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खतरा बरकरार : मेरठ में ब्लैक फंगस के 24 नए मरीज मिले, एक संदिग्ध की मौत

Wed, 19 May 2021 12:04 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 19 May 2021 12:04 AM IST
सार

अगर शुरुआत में ही खांसी, जुकाम और बुखार जैसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह ले लें तो शुरुआती लक्षणों में ही कोरोना कंट्रोल हो जाता है।

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More than twenty black fungus patients found in Meerut, one suspect died
Black Fungus - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ में ब्लैक फंगस का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। संक्रमित मरीज लगातार मिल रहे हैं। बुधवार को 24 नए मरीज प्रकाश मे आए हैं। वहीं, देर रात आठ और मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। इस तरह आज मिले कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है, जबकि फलावदा थाना क्षेत्र के रहने वाले ब्लैक फंगस के एक संदिग्ध मरीज की मौत लोकप्रिय अस्पताल में हो गई। अब तक मेरठ में भर्ती इन मरीजों की संख्या 54 हो गई है।

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इनमें पांच का इलाज आनंद अस्पताल,  तीन की किडनी हॉस्पिटल में, दो का लोकप्रिय में, चार का निजी चिकित्सक के यहां, दो अन्य अस्पतालों में हैं। ये मरीज मेरठ के अलावा हापुड़, बुलन्दशहर, अमरोहा, गाज़ियाबाद, शामली और मुरादनगर के रहने वाले हैं। इनमें से कुछ कोविड हैं और कुछ नॉन कोविड मरीज़ हैं। 
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इलाज के लिए 66 इंजेक्शन मिले 
ब्लैक फंगस के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज को 66 इंजेक्शन मिले हैं। इनका नाम एम्फोटेरिशन-बी 50 मिग्रा है। सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि व्यक्ति के वजन के हिसाब से इसकी डोज़ दी जाती है। अभी तक इंजेक्शन नहीं थे।

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मेडिकल के कोविड प्रभारी डॉ. सुधीर राठी ने बताया कि जिन लोगों को कोविड-19 दौरान स्ट्रॉयड दवाएं जैसे डेक्सामेथासोन मिथाइलप्रेडनीसोलोन आदि का सेवन कराया गया है या काफी दिन तक ऑक्सीजन पर रखना पड़ा है या आईसीयू में रखा गया है, ऐसे मरीजों को ब्लैक फंगस का इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज के मरीज, कैंसर और किडनी इत्यादि के मरीजों में खतरा ज्यादा है।

आनंद अस्पताल में इन मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. पुनीत भार्गव ने बताया कि कोरोना होने पर स्ट्रॉयड का प्रयोग बिना डॉक्टर की सलाह के न करें। कोरोना होते ही तुरंत स्ट्रॉयड शुरू न करें। यह बीमारी शुरू होने के 7 दिनों बाद डॉक्टर लक्षण देखकर शुरू करते हैं।

अपनी देखरेख में 5 से 10 दिनों के लिए देते हैं और कोरोना के हर मरीज को स्ट्रॉयड नहीं दिए जाते हैं। इसमें थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। अगर हम शुरुआत में ही खांसी, जुकाम और बुखार जैसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह ले लें तो शुरुआती लक्षणों में ही कोरोना कंट्रोल हो जाता है।

मरीज किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी से बच जाता है। लिहाजा शुरुआती लक्षणों में ही डरने और छिपाने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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