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पूर्व भाजपा सांसद की हत्या आठ साल बाद भी रहस्य, जांच में उलझता रहा हत्याकांड 

Thu, 02 Aug 2018 07:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 02 Aug 2018 07:12 PM IST
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murder of former BJP MP becomes mystery for police after Eight years long
भाजपा सांसद अमरपाल सिंह हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला

तीन बार सांसद रह चुके के ठाकुर अमरपाल सिंह को कौन नहीं जानता। तारीख 15 नवंबर 2010 और दिन सोमवार था। सुबह 11 बजे एक सूचना आग की तरफ फैली कि पूर्व सांसद की बदमाशों ने मवाना के जंगल में गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी मवाना की तरफ दौड़े तो नेताओं और जनता का पूर्व सांसद के साकेत स्थित आवास पर तांता लगने लगा। परिजनों में कोहराम मच गया। वर्तमान में गृह मंत्री राजनाथ सिंह समेत सैकड़ों की संख्या में सभी राजनीति दलों के नेता पूर्व सांसद के परिवार को सांत्वना देने उनके आवास पहुंचे।

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संसद में गूंजते ही हत्याकांड का खुलासा 
पूर्व सांसद अपने गांव ढ़िकौली मवाना ईंट भट्ठे पर जा रहे थे। गाड़ी उनका ड्राइवर मनोज चला रहा था। बदमाश आए और ड्राइवर मनोज से भिड़ गए। उसके बाद पूर्व सांसद को गोली मारकर फरार हो गए। पुलिस मामले को रोडरेज का बताती रही। यह सनसनीखेज हत्याकांड संसद में उठा तो पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने खुलासा किया कि पूर्व सांसद की हत्या को संदीप निवासी ग्राम लिलोन खेड़ी शामली ने जेल में बंद कुलदीप निवासी सरूरपुर के कहने पर अंजाम दिया था। 
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दो के खिलाफ लगी थी चार्जशीट 
मुजफ्फरनगर पुलिस ने 25 फरवरी 2011 को मुजफ्फरनगर पुलिस ने 50 हजार के कुख्यात बदमाश अनिल सिसौली और उसके साथी राजेंद्र उर्फ भोला भभीसा को मुठभेड़ में ढेर किया। इसके बाद पुलिस ने दावा कर दिया कि मारे गए बदमाश पूर्व सांसद की हत्या में शामिल थे। नामजद रामसूत और ओमसूत भी आपसी रंजिश में मारे गए। इन्हें भी पुलिस ने हत्या में आरोपी बनाया। मवाना पुलिस ने सिर्फ दो आरोपी संदीप निवासी ग्राम लिलोन खेड़ी शामली व कुलदीप निवासी सरूरपुर को आरोपी बनाया। मई 2011 को चार्जशीट दाखिल की।

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जांच में उलझता रहा हत्याकांड 
पूर्व सांसद की हत्या में पुलिस की जांच जितनी आगे बढ़ी, उतनी ही उलझती रही। पुलिस ने आरोपी संदीप को जेल भेजा था। जबकि पुलिस की जांच में तथ्य सामने आया कि हत्या के वक्त आरोपी संदीप मेरठ जेल में ही चोरी के मामले में बंद था। पुलिस के मुताबिक संदीप ने बताया कि आरोपी कुलदीप ने कहा था कि जेल से बाहर निकलकर पूर्व सांसद के भाई यशपाल सिंह को फोन करके धमकी दे देना। पुलिस उसे पकड़ेगी तो जुर्म कुबूल कर लेना। हत्या के दौरान वह जेल में था तो जांच में वह बेकसूर साबित हो जाएगा। 

पूर्व सांसद ठा. अमरपाल सिंह की हत्या को आठ साल होने वाले हैं। पीड़ित परिवार को आज भी इंसाफ का इंतजार है। पूर्व सांसद के परिवार का कहना कि पुलिस ने इस मामले में लापरवाही की। खुद की लापरवाही को छुपाने के लिए केस को उलझा दिया। अधूरा खुलासा किया। यह मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है। 

कैसे और क्यों हुई हत्या 
ठाकुर अमरपाल सिंह की हत्या कैसे और क्यों हुई। यह सवाल पीड़ित परिवार व मेरठ की जनता में जेहन में आज भी उठते है। जिन आरोपियों को पुलिस ने अपनी जांच में मुल्जिम बनाया, उनसे अमर पाल सिंह की लाइसेंसी रिवाल्वर बरामद नहीं की। वारदात में प्रयुक्त सेंट्रो का भी पुलिस सुराग नहीं लगा सकी। इस मामले में कई तेजतर्रार आईपीएस को भी लगाया था, बावजूद खुलासा अधूरा बताया गया।

बताया रोडरेज,खोला लूट पर 
पूर्व सांसद की हत्या के पीछे पुलिस ने रोडरेज बताया था। लेकिन बाद में मवाना पुलिस ने हत्या के पीछे लूट करना बताया। जिसके चलते पुलिस ने आरोपी संदीप और कुलदीप के खिलाफ धारा 396, 308, 506, 203 आइपीसी और 120बी की धारा लगाई गई। 25 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पूर्व सांसद की हत्या के मामले में अलग-अलग चर्चाएं चलती रही। खुलासे में भी कई झोल बताए। सीनियर अधिवक्ता अमित दीक्षित ने बताया कि आरोपियों से पूर्व सांसद की लाइसेंसी रिवाल्वर और हत्या में प्रयुक्त आरोपियों की सेंट्रो बरामद नहीं हुई। उसके चलते केस की बुनियाद कमजोर हो रही है। 

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