी तो उसकी रफ्तार आंधी जैसी थी। अचानक ट्रेन ने झटका मारा तो पूरी बिजली के लाइन के पोल हिल गए। पत्थर लगने से वह दौड़े तो अचानक गेट की तरफ गिर पड़े। जिसके बाद देखा तो ट्रेन की एक बोगी दूसरे डिब्बे पर चढ़ चुकी थी। ट्रेन की अधिकांश बोगी जगत कालोनी की तरफ ही गिरीं। एक डिब्बा जगत सिंह के मकान की दीवार तोड़कर अंदर की तरफ घुस गया तो दूसरा डिब्बा सौ मीटर दूर उनके घेर की दीवार से टकरा गया। उसके बाद परिवार की महिला सुनीता और अन्य महिलाएं भी दौड़कर बाहर की तरफ आईं।
लोगों को बचाने के लिए दौड़े
ट्रेन में घायलों की चीख पुकार मची तो हम बचाने के लिए दौड़े। डिब्बों में घायल एक दूसरे के नीचे दबे हुए थे। किसी तरह उन्हें निकाला गया। विजय कुमार पहली बार देखा ऐसा हादसा महिला और बच्चे बुरी तरह से चिल्ला रहे थे। किसी का हाथ कट गया तो किसी का पैर का पता नहीं चल रहा था। पहली बार इतना दर्दनाक हादसा देखा है। विपिन किराना व्यापारी सब सन्न रह गए इतना जोर का धमाका था कि आसपास के लोग सन्न रह गए। कोई ट्रेन से बाहर इलाज के लिए चिल्ला रहा था तो कोई ट्रेन में अंदर तड़प रहा था। दीपक कुमार उर्फ बिट्टू किसी तरह घायलों को बाहर निकाला हल्की बारिश हो रही थी तो मैं अपने घर के बाहर की तरफ था। अचानक हादसा हुआ तो हम सभी लोग बचाने की तरफ दौड़ पड़े। किसी तरह घायलों को बाहर निकाला। शिवम, बीसीए छात्र हर तरफ घायल पड़े थे जिधर भी नजर जाती उधर घायल ही घायल नजर आ रहे थे। घंटों की मशक्कत के बाद घायलों को मौके से निकाला गया।
लोगों को ढूंढने की जिम्मेदारी जैकी, बंटी, रोमी और रूबी पर
मेरठ। एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू शुरू कर दिया। भले ही टीम देर से पहुंची हो पर आते ही टीम यहां बचाव कार्य में जुट गई। अहम यह रहा कि इस टीम के साथ डॉग स्क्वायड भी पहुंचा जो बोगियों में फंसे लोगों की तलाश में जुट गया। हालांकि यह उम्मीद नाममात्र को ही थी कि कोई जिंदा शायद ही फंसा हो पर डेड बॉडी की तलाश में इस टीम का अहम रोल है। डॉग मास्टर विधान महंती ने मुताबिक इन चारों डॉग की उम्र तीन से पांच साल की है। तीन मेल डॉग जैकी, बंटी, रोमी और एक फीमेल रूबी ने फंसे लोगों की तलाश शुरू कर दी थी। इन चारों की टीम कानपुर और रामपुर रेल हादसे में अहम भूमिका अदा कर चुकी है।
बारिश न होती तो बस्ती में मचता कोहराम
मेरठ। यदि बारिश का मौसम न होता तो बस्ती में और बड़ा कोहराम मचता। दरअसल, जगत कालोनी से सटकर ही रेलवे ट्रैक गुजर रहा है। यहां जो रास्ता है उस पर स्थित अपने मकानों के बाहर अमूमन शाम को काफी लोग बैठे रहते हैं। बारिश में इक्का दुक्का लोग ही यहां बैठे थे। ट्रेन की बोगियां इसी रास्ते पर गिरीं। यदि रोज की तरह ही लोग यहां बैठे होते तो और ज्यादा मौते हो सकती थीं।
जिसने बस्ती बसाई उसी के घर, कॉलेज में घुसी बोगी
मेरठ। जगत कालोनी यहां के बाशिंदे चौधरी जगत सिंह ने ही बसाई थी। उसी के ताऊ चौधरी तिलकराम थे, जिनके नाम पर चौधरी तिलक इंटर कॉलेज है। जगत सिंह के घर और तिलक इंटर कालेज में ही बोगियां घुसी हैं।
