मेडिकल अस्पताल में पहुंच गई एमआरआई मशीन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीएम की घोषणा का यह हाल
मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन लगाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने नवंबर 2012 में की थी, लेकिन इसमें तीन साल से अधिक वक्त लगने का इसका अंदाजा किसी को नहीं था। हालांकि सीएम की घोषणा के तत्काल बाद ही इसके अनुमानित खर्च 9.50 करोड़ रुपये में से पांच करोड़ रुपये जारी भी कर दिया गए थे, लेकिन कॅालेज और शासन स्तर से टेंडर की प्रक्रिया लटकी रही।
तीन बार टेंडर फेल
पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता के कार्यकाल में तीन बार टेंडर की प्रक्रिया फेल हुई। इसके बाद शासन स्तर से टेंडर जारी किया गया, लेकिन टेंडर जारी होने के करीब आठ माह बाद एमआरआई मशीन लगने की उम्मीद जगी।
कस्टम ड्यूटी में भी उलझे
कभी रोड परमिट गलत पते का बनवाने तो कभी कस्टम ड्यूटी भरने से कंपनी ने इंकार कर दिया। बीते हफ्ते ही टेंडर की फाइल का अवलोकन किया गया तो पता चला कि टेंडर में कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है तो उसके बाद डीजी चिकित्सा शिक्षा द्वारा एनओसी जारी की गई। वहीं, बीते बृहस्पतिवार मेडिकल पहुंची एमसीआई की टीम ने भी चिकित्सा से जुड़े तमाम संसाधन उपलब्ध ना होने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। आखिरकार रविवार को दिल्ली एयरपोर्ट से एमआरआई मशीन मेरठ पहुंच ही गई।
सीटी स्कैन अधर में
मेडिकल में एमआरआई से ज्यादा सीटी स्कैन मशीन की जरूरत है, लेकिन सीटी स्कैन मशीन लगने की स्थिति अधर में है। बता दें कि मेडिकल अस्पताल में अधिकांश मरीजों का सीटी स्कैन कराया जाता है, जबकि एमआरआई दो या तीन विभागों की तरफ से कराया जाता है। इसकी सुविधा फिलहाल जिला सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध है।
कोट
एमआरआई की मशीन आ गई है। जल्द ही मशीन को फिट कर संचालित किया जाएगा। सीटी स्कैन मशीन भी जल्द मंगवाने के लिए कंपनी से बात हुई है। - डॉ. सुभाष सिंह, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज