{"_id":"5b603fe74f1c1b9c3e8b45d1","slug":"mohammad-rafi-songs-sung-in-22-languages-all-collection-this-man-has-from-up","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":" यूपी के इस शख्स के पास हैं मोहम्मद रफी के 22 भाषाओं में गाए हुए गीत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी के इस शख्स के पास हैं मोहम्मद रफी के 22 भाषाओं में गाए हुए गीत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 31 Jul 2018 04:28 PM IST
विज्ञापन
शाहिद बशीर बांए व मोहम्मद रफी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वर सम्राट मोहम्मद रफी के ढेरों गीत लोगों के पसंदीदा गीतों में शुमार हैं। उनके चाहने वालों की आज भी कमी नहीं है। एक ऐसा ही शख्स यूपी के नजीबाबाद में भी है जो रफी की गानों का इस कदर दीवाना है कि उसके पास रफी साहब के 22 भाषाओं गाए हुए गीतों का कलेक्शन है। आइए जानते हैं कि आखिर कौन है वह इंसान जिनके सिर चढ़कर बोलता है मोहम्मद रफी का जादू :-
विज्ञापन
इनके पास हैं रफी के 22 भाषाओं में गाए हुए गीत
यूपी के नजीबाबाद में रहने वाले शाहिद बशीर मोहम्मद रफी के ऐसे दीवाने हैं, जिन्होंने मोहम्मद रफी के बेशुमार गीतों का न केवल संकलन किया, बल्कि उनके गीतों और जीवनी पर एक एलबम भी तैयार की है। शाहिद बशीर ने पिछले चार दशक से मोहम्मद रफी के गीतों के दीवाने हैं। उनके पास रफी के गाए हिंदी गीतों के साथ 22 भाषाओं में मोहम्मद रफी के गाए गीतों का संकलन है।
मोहम्मद रफी के चाहने वाले उनके गीतों को गुनगुनाकर न केवल इस महान गायक को याद करते हैं बल्कि उनकी स्मृति में रफी फैंस क्लब का भी गठन किया गया है। शाहिद बशीर ने साहित्यकार मनोज त्यागी की प्रेरणा से डेढ़ दशक पूर्व मोहम्मद रफी फैंस क्लब की स्थापना की। क्लब के डॉ. राजीव अरोड़ा, मनोज त्यागी, डॉ. तसलीम मिर्जा, सरदार कुलवंत सिंह, अल्ताफ रजा, पंकज ठाकुर सहित कई सदस्य हर वर्ष मोहम्मद रफी के पुण्यतिथि और जन्म दिन पर गीतों भरी संध्या का आयोजन कर उनका पुण्य स्मरण करते हैं।
फैंस क्लब के सदस्य और मोहम्मद रफी का अनुसरण करने वाले जब सुरों के बादशाह के गीतों अपनी आवाज देते हैं तो ऐसा लगता है मानो आसमान से उतकर मोहम्मद रफी स्वयं उन गीतों को गा रहे हैं। हूबहू आवाज देना भी एक कला है इस कला को वहीं निभा पाता है जो कलाकार को दिल से अपने दिल में उतार लेता है। मोहम्मद रफी पुण्यतिथि 31 जुलाई को उनके चाहने वालों ने मोहम्मद रफी की याद में स्मृति सभा का आयोजन किया गया।
मोहम्मद रफी के चाहने वाले उनके गीतों को गुनगुनाकर न केवल इस महान गायक को याद करते हैं बल्कि उनकी स्मृति में रफी फैंस क्लब का भी गठन किया गया है। शाहिद बशीर ने साहित्यकार मनोज त्यागी की प्रेरणा से डेढ़ दशक पूर्व मोहम्मद रफी फैंस क्लब की स्थापना की। क्लब के डॉ. राजीव अरोड़ा, मनोज त्यागी, डॉ. तसलीम मिर्जा, सरदार कुलवंत सिंह, अल्ताफ रजा, पंकज ठाकुर सहित कई सदस्य हर वर्ष मोहम्मद रफी के पुण्यतिथि और जन्म दिन पर गीतों भरी संध्या का आयोजन कर उनका पुण्य स्मरण करते हैं।
फैंस क्लब के सदस्य और मोहम्मद रफी का अनुसरण करने वाले जब सुरों के बादशाह के गीतों अपनी आवाज देते हैं तो ऐसा लगता है मानो आसमान से उतकर मोहम्मद रफी स्वयं उन गीतों को गा रहे हैं। हूबहू आवाज देना भी एक कला है इस कला को वहीं निभा पाता है जो कलाकार को दिल से अपने दिल में उतार लेता है। मोहम्मद रफी पुण्यतिथि 31 जुलाई को उनके चाहने वालों ने मोहम्मद रफी की याद में स्मृति सभा का आयोजन किया गया।