{"_id":"57af8a7b4f1c1b4d37ee451e","slug":"mtp-programe-in-meerut","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘जितना डुबोया मुझको मैं उभरता चला गया’ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘जितना डुबोया मुझको मैं उभरता चला गया’
अमर उजाला/मेरठ
Updated Sun, 14 Aug 2016 03:18 AM IST
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अमर उजाला के कार्यक्रम मां तुझे प्रणाम के तहत आयोजित कवि सम्मेलन में मुशायरे में मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला और केएल इंटरनेशनल स्कूल की प्रस्तुति मां तुझे प्रणाम के कार्यक्रमों की शान कवि सम्मेलन और मुशायरे में शनिवार रात जमकर धमाल हुआ। वीर रस का स्वाद, हास्य का एहसास, गीतों की महक और शायरी के अंदाज से देशभक्ति के तराने ऐसे निकले कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। एक के बाद एक शानदार प्रस्तुति से देर रात तक भैसाली मैदान में अदब के शायरों और वरिष्ठों कवियों की महफिल सजी।
कवि सम्मेलन और मुशायरे की शुरुआत चर्चित शायर खुर्शीद हैदर के अल्फाज से हुई। ‘जिंदा बाद ए वतन नज्म’ से उन्होंने माहौल जोशीला बना दिया। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला के नाम शेर पढ़ा, ‘अपने ख्वाबों से प्यार क्यों न करें, हमने आंखों में इनको पाला है, उन अंधेरों को खबर कर दो, ये उजाला अमर उजाला है’।
इश्क की गली में एंट्री करते हुए अर्ज किया मेरी उनसे मुलाकात हो गई होती, आंखों ही आंखों में बात हो गई होती, मैं बादलों पर नाम तेरा लिख देता तो मेेेेरे गांव में बरसात हो गई होती। इसके बाद कहा खुशियों के तराने में जरा देर लगेगी, रूठे हैं, मनाने में जरा देर लगेगी, तोहमत का लगाना आसान है, दश्तार बचाने में जरा देर लगेगी। गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक, अंबर में तो वे ही उड़ेंगे जिनके खुद के पर होंगे। कार्यक्रमों में एडको डेवलेपर्स, एपेक्स, द अध्ययन स्कूल, दयाल ग्रुप, एसडीएस ग्लोबल हॉस्पिटल, एआरआईएमटी कॉलेज, न्यू लक्ष्मी साउंड, दुर्गा ड्रेस एंपोरियम, वर्धमान बुक्स, सम्राट हैवेंस और कश्मीर स्टूडियो का सहयोग है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, सांसद राजेंद्र अग्रवाल और सीसीएसयू के कुलपति प्रोफेसर एनके तनेजा रहे।
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आप आंधी हैं क्या मुझको उड़ा ले जाएंगे...
वसीम बरेलवी के माइक संभालते ही महफिल जवान हो गई। अर्ज किया... आते हैं आने दो ये तूफान क्या ले जाएंगे, मैं तो जब डरता कि मेरा हौसला ले जाएंगे, जिस जमीं पर खड़ा हूं वो मेरी पहचान है, आप आंधी हैं क्या मुझको उड़ा ले जाएंगे, आप बस किरदार हैं, अपनी हदें पहचान लीजिए, वरना फिर एक दिन कहानी से निकाले जाएंगे। इसके आगे बढ़े जितना डुबोया मुझको मैं उभरता चला गया, वो पैरवी झूठ की करता चला गया, लेकिन उसका चेहरा उतरता चला गया, हद से बड़ी उड़ान की ख्वाहिश की तो यूं लगा, जैसे कोई परों को कतरता चला गया। मयखाने के दर्द को किसने जाना है, सबको अपनी-अपनी प्यास बुझाना है, अंदर के सारे रिश्ते जब बिखरे हो, घर आंगन की बात को बाहर जाना है।
भारतीयों को वे ही उधार देते हैं...
हास्य कवि तेज नारायण शर्मा ने खूब गुदगुदाया। कहा... भारतीय लोगों को वे ही उधार देते हैं, जिनका पुनर्जन्म में विश्वास है। व्यंग्य में वह आगे बढ़े डीएनए की सही रिपोर्ट आते ही किन्नर एनडी तिवारी से बधाई मांगने पहुंचे, क्योंकि किन्नर ही जानते हैं भले ही मतदान फर्जी हुआ हो, प्रत्याशी जीता हुआ है।
दीपक लड़ता है अंधियारों की सेना से...