कमिश्नर ने किया मंडल को अलर्ट
मौके पर पहुंचने से पहले कमिश्नर मेरठ डॉ. प्रभात कुमार ने पूरे मंडल में अलर्ट कर दिया। सभी अधिकारियों को निर्देश दे गए कि अपने जिले में सारी व्यवस्थाएं चाक चौबंद कर दी जाए। खास तौर से घायलों के लिए बेड लगवाए गए। सभी अधिकारियों की टीम को मौकेकी तरफ रवाना किया गया।
अपनों को कराहता देख सरकारी अस्पताल से उठाकर ले गए लोग
रेल हादसे के बाद खतौली के सरकारी अस्पताल में दो-तीन डॉक्टर ही थे जबकि घायल सैकड़ों। अपनों को कराहता देख परिजन, रिश्तेदार उन्हें निजी अस्पतालों में ले गए। इस विपत्ति में स्टाफ, रिश्तेदार और मिलने वालों ने अपना फर्ज बखूबी निभाया। शास्त्रीनगर स्थित शिवालिक बैंक के ब्रांच मैनेजर अंकित गर्ग के अनुसार उनकी पत्नी दिव्या गर्ग (32) बेटा अनिरुद्ध (7) बेटी आध्या (18 माह) और उनके बैंक में ऑफिसर सुमित गर्ग ट्रेन से सहारनपुर जा रहे थे। सवा पांच बजे वे खुद कैंट स्टेशन पर उन्हें ट्रेन में बैठाकर आए थे। जैसे ही ब्रांच पहुंचे, तो उनके पास कॉल आई कि खतौली में ट्रेन पलट गई है। उनके परिवार की हालत गंभीर है। उन्होंने तुरंत खतौली ब्रांच फोन कर स्टाफ को वहां भेजा। स्टाफ घटनास्थल से उनके घायल परिजनों को खतौली सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचा। लेकिन अस्पताल में एक बेड पर दो-दो घायल पडे़ थे। डॉक्टर एक-दो ही थे। उनका बेटा और बेटी दर्द से कराह रहे थे। बाद में वह तीनों को आनंद अस्पताल मेरठ ले आए। बेटे और पत्नी को तीन जगह फ्रैक्चर हैं। अंकित का मानना था कि इतने बडे़ हादसे में इतनी जल्दी सुविधाएं नहीं मिल सकतीं। मुजफ्फरनगर के किरनपाल ने बताया कि हादसे में घायल उनकी बेटी सोनिका को खतौली जिला अस्पताल से कह दिया कि अस्पताल फुल हो गया है। मेरठ ले जाओ। इसके बाद बेटी को सरकारी एंबुलेंस से मेडिकल मेरठ ले जाया गया। अंकित के परिवार के साथ सहारनपुर जा रहे शिवालिक बैंक के ऑफिसर सुमित की इस हादसे में मौत हो गई। बैंक प्रबंधक अंकित गर्ग के अनुसार सुमित ट्रेन में टायलेट जा रहे थे। खिड़की के पास पहुंचे, तभी ट्रेन में तेजी से झटके लगे और वह खिड़की से नीचे गिर गए। गहरी चोट आने पर उनकी मौत हो गई। इस मौत से बैंक स्टाफ बेहद दुखी था। सुमित (26) पुत्र सुशील गर्ग मोहल्ला चिंताला, सहारनपुर निवासी थे। वह अविवाहित थे। इसी साल मई में उनका तबादला सहारनपुर से मेरठ हुआ था।
रेल राज्यमंत्री को किया गुमराह, नहीं दिखाया टूटा ट्रैक
मेरठ। खतौली में ट्रेन हादसे के बाद जहां रात में मौके पर पहुंचे रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए। वहीं, रेलवे के अफसर पूरे मामले को दबाने में लगे रहे। यहां तक कि रेल राज्यमंत्री और अन्य नेताओं को भी अफसरों ने गुमराह किया। उस टूटी हुई पटरी को नहीं दिखाया, जिसका कारण इस बड़े और गंभीर हादसे को माना जा रहा है। उत्कल ट्रेन हादसे के बाद डीजी रेलवे सुधीर कुमार (प्रभारी डीजी एनएसजी), एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार, मंडलायुक्त मेरठ डॉ. प्रभात कुमार, आईजी रेलवे विनोद कुमार, डीआईजी सहारनपुर, डीएम मुजफ्फरनगर, एसएसपी मुजफ्फरनगर और एसपी रेलवे केशव कुमार मौके पर पहुंचे। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा और केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान ने मौके पर पहुंचकर रेलवे, पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से इस हादसे के बारे में जानकारी ली। लेकिन तमाम अफसर पूरे मामले में चुप्पी साधे रहे। मौके पर करीब तीन-चार हजार लोगों की भीड़ जमा थी। ऐसे में पुलिस फोर्स भीड़ को हटाकर नेताओं की सुरक्षा में लगी रही। रेल राज्यमंत्री ने इस दौरान मीडिया से कहा कि पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दे दिए गए हैं, जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
सर, यह लापरवाही तो अपनी ही है
रेल राज्यमंत्री के जाने के बाद फिर से पुलिस, प्रशासनिक और रेलवे के अधिकारी आपस में गुपचुप बात करने लगे। रेलवे के एक अधिकारी ने पुलिस और प्रशासन के अफसरों से कहा कि जांच तो चल रही है। लेकिन यह लापरवाही तो अपनी ही है। जिस स्थान पर पटरी टूटी थी, वहां हमारे कर्मचारी उसका टुकड़ा जोड़ रहे थे। तभी अचानक तेज रफ्तार से ट्रेन आ गई। टूटी हुई पटरी के कारण तेज रफ्तार ट्रेन के बाद ही हादसा हुआ है। यदि ट्रेन की स्पीड कम होती तो यह हादसा नहीं होता। तमाम अधिकारी आपस में अपनी ही कमियों को छुपाते रहे।
मंत्री ने पूछा तो चुप्पी साध गए अफसर
रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को अफसरों ने इस कदर गुमराह किया कि केवल क्षतिग्रस्त ट्रेन की बोगी ही दिखाई। मनोज सिन्हा ने सभी अफसरों से मुखातिब होकर पूछा कि क्या ट्रैक पर मरम्मत का काम चल रहा था? तो अफसर चुप्पी साध गए। दरअसल रेल राज्यमंत्री खुद ही घटनास्थल का बारीकी से मुआयना करने की तैयारी से आए थे। इस दौरान वे टूटे हुए ट्रैक की तरफ जाने लगे तो अफसरों ने बहाना बनाते हुए कहा कि साहब, यहां भीड़ ज्यादा है। लाइन के पास दलदल है। जिसके बाद अपने विभाग के राज्यमंत्री को गुमराह करते हुए रेलवे अधिकारियों ने टूटे हुए ट्रैक वाले प्वाइंट पर नहीं जाने दिया, जहां पटरी जोड़ने के औजार भी रखे हुए थे।
ट्रेन हादसे पर यह बोले सरकार के मंत्री
घायलों का सही इलाज ही प्राथमिकता
यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। मैं कोई राजनीतिक बात नहीं करूंगा। हर किसी घायल का सही इलाज हो जाए यह प्राथमिकता है। हादसा क्यों हुआ इसकी अभी कोई जानकारी मुझे नहीं दी है। बोर्ड के वरिष्ठ मेंबर जांच कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों को रेलवे के परिचालन के बारे में समझना होगा। रेलवे के अधिकृत अधिकारी बयान देंगे तभी यह तय होगा कि कैसे यह हादसा हुआ। -मनोज सिन्हा, रेल राज्य मंत्री
यह अभी जांच का विषय
सरकार का पूरा जोर इस पर है कि कैसे घायलों को तत्परता से उपचार दिया जाए। यही कारण है कि सभी विभागों की टीमें बचाव में जुट गई हैं। हादसा कैसे हुआ यह तो जांच का विषय है। लेकिन पहले घायलों को बचाना होगा। -संजीव बालियान, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री
