मातृदिवस: भूखे पेट सोई पर नहीं मानी हार, मां के साथ पिता की जिम्मेदारी भी निभा रहीं सोमती
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शहर के शांति मोहल्ला निवासी सोमती देवी के पति इलम चंद की शहर में किराए की दुकान थी। घर में तीन बेटी अंजू, मंजू, रेखा, रजनी और दो बेटे राजन और राजीव थे। जब बड़ी बेटी अंजू जब केवल 13 साल और सबसे छोटा बेटा राजीव केवल दो साल का था, तो इलम चंद की बीमारी के चलते मौत हो गई। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। वहीं, घर में एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।
पिता की मौत के बाद तो परिवार पर तो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा। कुछ दिन तो रिश्तेदारों ने मदद की ,लेकिन इसके बाद सोमती ने अपना मन मजबूत किया। रिश्तेदारों की मदद से घर में सिलाई मशीन खरीदी और घर में ही महिलाओं के कपड़े बनाने का काम शुरू किया। धीरे धीरे बेटियां बड़ी होती रही और काम में हाथ बंटाने लगी। सबने मिलकर काम बढ़ाया और आज इस परिवार में सब खुशियां हैं।
बेटे बेटी में फर्क नहीं समझा
सोमती ने कहा कि उसने किसी भी बेटे या बेटी में फर्क नहीं समझा। सबको स्कूल भेजा। ग्रेजुएशन तक कराया। एक बेटी की बीमारी से मौत हो गई। दो बेटियों की शादी की। दोनों बेटों को पोस्ट ग्रेजुुएशन कराया। एक बेटा प्राइवेट कंपनी में एकाउंटेंट है जबकि दूसरा प्राइवेट स्कूल में जॉब कर रहा है। सबसे छोटी बेटी रजनी भी काम में हाथ बंटाती है।
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