गीतकार मनोज कुुमार मनोज ने महफिल को वीर रस के नाम कर दिया। उन्होंने कहा दीपक लड़ता है अंधियारों की सेना से, उजियारा भरा तब सुखद सवेरा आता है, जिसने मौतों के बीच मर्सिया गाया हो, वो ही जन्मों पर गीत प्रेम से गाता है।
तिरंगे में लिपटकर लाल घर आया, सलामी दो...
प्रसिद्ध गीतकार दिनेश रघुवंशी की जोशीली प्रस्तुति ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए। इन पंक्ति ने जोश भर दिया... मिटा मातृभूमि पर पीर घर आया सलामी दो, वो अपना कर आया फर्ज पूरा सलामी दो, मां बोली तिरंगे में लिपटकर लाल घर आया सलामी दो। नेताओं पर तंज कसा... वतन के दुश्मनों से रात दिन पूछती है वर्दी, सभी से एक ही प्रश्न पूछती है वर्दी, पुराने सूट नेताओं के करोड़ों में बिकते, कभी क्यों कचरे में लहू से सनी मिलती है वर्दी। कन्हैया प्रकरण पर कहा अमर बलिदानों की गाथा कन्हैया तू क्या समझेगा, हमारे सैनिकों के दिल का जज्बा तू क्या समझेगा, लगाकर जान की बाजी वो करते हैं देश की रक्षा, लहू देकर लहराते हैं तिरंगा तू क्या समझेगा।
कच्चे मकानों में भी सच्चे लोग रहते थे...
हास्य कवि प्रवीण शुक्ल ने कविता पढ़ी। समय था वो भी हर ओर अच्छे लोग रहते थे। जलन, ईर्ष्या, घुटन से दूर लोग रहते थे। आज महलों में पसरा हुआ है झूठ का साया, कभी कच्चे मकानों में भी सच्चे लोग रहते थे।
सिंहों की पेशी करवा दी चूहों के दरबार में...
आखिरी में ओज के कवि डॉ. हरिओम पंवार की पंक्तियों से देशभक्ति की धारा ऐसी निकले की दर्शक उसमें बह गए। उन्होंने पंक्ति सुनाई..... जैसे पीपल साया मांग रहा हो कीकर के पेड़ों से, जैसे कोई शेर सुरक्षा मांग रहा हो भेड़ों से, किसका खून नहीं खोलेगा, पढ़-पढ़कर अखबारों में, सिंहों की पेशी करवा दी चूहों के दरबार में।
झाला ने सबको हंसाया
हास्य रस के कवि संजय झाला ने अपने अंदाज से भरपूर मनोरंजन किया। उनका मिमिक्री और चुटीला अंदाज सबको भाया। उन्होंने राजनीति से जुड़े लोगों पर अपने हंसीले अंदाज में टिप्पणी भी की।
इन्होंने किया उद्घाटन
कवि सम्मेलन का उद्घाटन विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, विधायक संगीत सोम, एडीएम सिटी एसके दूबे, एसपी सिटी ओमप्रकाश, प्रतीश ठाकुर ने किया। केएमसी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सुनील गुप्ता और केएल इंटरनेशनल के चेयरमैन मनमीत खुराना ने अतिथियों का स्वागत किया।
इनकी रही उपस्थिति
विधायक रविंद्र भड़ाना, सपा जिला अध्यक्ष जयवीर सिंह, पूर्व मंत्री अयूब अंसारी, रफीक अंसारी, आदिल चौधरी, इसरार सैफी, शैलेंद्र अग्रवाल, संगीता राहुल, ओमपाल गुर्जर, चैतन्य देव स्वामी, शहजाद मलिक, वसीम राजा, भाजपा नेताओं में जिला अध्यक्ष शिव कुमार राणा, विनीत शारदा अग्रवाल, कमलदत्त शर्मा, अजय गुप्ता, आलोक सिसौदिया, कमल ठाकुर, पवन मित्तल, विजय आनंद मौजूद रहे। संयुक्त निदेशक अल्पसंख्यक एसएन पांडे, कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनय प्रधान, एसपी सिटी ओमप्रकाश, सीओ कोतवाली रणविजय सिंह, इंस्पेक्टर सदर गजेंद्रपाल यादव, दुशहरण शर्मा, डॉ. राजकुमार सांगवान, इंद्रपाल सांगवान, रजनीश कौशल, मेजर हिमांशु, राम कुमार असनावडे, संदीप रेवड़ी, शमशुद्दीन कुरैशी, मोहम्मद चांद, शाहजहां सैफी, मो. सज्जू, आईए खान मौजूद रहे।