घटना की गहराई से जांच हो
मुख्यमंत्री ने इस हादसे को लेकर बेहद गंभीरता दिखाई है। उनके निर्देश पर ही तत्काल हम साथी मंत्री सुरेश राणा के साथ यहां पहुंचे हैं। सीएम सीधे इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं। सभी अस्पतालों में अलर्ट हैं। एक-एक घायल का सही ढंग से उपचार होगा। आर्थिक मदद भी की जा रही है। रेलवे के अधिकारियों को कहा गया है कि घटना की गहराई से जांच हो। -सतीश महाना, औद्योगिक विकास मंत्री
जांच बताएगी किसकी लापरवाही
मेरे अपने विभाग के अलावा अन्य विभागों, निजी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों तक की एंबुलेंस मौके पर भेजी गई है। हादसा हुआ है। निश्चित रूप से जांच में पता चल जाएगा कि किसकी लापरवाही है। लेकिन पहले घायलों को बचाना होगा। -सुरेश राणा, गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्यमंत्री
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घायल चीखते रहे और वो सामान ले जाते रहे
ट्रेन हादसे के बाद एक तरफ जहां बचाव कार्य चला तो दूसरी तरफ यात्रियों का सामान भी गायब मेरठ। खतौली में ट्रेन हादसे के बाद मची चीख पुकार के बाद जहां बचाव और राहत कार्य के लिए आसपास के सैकड़ों लोग मौके पर जुटे तो पीएसी और पुलिस के जवान भी घायलों का निकालने में लग गये। वहीं कुछ लोग ट्रेन में चढ़कर घायलों का सामान भी ले गए। पुलिस प्रशासन को भीड़ को संभालने के लिए देर रात तक मशक्कत करनी पड़ी। जगत कालोनी और आसपास के लोगों ने बताया कि हादसे के बाद घायलों को ट्रेन के डिब्बों से निकालकर एंबुलेंस से अस्पताल भेजा जा रहा था। मौके पर पुलिस भी भीड़ को संभालने में लगी रही। घायलों के परिजनों ने पुलिस अफसरों को बताया कि हादसे के बाद न तो ट्रेन में उनका बैग था, न ही मोबाइल फोन या घड़ी। जो भी सामान जिसे मिला वहीं लेकर चला गया। जब ट्रेन के डिब्बों की पुलिस और पीएसी टीम ने जांच की तो किसी भी यात्री या मरने वालों को कोई भी सामान नहीं मिला। ट्रेन में सवार यात्रियों की नकदी, अंगूठी, चेन, पर्स, मोबाइल और अन्य सामान नहीं मिलने से पुलिस अफसर भी हैरान हो गए। ट्रेन के डिब्बों और आसपास के स्थान पर जूते, चप्पल ही पड़े थे। किसी का हाथ कटा था तो किसी का पैर अलग था। ट्रेन हादसा होने के बाद शुरुआत के आधा घंटे में ही असामाजिक लोगों ने मानवता को दरकिनार करते ऐसी करतूत है। अस्पताल में भर्ती सरजीत ने बताया कि उसकी उसका बैग नहीं मिला वहीं मोबाइल व अन्य सामान भी नहीं था। खतौली के अस्पताल में लायी गई सरोज ने बताया कि उसे तो पता नहीं चला कि क्या हुआ है। जब तक उसे होश आया तो चीख पुकार मची थी। घायल मदद मांग रहे थे।
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डीएम-एसएसपी घायलों को देखते पहुंचे
उत्कल एक्सप्रेस हादसे में घायल 24 लोगों को मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, आनंद हॉस्पिटल, एसडी ग्लोबल पल्लवपुरम, कैलाशी हॉस्पिटल, कंकरखेड़ा में भर्ती कराया है। घायलों को देखने के लिए रात में डीएम समीर वर्मा व एसएसपी मंजिल सैनी दहल सभी अस्पतालों में पहुंचे। इस घायलों से बातचीत कर डॉक्टरों को कहा कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
