70 साल बाद भी बदहाल : UP के तीन ऐसे गांव जहां आज तक न बिजली न पानी
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केंद्र और प्रदेश सरकारें आईं और चली गईं। हर सरकार ने गांव और ग्रामीणों के लिए तमाम योजनाएं संचालित की। लेकिन मेरठ के तीन गांवों तक आज तक कोई योजना और सरकारी सुविधा नहीं पहुंची। इन गांवों में बिजली, पानी, अस्पताल समेत कोई सुविधा नहीं है। जबकि पंचायत से लेकर संसद तक जाने वाले जनप्रतिनिधियों को चुनने में ये हमेशा सहभागिता करते आए हैं।
खादर क्षेत्र के तीन गांव उपेक्षित
हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में दर्जनों गांव आते हैं। समय के साथ अधिकांश गांवों में सरकारी योजनाएं और सुविधाएं पहुंचती रहीं। लेकिन तीन गांव आज तक इनसे महरूम हैं। यहां गंगा के बीच टापू पर तीन गांवों का मजरा है। इसमें मनोहरपुर, खेड़ीकला और बधवा शामिल हैं। इन तीनों गांवों की कुल आबादी करीब 3300 हैं। मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर यहां के लोग पहले गंगा तट पर बसे थे, लेकिन गंगा नदी ने अपनी धार बदली और ये गांव अब गंगा के बीच आ गये। मनोहरपुर के लोगों को 1984 में विस्थापित कर हस्तिनापुर के पास दूसरा गांव बसा दिया गया। अधिकांश लोग यहां शिफ्ट हो चुके हैं। जबकि खेड़ीकला और बधवा के लोग आज भी वहीं बसे हैं।
नहीं है कोई सुविधा
इन गांवों में मूलभूत सुविधाओं की बात करें तो सिर्फ एक प्राथमिक स्कूल है। गांव के अशोक कुमार ने बताया कि गांवों में आज तक बिजली नहीं पहुंची है। पीने के साफ पानी की भी व्यवस्था नहीं है। स्वास्थ्य सेवाएं भी गांव से दूर हैं। गांव आने जाने के लिए एक प्राइवेट नाव का सहारा है। जो सुबह ग्रामीणों को लेकर इस पार आती है और शाम को उस पार पहुंचाती है। बरसात में बाढ़ आने पर इस नाव का संचालन भी कभी कभी बंद करना पड़ता है।
एक माह पहले लगी सोलर लाइट
हरचरण ने बताया कि गांव में शाम ढलते ही अंधेरा हो जाता था। करीब दो माह पहले सीडीओ हर्षिता माथुर गांव का दौरा किया था। ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए उन्होंने सोलर लाइट लगाने के आदेश दिये थे, जिस पर छह-छह सोलर खेड़ीकला में लगाई गईं।
हस्तिनापुर से कर रहीं पढ़ाई
इन गांवों की बेटियां पढ़ाई को लेकर खासी जागरूक है। आशा ने बताया कि उसने स्नातक किया है। लेकिन प्राइमरी स्कूल में पढ़ने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए लड़कियों को हस्तिनापुर जाना पड़ता है। गांव की एक दर्जन से ज्यादा लड़कियां ऐसी हैं जो स्नातक कर चुकी हैं या कर रही हैं।
ग्राम प्रधान सुशीला का कहना है कि पहले तो गांव गंगा किनारे था, लेकिन गंगा का कटान हस्तिनापुर की तरफ हुआ तो गांव गंगा के बीच फंस गये। गांवों में आज तक न बिजली पहुंची और न ही स्वास्थ्य सेवाएं। एक स्कूल खुला है, वो भी आने जाने का संसाधन न होने के कारण कई माह बंद ही रहता है। जैसे मनोहरपुर को विस्थापित किया गया है। वैसे ही खेड़ीकला और बधवा को भी विस्थापित कराया जाए।
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