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कवि सम्मेलन और मुशायरे की शुरुआत चर्चित शायर खुर्शीद हैदर के अल्फाज से हुई। ‘जिंदा बाद ए वतन नज्म’ से उन्होंने माहौल जोशीला बना दिया। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला के नाम शेर पढ़ा, ‘अपने ख्वाबों से प्यार क्यों न करें, हमने आंखों में इनको पाला है, उन अंधेरों को खबर कर दो, ये उजाला अमर उजाला है’।
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इश्क की गली में एंट्री करते हुए अर्ज किया मेरी उनसे मुलाकात हो गई होती, आंखों ही आंखों में बात हो गई होती, मैं बादलों पर नाम तेरा लिख देता तो मेेेेरे गांव में बरसात हो गई होती। इसके बाद कहा खुशियों के तराने में जरा देर लगेगी, रूठे हैं, मनाने में जरा देर लगेगी, तोहमत का लगाना आसान है, दश्तार बचाने में जरा देर लगेगी। गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक, अंबर में तो वे ही उड़ेंगे जिनके खुद के पर होंगे। कार्यक्रमों में एडको डेवलेपर्स, एपेक्स, द अध्ययन स्कूल, दयाल ग्रुप, एसडीएस ग्लोबल हॉस्पिटल, एआरआईएमटी कॉलेज, न्यू लक्ष्मी साउंड, दुर्गा ड्रेस एंपोरियम, वर्धमान बुक्स, सम्राट हैवेंस और कश्मीर स्टूडियो का सहयोग है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, सांसद राजेंद्र अग्रवाल और सीसीएसयू के कुलपति प्रोफेसर एनके तनेजा रहे।
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वसीम बरेलवी के माइक संभालते ही महफिल जवान हो गई। अर्ज किया... आते हैं आने दो ये तूफान क्या ले जाएंगे, मैं तो जब डरता कि मेरा हौसला ले जाएंगे, जिस जमीं पर खड़ा हूं वो मेरी पहचान है, आप आंधी हैं क्या मुझको उड़ा ले जाएंगे, आप बस किरदार हैं, अपनी हदें पहचान लीजिए, वरना फिर एक दिन कहानी से निकाले जाएंगे। इसके आगे बढ़े जितना डुबोया मुझको मैं उभरता चला गया, वो पैरवी झूठ की करता चला गया, लेकिन उसका चेहरा उतरता चला गया, हद से बड़ी उड़ान की ख्वाहिश की तो यूं लगा, जैसे कोई परों को कतरता चला गया। मयखाने के दर्द को किसने जाना है, सबको अपनी-अपनी प्यास बुझाना है, अंदर के सारे रिश्ते जब बिखरे हो, घर आंगन की बात को बाहर जाना है।
भारतीयों को वे ही उधार देते हैं...
हास्य कवि तेज नारायण शर्मा ने खूब गुदगुदाया। कहा... भारतीय लोगों को वे ही उधार देते हैं, जिनका पुनर्जन्म में विश्वास है। व्यंग्य में वह आगे बढ़े डीएनए की सही रिपोर्ट आते ही किन्नर एनडी तिवारी से बधाई मांगने पहुंचे, क्योंकि किन्नर ही जानते हैं भले ही मतदान फर्जी हुआ हो, प्रत्याशी जीता हुआ है।
दीपक लड़ता है अंधियारों की सेना से...
गीतकार मनोज कुुमार मनोज ने महफिल को वीर रस के नाम कर दिया। उन्होंने कहा दीपक लड़ता है अंधियारों की सेना से, उजियारा भरा तब सुखद सवेरा आता है, जिसने मौतों के बीच मर्सिया गाया हो, वो ही जन्मों पर गीत प्रेम से गाता है।
तिरंगे में लिपटकर लाल घर आया, सलामी दो...