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अंधेरे से बढ़ी परेशानी
रोशनी न होने से बचाव कार्य शुरू करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दुर्घटना के कारण वैसे भी यहां की विद्युत आपूर्ति बंद करनी पड़ी। रेलवे ट्रैक की विद्युत लाइन तो वैसे ही ध्वस्त हो गई थी। ऐसे में यहां अंधेरा छाया था। पावर कारपोरेशन ने आस्का लाइटों का इंतजाम किया। तब यहां रोशनी आई और काम शुरू हो सका।
पलभर में दहल गया खतौली
शाम के करीब 5.40 बजे का वक्त था। बारिश की बूंदे धीमी गति से बरस रहीं थीं। चारों तरफ आसमान में बादल छाए हुए थे। बारिश के चलते जगत कालोनी और आसपास के लोग अपने घरों में थे। खतौली रेलवे स्टेशन पर भी कुछ लोग एक दूसरे से बातचीत कर रहे थे। अचानक आंधी की रफ्तार से ट्रेन आती दिखाई दी और जोर का धमाका हुआ। रेलवे की लाइन व बिजली के पोल हिलने शुरू हो गये। धमाका इतना भीषण था कि आवाज कई किमी तक सुनाई पड़ी तो पलभर में ही खतौली दहल गया। धूल का गुबार आसमान की तरफ उड़ने लगा। लोगों के घरों में रेलवे ट्र्रैक के पत्थर जा गिरे तो पूरी बिजली की लाइन हिलौरे मारकर जमीन पर गिर पड़ी। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों में तो दौड़े तो ट्रेन से चीख पुकार की आवाज आने लगी। चौधीर जगत सिंह ने 1974 में खतौली में रेलवे लाइन के पास जगत नाम से खतौली बनाई थी। रेलवे लाइन के पास ही जगत सिंह का चौधरी तिलकराम इंटर कॉलेज के नाम से कॉलेज है। ट्रेन हादसे के सबसे ज्यादा चश्मदीद भी जगत सिंह ही हैं, जो अपने घर के बाहर खड़े थे और पत्थर लगने से घायल भी हो गये। जगत सिंह ने बताया कि पूरे दिन में रेलवे ट्रैक पर कर्मचारी टूटी हुई पटरी को जोड़ने का काम कर रहे थे। कई बार उनसे कहा भी कि जब तक पटरी को नहीं जोड़ा जाता जाता कोई संकेतीकरण लगा दें तो ट्रेन की स्पीड तो कम हो जाएगी, लेकिन किसी नहीं सुनी।
जगत सिंह के घर में घुसा ट्रेन का डिब्बा
जगत सिंह ने बताया जब ट्रेन आ रही थी तो उसकी रफ्तार आंधी जैसी थी। अचानक ट्रेन ने झटका मारा तो पूरी बिजली के लाइन के पोल हिल गए। पत्थर लगने से वह दौड़े तो अचानक गेट की तरफ गिर पड़े। जिसके बाद देखा तो ट्रेन की एक बोगी दूसरे डिब्बे पर चढ़ चुकी थी। ट्रेन की अधिकांश बोगी जगत कालोनी की तरफ ही गिरीं। एक डिब्बा जगत सिंह के मकान की दीवार तोड़कर अंदर की तरफ घुस गया तो दूसरा डिब्बा सौ मीटर दूर उनके घेर की दीवार से टकरा गया। उसके बाद परिवार की महिला सुनीता और अन्य महिलाएं भी दौड़कर बाहर की तरफ आईं।
लोगों को बचाने के लिए दौड़े
