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Meerut News: मन और वचन से की जाती है मां मातंगी की पूजा

Sat, 08 Feb 2025 02:17 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 08 Feb 2025 02:17 AM IST
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Mother Matangi is worshiped with mind and words.
हस्तिनापुर। माघ महीने में चल रहे गुप्त नवरात्रों के नौवें दिन प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में मां मातंगी माता की विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई।
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कस्बे के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में चल रही गुप्त नवरात्रि पूजा में शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने शामिल होकर माता की विधिविधान से पूजा-अर्चना की। मां मातंगी की पूजा के दौरान सुबह सूर्य देव को अर्घ्य दिया गया। इसके बाद मंदिर प्रांगण को गंगाजल से शुद्ध कर चौकी पर वेदी बनाकर माता मातंगी की प्रतिमा रखी गई। श्रद्धालुओं ने माता को वस्त्र, कुमकुम और शृंगार का सामान भेंट किया। इसके बाद देवी मातंगी की आरती और मंत्रों का जाप किया गया।
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मंदिर के संस्थापक सुदेश कुमार ने बताया कि शास्त्रों में गुप्त नवरात्र को बहुत ही शुभ और महत्वपूर्ण माना गया है। इस दौरान सभी दस महाविधा की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इसके अनुसार, नौवें दिन मां मातंगी की पूजा की जाती है। यह तंत्र और वचन की देवी हैं। यह एकमात्र ऐसी देवी हैं, जिनके लिए व्रत नहीं रखा जाता है। यह केवल मन और वचन से ही तृप्त हो जाती हैं।
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शास्त्रों के अनुसार, मतंग भगवान शिव का ही एक नाम है। भगवान शिव की आदिशक्ति देवी मातंगी हैं। मां मातंगी ने राक्षसों का वध करने के लिए तेजस्व रूप धारण किया। माता सदैव लाल रंग के वस्त्र धारण करती हैं। माता अपने पैरों में लाल पादुका और गले में लाल माला धारण करती हैं। मां मातंगी के हाथों में धनुष बाण, शंख, कटार, छत्र, त्रिशूल, अक्षमाला आदि लिए रहती हैं।

आचार्य मुकेश शांडिल्य ने बताया कि माघ गुप्त नवरात्र में साधक गुप्त तरीके से मनोकामना पूर्ति, मोक्ष प्राप्ति की कामना से देवी की तंत्र साधना, अराधना और पूजा पाठ करते हैं। गुप्त नवरात्र में पूजा-पाठ के साथ ही विशेष नियमों का पालन भी करना जरूरी होता है। इन नियमों की अनदेखी करने पर इसके विपरीत फल मिलने लगते हैं और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए माघ माह गुप्त नवरात्र के इन नौ दिनों में साधक को विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस अवसर पर ज्योति शर्मा, काजल शर्मा, मानसी, शिवम, पंडित मोहित शर्मा, कृष्ण सैनी, रामचंद्र शुक्ल, रामपाल आदि मौजूद रहे।
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