प्रसिद्ध गीतकार दिनेश रघुवंशी की जोशीली प्रस्तुति ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए। इन पंक्ति ने जोश भर दिया... मिटा मातृभूमि पर पीर घर आया सलामी दो, वो अपना कर आया फर्ज पूरा सलामी दो, मां बोली तिरंगे में लिपटकर लाल घर आया सलामी दो। नेताओं पर तंज कसा... वतन के दुश्मनों से रात दिन पूछती है वर्दी, सभी से एक ही प्रश्न पूछती है वर्दी, पुराने सूट नेताओं के करोड़ों में बिकते, कभी क्यों कचरे में लहू से सनी मिलती है वर्दी। कन्हैया प्रकरण पर कहा अमर बलिदानों की गाथा कन्हैया तू क्या समझेगा, हमारे सैनिकों के दिल का जज्बा तू क्या समझेगा, लगाकर जान की बाजी वो करते हैं देश की रक्षा, लहू देकर लहराते हैं तिरंगा तू क्या समझेगा।
कच्चे मकानों में भी सच्चे लोग रहते थे...
हास्य कवि प्रवीण शुक्ल ने कविता पढ़ी। समय था वो भी हर ओर अच्छे लोग रहते थे। जलन, ईर्ष्या, घुटन से दूर लोग रहते थे। आज महलों में पसरा हुआ है झूठ का साया, कभी कच्चे मकानों में भी सच्चे लोग रहते थे।
सिंहों की पेशी करवा दी चूहों के दरबार में...
आखिरी में ओज के कवि डॉ. हरिओम पंवार की पंक्तियों से देशभक्ति की धारा ऐसी निकले की दर्शक उसमें बह गए। उन्होंने पंक्ति सुनाई..... जैसे पीपल साया मांग रहा हो कीकर के पेड़ों से, जैसे कोई शेर सुरक्षा मांग रहा हो भेड़ों से, किसका खून नहीं खोलेगा, पढ़-पढ़कर अखबारों में, सिंहों की पेशी करवा दी चूहों के दरबार में।
झाला ने सबको हंसाया
हास्य रस के कवि संजय झाला ने अपने अंदाज से भरपूर मनोरंजन किया। उनका मिमिक्री और चुटीला अंदाज सबको भाया। उन्होंने राजनीति से जुड़े लोगों पर अपने हंसीले अंदाज में टिप्पणी भी की।
इन्होंने किया उद्घाटन
कवि सम्मेलन का उद्घाटन विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, विधायक संगीत सोम, एडीएम सिटी एसके दूबे, एसपी सिटी ओमप्रकाश, प्रतीश ठाकुर ने किया। केएमसी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सुनील गुप्ता और केएल इंटरनेशनल के चेयरमैन मनमीत खुराना ने अतिथियों का स्वागत किया।
इनकी रही उपस्थिति
विधायक रविंद्र भड़ाना, सपा जिला अध्यक्ष जयवीर सिंह, पूर्व मंत्री अयूब अंसारी, रफीक अंसारी, आदिल चौधरी, इसरार सैफी, शैलेंद्र अग्रवाल, संगीता राहुल, ओमपाल गुर्जर, चैतन्य देव स्वामी, शहजाद मलिक, वसीम राजा, भाजपा नेताओं में जिला अध्यक्ष शिव कुमार राणा, विनीत शारदा अग्रवाल, कमलदत्त शर्मा, अजय गुप्ता, आलोक सिसौदिया, कमल ठाकुर, पवन मित्तल, विजय आनंद मौजूद रहे। संयुक्त निदेशक अल्पसंख्यक एसएन पांडे, कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनय प्रधान, एसपी सिटी ओमप्रकाश, सीओ कोतवाली रणविजय सिंह, इंस्पेक्टर सदर गजेंद्रपाल यादव, दुशहरण शर्मा, डॉ. राजकुमार सांगवान, इंद्रपाल सांगवान, रजनीश कौशल, मेजर हिमांशु, राम कुमार असनावडे, संदीप रेवड़ी, शमशुद्दीन कुरैशी, मोहम्मद चांद, शाहजहां सैफी, मो. सज्जू, आईए खान मौजूद रहे।