ट्रेन में घायलों की चीख पुकार मची तो हम बचाने के लिए दौड़े। डिब्बों में घायल एक दूसरे के नीचे दबे हुए थे। किसी तरह उन्हें निकाला गया। विजय कुमार पहली बार देखा ऐसा हादसा महिला और बच्चे बुरी तरह से चिल्ला रहे थे। किसी का हाथ कट गया तो किसी का पैर का पता नहीं चल रहा था। पहली बार इतना दर्दनाक हादसा देखा है। विपिन किराना व्यापारी सब सन्न रह गए इतना जोर का धमाका था कि आसपास के लोग सन्न रह गए। कोई ट्रेन से बाहर इलाज के लिए चिल्ला रहा था तो कोई ट्रेन में अंदर तड़प रहा था। दीपक कुमार उर्फ बिट्टू किसी तरह घायलों को बाहर निकाला हल्की बारिश हो रही थी तो मैं अपने घर के बाहर की तरफ था। अचानक हादसा हुआ तो हम सभी लोग बचाने की तरफ दौड़ पड़े। किसी तरह घायलों को बाहर निकाला। शिवम, बीसीए छात्र हर तरफ घायल पड़े थे जिधर भी नजर जाती उधर घायल ही घायल नजर आ रहे थे। घंटों की मशक्कत के बाद घायलों को मौके से निकाला गया।
लोगों को ढूंढने की जिम्मेदारी जैकी, बंटी, रोमी और रूबी पर
मेरठ। एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू शुरू कर दिया। भले ही टीम देर से पहुंची हो पर आते ही टीम यहां बचाव कार्य में जुट गई। अहम यह रहा कि इस टीम के साथ डॉग स्क्वायड भी पहुंचा जो बोगियों में फंसे लोगों की तलाश में जुट गया। हालांकि यह उम्मीद नाममात्र को ही थी कि कोई जिंदा शायद ही फंसा हो पर डेड बॉडी की तलाश में इस टीम का अहम रोल है। डॉग मास्टर विधान महंती ने मुताबिक इन चारों डॉग की उम्र तीन से पांच साल की है। तीन मेल डॉग जैकी, बंटी, रोमी और एक फीमेल रूबी ने फंसे लोगों की तलाश शुरू कर दी थी। इन चारों की टीम कानपुर और रामपुर रेल हादसे में अहम भूमिका अदा कर चुकी है।
बारिश न होती तो बस्ती में मचता कोहराम
मेरठ। यदि बारिश का मौसम न होता तो बस्ती में और बड़ा कोहराम मचता। दरअसल, जगत कालोनी से सटकर ही रेलवे ट्रैक गुजर रहा है। यहां जो रास्ता है उस पर स्थित अपने मकानों के बाहर अमूमन शाम को काफी लोग बैठे रहते हैं। बारिश में इक्का दुक्का लोग ही यहां बैठे थे। ट्रेन की बोगियां इसी रास्ते पर गिरीं। यदि रोज की तरह ही लोग यहां बैठे होते तो और ज्यादा मौते हो सकती थीं।
जिसने बस्ती बसाई उसी के घर, कॉलेज में घुसी बोगी
मेरठ। जगत कालोनी यहां के बाशिंदे चौधरी जगत सिंह ने ही बसाई थी। उसी के ताऊ चौधरी तिलकराम थे, जिनके नाम पर चौधरी तिलक इंटर कॉलेज है। जगत सिंह के घर और तिलक इंटर कालेज में ही बोगियां घुसी हैं।
कमिश्नर ने किया मंडल को अलर्ट
मौके पर पहुंचने से पहले कमिश्नर मेरठ डॉ. प्रभात कुमार ने पूरे मंडल में अलर्ट कर दिया। सभी अधिकारियों को निर्देश दे गए कि अपने जिले में सारी व्यवस्थाएं चाक चौबंद कर दी जाए। खास तौर से घायलों के लिए बेड लगवाए गए। सभी अधिकारियों की टीम को मौकेकी तरफ रवाना किया गया।
अपनों को कराहता देख सरकारी अस्पताल से उठाकर ले गए लोग
रेल हादसे के बाद खतौली के सरकारी अस्पताल में दो-तीन डॉक्टर ही थे जबकि घायल सैकड़ों। अपनों को कराहता देख परिजन, रिश्तेदार उन्हें निजी अस्पतालों में ले गए। इस विपत्ति में स्टाफ, रिश्तेदार और मिलने वालों ने अपना फर्ज बखूबी निभाया। शास्त्रीनगर स्थित शिवालिक बैंक के ब्रांच मैनेजर अंकित गर्ग के अनुसार उनकी पत्नी दिव्या गर्ग (32) बेटा अनिरुद्ध (7) बेटी आध्या (18 माह) और उनके बैंक में ऑफिसर सुमित गर्ग ट्रेन से सहारनपुर जा रहे थे। सवा पांच बजे वे खुद कैंट स्टेशन पर उन्हें ट्रेन में बैठाकर आए थे। जैसे ही ब्रांच पहुंचे, तो उनके पास कॉल आई कि खतौली में ट्रेन पलट गई है। उनके परिवार की हालत गंभीर है। उन्होंने तुरंत खतौली ब्रांच फोन कर स्टाफ को वहां भेजा। स्टाफ घटनास्थल से उनके घायल परिजनों को खतौली सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचा। लेकिन अस्पताल में एक बेड पर दो-दो घायल पडे़ थे। डॉक्टर एक-दो ही थे। उनका बेटा और बेटी दर्द से कराह रहे थे। बाद में वह तीनों को आनंद अस्पताल मेरठ ले आए। बेटे और पत्नी को तीन जगह फ्रैक्चर हैं। अंकित का मानना था कि इतने बडे़ हादसे में इतनी जल्दी सुविधाएं नहीं मिल सकतीं। मुजफ्फरनगर के किरनपाल ने बताया कि हादसे में घायल उनकी बेटी सोनिका को खतौली जिला अस्पताल से कह दिया कि अस्पताल फुल हो गया है। मेरठ ले जाओ। इसके बाद बेटी को सरकारी एंबुलेंस से मेडिकल मेरठ ले जाया गया। अंकित के परिवार के साथ सहारनपुर जा रहे शिवालिक बैंक के ऑफिसर सुमित की इस हादसे में मौत हो गई। बैंक प्रबंधक अंकित गर्ग के अनुसार सुमित ट्रेन में टायलेट जा रहे थे। खिड़की के पास पहुंचे, तभी ट्रेन में तेजी से झटके लगे और वह खिड़की से नीचे गिर गए। गहरी चोट आने पर उनकी मौत हो गई। इस मौत से बैंक स्टाफ बेहद दुखी था। सुमित (26) पुत्र सुशील गर्ग मोहल्ला चिंताला, सहारनपुर निवासी थे। वह अविवाहित थे। इसी साल मई में उनका तबादला सहारनपुर से मेरठ हुआ था।
रेल राज्यमंत्री को किया गुमराह, नहीं दिखाया टूटा ट्रैक
मेरठ। खतौली में ट्रेन हादसे के बाद जहां रात में मौके पर पहुंचे रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए। वहीं, रेलवे के अफसर पूरे मामले को दबाने में लगे रहे। यहां तक कि रेल राज्यमंत्री और अन्य नेताओं को भी अफसरों ने गुमराह किया। उस टूटी हुई पटरी को नहीं दिखाया, जिसका कारण इस बड़े और गंभीर हादसे को माना जा रहा है। उत्कल ट्रेन हादसे के बाद डीजी रेलवे सुधीर कुमार (प्रभारी डीजी एनएसजी), एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार, मंडलायुक्त मेरठ डॉ. प्रभात कुमार, आईजी रेलवे विनोद कुमार, डीआईजी सहारनपुर, डीएम मुजफ्फरनगर, एसएसपी मुजफ्फरनगर और एसपी रेलवे केशव कुमार मौके पर पहुंचे। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा और केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान ने मौके पर पहुंचकर रेलवे, पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से इस हादसे के बारे में जानकारी ली। लेकिन तमाम अफसर पूरे मामले में चुप्पी साधे रहे। मौके पर करीब तीन-चार हजार लोगों की भीड़ जमा थी। ऐसे में पुलिस फोर्स भीड़ को हटाकर नेताओं की सुरक्षा में लगी रही। रेल राज्यमंत्री ने इस दौरान मीडिया से कहा कि पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दे दिए गए हैं, जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
सर, यह लापरवाही तो अपनी ही है
