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मां ने दी गवाही : रविता-अमरदीप ने आपत्तिजनक हालत में पकड़े जाने के बाद ली मेरे बेटे की जान

Mon, 05 Oct 2026 11:35 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 11:35 PM IST
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Mother testifies: Ravita and Amardeep killed my son after being caught in a compromising position.
अमित की मां ने कोर्ट में दर्ज कराए गए बयानों में कहा- बेटे को बताने के बाद शुरू हो गया था विवाद
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बहसूमा के अमित की हत्या कर सर्पदंश से मौत दर्शाने के केस में कल आएगा कोर्ट का निर्णय
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में अमित की हत्या के मामले में मां मुनेश ने कोर्ट में गवाही दी कि उन्होंने रविता और अमरदीप को आपत्तिजनक पकड़ लिया था। विरोध पर आरोपी भाग गया। इसकी जानकारी बेटे अमित कश्यप उर्फ मिक्की (25) को दी तो दंपती में झगड़ा होने लगा था। इसके बाद रविता ने अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर अमित को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी। आरोप है कि दोनों आरोपियों ने मिलकर 12 अप्रैल 2025 की रात अमित की गला दबाकर हत्या कर दी और बिस्तर पर घोड़ा पछाड़ सांप छोड़कर सर्पदंश से मौत दर्शाने की कोशिश की। इस केस में अपर सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर बुधवार को फैसला सुनाएंगे।

अकबरपुर सादात में अमित उर्फ मिक्की का शव 13 अप्रैल 2025 की सुबह उसके बिस्तर पर पड़ा मिला था। अमित के शव के नीचे एक जिंदा सांप दबा हुआ था। अमित के शरीर पर सांप के डसने के 10 निशान थे। उसकी पत्नी रविता ने दावा किया था कि अमित की मौत सर्पदंश से हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि अमित की मौत सांप के डसने से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई है। इससे पुलिस को गला दबाकर हत्या का अंदेशा हुआ।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अमित के भाई मोनू कश्यप ने रविता और अमरदीप के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने अमित की पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो शुरुआत में दोनों ने गुमराह करने की कोशिश की थी लेकिन बाद में पुलिस ने दोनों के अपराध कबूल करने का दावा किया था।
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26 जून 2025 को आरोप-पत्र किया था दाखिल
इस मामले में 26 जून 2025 को पुलिस ने अमरदीप और रविता के खिलाफ कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल किया था। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में मोनू कश्यप (वादी अमित का भाई ), मुनेश (अमित की मां), कृष्ण, सपेरे प्रीतमनाथ, उप-निरीक्षक पंकज गौतम (पंचायतनामा के गवाह), कांस्टेबल क्लर्क रामप्रवेश (एफआईआर दर्ज करने वाले), डॉ. कपिल गर्ग (अमित का पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक), उप-निरीक्षक इंदु वर्मा (विवेचक), शुभम शर्मा (नोडल अधिकारी टेलीकॉम कंपनी) तथा लोकेश कुमार (नोडल अधिकारी टेलीकॉम कंपनी) आदि गवाहों के न्यायालय में बयान दर्ज कराए हैं।

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85 दिन में 703 बार हुईं बातचीत
सहायक शासकीय अधिवक्ता फरजाना मकसूद ने बताया कि मां मुनेश देवी ने दोनों को आपत्तिजनक हालत मेें पकड़ा था। इसके बाद अमित ने रविता और अमरदीप के संबंधों का विरोध शुरू कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने एक दूसरे से फोन पर अधिक बात करनी शुरू कर दी। इसकी पुष्टि टेलीकॉम कंपनी के नोडल अधिकारी के बयान और कोर्ट में पेश की गई सीडीआर में हुई है। सीडीआर के मुताबिक, रविता और अमरदीप की 18 जनवरी 2025 से 13 अप्रैल 2025 तक 85 दिनों में फोन पर 703 बार बातेें हुईं। वहीं, बचाव पक्ष की वकील ने एफआईआर दो दिन बाद होने आदि की दलील देते हुए आरोपियों को बचाने का प्रयास किया है।
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