मुन्ना बजरंगी हत्या: किसके थे बागपत जेल में मिले मोबाइल, जांच में छूटे अफसरों के पसीने
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बागपत जिला कारागार से सुनील राठी के शिफ्ट होते ही छह मोबाइल जेल प्रशासन को मिले। बरामद किए गए मोबाइल किस-किसके हैं, इस विषय में पुलिस जांच में जुटी है। पुलिस की परेशानी यह है कि अधिकतर मोबाइल में सिम ही नहीं है। बंदियों ने या तो सिम तोड़कर फेंक दिए या फिर छिपा लिए। जेल प्रशासन इसकी जांच में जुटा हुआ है।
मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद सुनील राठी को बागपत से फतेहगढ़ जेल शिफ्ट किया गया। राठी के रवाना होने के बाद पुलिस ने पड़ताल शुरू की। जेल में चेकिंग की तो छह मोबाइल बरामद हुए हैं, इनमें दो मोबाइल एंड्रायड बताए गए हैं। इसके अलावा चम्मच से बनाए गए चाकू भी मिले। जेल प्रशासन को मोबाइल तो बैरकों के बाहर पड़े मिले, लेकिन यह किसके हैं, इसकी जानकारी नहीं मिली।
पुलिस को यह भी अंदेशा है कि बड़े शातिर अपराधियों ने अपने गुर्गों को छिपाने के लिए यह मोबाइल दिए। समस्या यह भी है कि अधिकतर मोबाइल में सिम ही नहीं मिले हैं। ऐसे में सवाल यह कि मोबाइल पर कौन सा सिम चल रहा था, इसकी पड़ताल समय पर कैसे हो। हालांकि पुलिस विशेषज्ञों की मदद से जुट गई है, लेकिन जांच में देरी होगी। बंदी कह रहे हैं कि मोबाइल उनके नहीं है। ऐसे में पुलिस को यह पता लगाने में पसीने छूट रहे हैं कि जो मोबाइल मिले, वह किन-किन बंदियों के हैं और वह किससे क्या बात करते हैं।
पहली बार नहीं मिले मोबाइल
जिला जेल में मोबाइल मिलने का मामला पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले भी मंडलायुक्त के निर्देश पर कराई गई जांच में कई मोबाइल मिले। इनमें कई एंड्रायड रहे। चेकिंग शुरू होते ही बंदियों ने अपनी बैरकों के बाहर मोबाइल फेंकने शुरू कर दिए थे। इसमें भी अभी यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि पिछली बार मिले मोबाइल का प्रयोग कौन कर रहा था।
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