रेल राज्यमंत्री के जाने के बाद फिर से पुलिस, प्रशासनिक और रेलवे के अधिकारी आपस में गुपचुप बात करने लगे। रेलवे के एक अधिकारी ने पुलिस और प्रशासन के अफसरों से कहा कि जांच तो चल रही है। लेकिन यह लापरवाही तो अपनी ही है। जिस स्थान पर पटरी टूटी थी, वहां हमारे कर्मचारी उसका टुकड़ा जोड़ रहे थे। तभी अचानक तेज रफ्तार से ट्रेन आ गई। टूटी हुई पटरी के कारण तेज रफ्तार ट्रेन के बाद ही हादसा हुआ है। यदि ट्रेन की स्पीड कम होती तो यह हादसा नहीं होता। तमाम अधिकारी आपस में अपनी ही कमियों को छुपाते रहे।
मंत्री ने पूछा तो चुप्पी साध गए अफसर
रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को अफसरों ने इस कदर गुमराह किया कि केवल क्षतिग्रस्त ट्रेन की बोगी ही दिखाई। मनोज सिन्हा ने सभी अफसरों से मुखातिब होकर पूछा कि क्या ट्रैक पर मरम्मत का काम चल रहा था? तो अफसर चुप्पी साध गए। दरअसल रेल राज्यमंत्री खुद ही घटनास्थल का बारीकी से मुआयना करने की तैयारी से आए थे। इस दौरान वे टूटे हुए ट्रैक की तरफ जाने लगे तो अफसरों ने बहाना बनाते हुए कहा कि साहब, यहां भीड़ ज्यादा है। लाइन के पास दलदल है। जिसके बाद अपने विभाग के राज्यमंत्री को गुमराह करते हुए रेलवे अधिकारियों ने टूटे हुए ट्रैक वाले प्वाइंट पर नहीं जाने दिया, जहां पटरी जोड़ने के औजार भी रखे हुए थे।
ट्रेन हादसे पर यह बोले सरकार के मंत्री
घायलों का सही इलाज ही प्राथमिकता
यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। मैं कोई राजनीतिक बात नहीं करूंगा। हर किसी घायल का सही इलाज हो जाए यह प्राथमिकता है। हादसा क्यों हुआ इसकी अभी कोई जानकारी मुझे नहीं दी है। बोर्ड के वरिष्ठ मेंबर जांच कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों को रेलवे के परिचालन के बारे में समझना होगा। रेलवे के अधिकृत अधिकारी बयान देंगे तभी यह तय होगा कि कैसे यह हादसा हुआ। -मनोज सिन्हा, रेल राज्य मंत्री
यह अभी जांच का विषय
सरकार का पूरा जोर इस पर है कि कैसे घायलों को तत्परता से उपचार दिया जाए। यही कारण है कि सभी विभागों की टीमें बचाव में जुट गई हैं। हादसा कैसे हुआ यह तो जांच का विषय है। लेकिन पहले घायलों को बचाना होगा। -संजीव बालियान, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री
घटना की गहराई से जांच हो
मुख्यमंत्री ने इस हादसे को लेकर बेहद गंभीरता दिखाई है। उनके निर्देश पर ही तत्काल हम साथी मंत्री सुरेश राणा के साथ यहां पहुंचे हैं। सीएम सीधे इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं। सभी अस्पतालों में अलर्ट हैं। एक-एक घायल का सही ढंग से उपचार होगा। आर्थिक मदद भी की जा रही है। रेलवे के अधिकारियों को कहा गया है कि घटना की गहराई से जांच हो। -सतीश महाना, औद्योगिक विकास मंत्री
जांच बताएगी किसकी लापरवाही
मेरे अपने विभाग के अलावा अन्य विभागों, निजी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों तक की एंबुलेंस मौके पर भेजी गई है। हादसा हुआ है। निश्चित रूप से जांच में पता चल जाएगा कि किसकी लापरवाही है। लेकिन पहले घायलों को बचाना होगा। -सुरेश राणा, गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्यमंत्री