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बाहर मत खेलो 'मुन्ना', ...शहर की हवा खराब है, बच्चों को इनडोर गेम की सलाह दे रहे शिक्षक और चिकित्सक

Sat, 02 Nov 2019 02:12 AM IST
मेरठ ब्यूरो शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sat, 02 Nov 2019 02:12 AM IST
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Munna play indoor games right now ... because the air is bad
मास्क पहने स्कूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला

बच्चों को हमेशा कमरा छोड़कर आउटडोर गेम खेलने की सलाह देने वाले मम्मी-पापा और डॉक्टर अंकल इन दिनों इसके उलट हिदायत दे रहे हैं। स्कूल में मैडम कहती हैं, बच्चों मैदान में नहीं बल्कि रूम में इनडोर गेम खेलो। घर पर मम्मी कहती हैं बेटा बाहर मत जाओ। हमेशा बाहर मैदान में खेलने और दौड़ने की सलाह देने वाले चिकित्सक भी कमरे के अंदर बैठकर मनपसंद खेल खेलने की सलाह दे रहे हैं।

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खतरनाक स्मॉग के कारण हर कोई बच्चों को बाहर न निकलने की हिदायत दे रहा है। स्कूलों ने भी सीबीएसई के नियमानुसार शुरू किए स्पोर्ट्स एक्टिविटी पीरियड को इनडोर गेम्स पीरियड में बदल दिया है, ताकि बच्चे को बाहर की हवा न लगे और बच्चे स्वस्थ रहें। स्मॉग में मौजूद पीएम 2.5 व पीएम 10 का सबसे ज्यादा और जल्दी असर बच्चों पर ही होता है।

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दिल्ली सरकार ने तो प्रदूषण की वजह से पांच दिनों के लिए स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। शहर में बाल रोग विशेषज्ञों के पास जितने मरीज सालभर में आते हैं, लगभग उतने मरीज पिछले सात दिनों में आ गए। इसमें ज्यादा संख्या स्कूली बच्चों की है। जिन्हें सांस लेने में परेशानी, नजला, जुकाम व आंखों में जलन की समस्या हो रही है।

वर्ग------प्रति मिनट सांस दर
नवजात शिशु- 30-60 बार
छह माह शिशु- 25-40- बार
01 साल के बच्चे- 20-40 बार
03 साल के बच्चे- 20-30 बार
6 साल के बच्चे- 12-25 बार
10 साल के बच्चे- 12-20 बार

प्रमुख तथ्य
- एक सामान्य व्यक्ति एक मिनट में 12 से 15 बार संास लेता, छोड़ता है।
- सामान्य व्यक्ति दिनभर में 21,600 बार सांस लेता, छोड़ता है।
- जल्दी-जल्दी सांस लेना, सांसें तेज चलने के कारण फेफड़ों की क्षमता प्रभावित होती है जो मौत का कारण बन सकता है।

इनडोर एक्टिविटी इस समय बेस्ट
हवा इतनी टॉक्सिक हो चुकी है कि बाहर रहना खतरे से खाली नहीं है। स्मॅाग से बचने का यही उपाय है कि ज्यादा वक्त कमरे के अंदर गुजारा जाए। बच्चे खासतौर से बाहर निकलने से परहेज करें, कमरे के अंदर ही खेलें। बच्चों की इम्युनिटी बहुत डाउन होती है, इसलिए हवा में घुले घातक रसायन बच्चों पर तेजी से असर डालकर उन्हें बीमार करते हैं। -डॉ. अमित उपाध्याय, शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ

अंदर रहें और मॉस्क पहनें बच्चे
बच्चों के फेफड़ वयस्कों के फेफड़ों से बड़े होते हैं। इसलिए बच्चा एक बार में काफी मात्रा में सांस के माध्यम से हवा खींचता है। जितनी हवा बच्चा खींचेेगा, उसके साथ उतने ही प्रदूषक तत्व उसके फेफड़ों में जाते हैं। 
फेफड़ों के निचले भाग में पीएम 2.5 के कण जम जाते हैं, जो अस्थमा, ब्रोंकाइटिस के अलावा कैंसर का कारण भी हैं। खेलते समय बच्चा और तेजी से सांस लेता है, इसलिए हवा का शरीर में प्रवेश दोगुना तक बढ़ने से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अच्छा है कि बच्चे अंदर रहें, मास्क पहनें। -डॉ. वीएन त्यागी, वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ

सिर्फ इनडोर गेम्स की अनुमति
हवा खराब है, पटाखों के कारण काफी प्रदूषण बढ़ गया है। बच्चों को इनडोर गेम्स ही खेलने की अनुमति दी है। ताकि बच्चे स्वस्थ रहें, खराब हवा के संपर्क में न आएं, असेंबली भी कमरों में करा रहे हैं। -विनीत सूद, प्रिंसिपल विद्या ग्लोबल स्कूल

स्मॉग के कारण फिलहाल आउटडोर एक्टिविटी को रोक दिया है, ताकि बच्चे सुरक्षित रहें। स्पोर्ट्स रूम में इनडोर एक्टिविटी चालू हैं, जिसमें बच्चे भाग ले रहे हैं। मास्क लगाकर आना भी आवश्यक कर दिया है।
ए डीन, प्रिंसिपल सेंट थॉमस स्कूल

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