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UP: माफिया डॉन के घर रची गई थी मां-बेटे के मर्डर की साजिश, सामने आया था नाम, एनकाउंटर में ढेर हुआ था विकास जाट

Wed, 06 Sep 2023 09:15 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 06 Sep 2023 09:15 PM IST
सार

Meerut Double Murder Case : मेरठ में हुई मां-बेटे की हत्या के मामले में माफिया डॉन सुशील मूंछ और उसके बेटे टोनी का नाम सामने आया था। सुशील मूंछ के घर पर ही साजिश रची गई थी।

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Murder Case: conspiracy was hatched to kill mother, son at house of mafia don, Vikas was killed in encounter
कुख्यात सुशील मूंछ के बेटे टोनी को ले जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीवा हत्याकांड की विवेचना के दौरान वारदात की साजिश में सुशील मूंछ के शामिल होने की बात भी सामने आ चुकी है। माफिया डॉन सुशील मूंछ और उसके बेटे टोनी का नाम मेरठ के परतापुर के सोहरका में 24 जनवरी 2018 को हुए डबल मर्डर में भी नाम सामने आया था। सुशील मूंछ का नेटवर्क यूपी के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान में भी रहा है।

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24 जनवरी 2018 को सोहरका निवासी निछत्तर कौर और उसके बेटे बलविंदर की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह सारी घटना कैमरे में कैद हो गई थी। इसमें एक आरोपी तरुण को घटना के दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था। कैमरे में दिखाई देने वाले शूटर के तौर पर मुख्य आरोपी विनय उर्फ मांगे, विकास जाट एवं मोनू के नाम प्रकाश में आए थे। मांगे ने दिल्ली में सरेंडर कर दिया था और विकास जाट को मुजफ्फरनगर पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। सुशील मूंछ और उसके बेटे ने भी अहम भूमिका निभाई थी।

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सुशील मूंछ के घर पर ही मां-बेटे के मर्डर की साजिश रची गई थी। इस मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ था। पुलिस के मुताबिक, सुशील मूंछ और उसके बेटे टोनी ने ही मां-बेटे के मर्डर की साजिश रची थी। पुलिस के अनुसार, वारदात से पहले मुजफ्फरनगर में सुशील मूंछ के गांव मथेड़ी में पंचायत हुई थी। इस पंचायत में डॉन सुशील मूंछ सरपंच बना और उसका बेटा टोनी भी शामिल था। 15 लाख में सुशील मूंछ ने फैसला करने की बात कही, लेकिन मां-बेटे ने गवाही न देने की बात से इन्कार कर दिया था। इसके बाद दूसरी पंचायत में सुशील मूंछ ने कहा था कि मां-बेटे को रास्ते से हटा दो। फिर दोनों की हत्या कर दी गई।

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किसी दौर में सुशील मूंछ का खौफ ऐसा था कि उसका नाम सुनते ही अफसरों की नींद उड़ जाती थी। जरायम की दुनिया में उसे लंगड़ा तो कोई प्रधानजी भी कहता था। सुशील मूंछ के नाम की भी अलग कहानी है। बताते हैं कि उसकी क्लास में दो सुशील थे। इसलिए नाम सुशील मूंछ रखा था। एक बार सुशील के पैर में गोली लगी थी। इसके बाद वह लंगड़ाकर चलने लगा और उसका नाम सुशील लंगड़ा भी पड़ गया था। मुजफ्फरनगर के मथेड़ी गांव का प्रधान रहने के कारण उसे प्रधानजी भी कहा जाता रहा।

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